{"_id":"66e474266570c3c7b808370c","slug":"schools-closed-due-to-traffic-jam-exams-canceled-sonbhadra-news-c-194-1-son1002-117917-2024-09-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sonebhadra News: जाम के कारण स्कूलों ने कर दी छुट्टी, रद्द हुई परीक्षा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sonebhadra News: जाम के कारण स्कूलों ने कर दी छुट्टी, रद्द हुई परीक्षा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रेणुकूट। जाम, जाम और बस जाम। रेणुकूट की अब यही नियति हो गई है। पिछले तीन दिनों से जाम में जकड़े नगर की हालत शुक्रवार को और खस्ता हो गई। जाम ने ऐसा रूप लिया कि बच्चों के समय से न पहुंचने के कारण कई स्कूलों को छुट्टी करनी पड़ी। परीक्षाएं भी देर से शुरू हुईं। कर्मचारियों को समय से ड्यूटी पर पहुंचने के लिए आधे रास्ते में वाहन छोड़कर पैदल ही दफ्तर की ओर दौड़ लगानी पड़ी। जाम से निजात दिलाने के लिए लोग बार-बार एक्स पर सोनभद्र पुलिस को पोस्ट करते रहे। जवाब में पुलिस भी जाम हटाने की हरसंभव कोशिश की दलील देती रही, मगर तमाम कवायदों के बाद भी देर शाम तक वाहन सड़क पर रेंगते ही रहे।
बुधवार की शाम रेणुकूट-अनपरा के मध्य पिपरी में वनदेवी मंदिर के पास कोयला लदे ट्रक के पलट जाने के बाद से जाम लगना शुरू हुआ। इसके बाद से ही इस मार्ग पर वाहन रेंग रहे हैं। बृहस्पतिवार को सुबह किसी तरह जाम कुछ देर के लिए खुला, मगर थोड़ी देर बाद फिर वही स्थिति हो गई। शाम को काफी मशक्कत कर पुलिस ने आवागमन सुचारू कराया। देर रात रास्ते में कई जगह वाहनों के खराब होकर बीच सड़क पर फंस जाने से फिर से रास्ता बाधित हो गया। रात में शुरू हुआ जाम जाम शुक्रवार की शाम तक चलता रहा। तमाम मजदूर अपने कार्य पर नहीं पहुंच सके और स्कूली बच्चों को भी बस न आने के कारण घर वापस लौटना पड़ा। आदित्य बिड़ला पब्लिक स्कूल में चल रही अर्द्धवार्षिक परीक्षा को प्रधानाचार्य ने रद्द कर दिया, क्योंकि तमाम बच्चे स्कूल ही नहीं पहुंचे थे। इसके अलावा ग्रीनलैंड स्कूल, संत एबीआर पब्लिक स्कूल समेत कई विद्यालयों ने जाम के कारण छुट्टी कर दी। ग्रामीण क्षेत्र से आए बड़ी संख्या में आए किसान सब्जी लेकर वापस चले गए। नगर क्षेत्र के लोग आए दिन लग रहे जाम के पीछे लोग ओवरलोड वाहनों के मनमाने संचालन को कारण बता रहे हैं। अनपरा से रेणुकूट के बीच पहाड़ी रास्ते में वाहन अक्सर खराब हो जा रहे हैं। दो लेन की सड़क होने के कारण जाम लग जा रहा है। कोढ़ में खाज की स्थिति तब बन जाती है जब पटरियों पर बड़े-बड़े गड्ढे होने की वजह से गाड़ियां सड़क से नीचे नहीं उतर पातीं। हाथीनाला से शक्तिनगर तक सड़क पर पटरियों के न होने से भी स्थिति बहुत ज्यादा खराब हो रही है। पटरियों पर जगह-जगह बने बड़े-बड़े गड्ढे भी जाम न हटने का कारण बन रहे हैं। अगर पटरियों को मिट्टी और पत्थर से ही भर दिया जाए तो इस पर गाड़ियां किनारे लग सकती है लेकिन इस संबंध में भी कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है।
बीच रास्ते बस से उतरे, दो किमी पैदल किया सफर
छत्तीसगढ़ निवासी निरंजन कुमार ने बताया कि जाम के कारण वह मुर्धवा मोड़ से 2 किलोमीटर पहले जंगल में ही बस से उतर गए। वहां से पैदल ही मुर्धवा मोड़ पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह सब जिम्मेदारों की लापरवाही का नतीजा है। अगर ओवरलोड वाहनों का संचालन बंद कर दिया जाए तो ऐसी स्थिति नहीं होगी। पिपरी निवासी अनिल द्विवेदी ने कहा कि जाम की समस्या से नगर की बड़ी आबादी प्रभावित हो रही है, मगर जाम से निजात दिलाने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किया जा रहा। रेणुकूट निवासी व्यवसायी अखिलेश यादव ने कहा कि जाम लगने से स्कूली बच्चों को ज्यादा परेशानी होती है वह इस जाम में फंस जाते हैं और समय से स्कूल नहीं पहुंचते। कई बार उन्हें पैदल ही स्कूल तक की दूरी तय करनी पड़ रही है।
विज्ञापन
कर्मचारियों के न पहुंचने से काम प्रभावित
जाम की समस्या से आम जनमानस के साथ औद्योगिक संस्थानों का भी कार्य प्रभावित हो रहा है। समय से कर्मियों के कार्य पर नहीं पहुंचने से कारखाने का संचालन प्रभावित हो रहा है। पिपरी स्थित रिहंद जल विद्युत परियोजना के अधिशासी अभियंता शशिकांत राय ने बताया कि पिपरी चौराहे से रिहंद बांध के बीच में आए दिन जाम लगता रहता है, जिससे कर्मियों को आने-जाने में बहुत परेशानी होती है। उनके समय से न पहुंचने से कार्य प्रभावित हो रहा है। पिपरी नगर पंचायत अध्यक्ष दिग्विजय प्रताप सिंह ने कहा कि पटरियों पर मिट्टी डालकर उसे मरम्मत करा दिया जाए, लेकिन वन विभाग के अड़ंगे के कारण ऐसा नहीं हो पा रहा।
बच्चों का स्कूल छूटने से अभिभावकों में आक्रोश
दुद्धी। रेणुकूट में लगे जाम ने सैकड़ों छात्रों की पढ़ाई को प्रभावित कर दिया है। स्थानीय क्षेत्र के अलग-अलग गांव के विद्यार्थी प्रतिदिन स्कूली बस से रेणुकूट के निजी स्कूलों में पढ़ने जाते हैं। दो दिनों से भीषण जाम की वजह से बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पा रहे। इससे अभिभावकों में आक्रोश है। निजी विद्यालय के प्रबंधक ने बताया कि जाम में घंटों देर तक बच्चों को रखना ठीक नहीं है। इसलिए शुक्रवार को बच्चों से जाम की बात बताते हुए वापस कर दिया गया है। अभिभावक बालकृष्ण जायसवाल, डॉ. कृष्ण कुमार चौरसिया, शमीम अंसारी ने बताया कि बीते कई माह से छात्रों को आने-जाने में परेशान होना पड़ रहा है। अधिकारियों की लापरवाही की वजह से छात्रों की पढ़ाई, मजदूरों की मजदूरी, यात्री, मरीज सभी को दिक्कतें हो रही है।
विज्ञापन
बुधवार की शाम रेणुकूट-अनपरा के मध्य पिपरी में वनदेवी मंदिर के पास कोयला लदे ट्रक के पलट जाने के बाद से जाम लगना शुरू हुआ। इसके बाद से ही इस मार्ग पर वाहन रेंग रहे हैं। बृहस्पतिवार को सुबह किसी तरह जाम कुछ देर के लिए खुला, मगर थोड़ी देर बाद फिर वही स्थिति हो गई। शाम को काफी मशक्कत कर पुलिस ने आवागमन सुचारू कराया। देर रात रास्ते में कई जगह वाहनों के खराब होकर बीच सड़क पर फंस जाने से फिर से रास्ता बाधित हो गया। रात में शुरू हुआ जाम जाम शुक्रवार की शाम तक चलता रहा। तमाम मजदूर अपने कार्य पर नहीं पहुंच सके और स्कूली बच्चों को भी बस न आने के कारण घर वापस लौटना पड़ा। आदित्य बिड़ला पब्लिक स्कूल में चल रही अर्द्धवार्षिक परीक्षा को प्रधानाचार्य ने रद्द कर दिया, क्योंकि तमाम बच्चे स्कूल ही नहीं पहुंचे थे। इसके अलावा ग्रीनलैंड स्कूल, संत एबीआर पब्लिक स्कूल समेत कई विद्यालयों ने जाम के कारण छुट्टी कर दी। ग्रामीण क्षेत्र से आए बड़ी संख्या में आए किसान सब्जी लेकर वापस चले गए। नगर क्षेत्र के लोग आए दिन लग रहे जाम के पीछे लोग ओवरलोड वाहनों के मनमाने संचालन को कारण बता रहे हैं। अनपरा से रेणुकूट के बीच पहाड़ी रास्ते में वाहन अक्सर खराब हो जा रहे हैं। दो लेन की सड़क होने के कारण जाम लग जा रहा है। कोढ़ में खाज की स्थिति तब बन जाती है जब पटरियों पर बड़े-बड़े गड्ढे होने की वजह से गाड़ियां सड़क से नीचे नहीं उतर पातीं। हाथीनाला से शक्तिनगर तक सड़क पर पटरियों के न होने से भी स्थिति बहुत ज्यादा खराब हो रही है। पटरियों पर जगह-जगह बने बड़े-बड़े गड्ढे भी जाम न हटने का कारण बन रहे हैं। अगर पटरियों को मिट्टी और पत्थर से ही भर दिया जाए तो इस पर गाड़ियां किनारे लग सकती है लेकिन इस संबंध में भी कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है।
विज्ञापन
बीच रास्ते बस से उतरे, दो किमी पैदल किया सफर
छत्तीसगढ़ निवासी निरंजन कुमार ने बताया कि जाम के कारण वह मुर्धवा मोड़ से 2 किलोमीटर पहले जंगल में ही बस से उतर गए। वहां से पैदल ही मुर्धवा मोड़ पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह सब जिम्मेदारों की लापरवाही का नतीजा है। अगर ओवरलोड वाहनों का संचालन बंद कर दिया जाए तो ऐसी स्थिति नहीं होगी। पिपरी निवासी अनिल द्विवेदी ने कहा कि जाम की समस्या से नगर की बड़ी आबादी प्रभावित हो रही है, मगर जाम से निजात दिलाने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किया जा रहा। रेणुकूट निवासी व्यवसायी अखिलेश यादव ने कहा कि जाम लगने से स्कूली बच्चों को ज्यादा परेशानी होती है वह इस जाम में फंस जाते हैं और समय से स्कूल नहीं पहुंचते। कई बार उन्हें पैदल ही स्कूल तक की दूरी तय करनी पड़ रही है।
विज्ञापन
कर्मचारियों के न पहुंचने से काम प्रभावित
जाम की समस्या से आम जनमानस के साथ औद्योगिक संस्थानों का भी कार्य प्रभावित हो रहा है। समय से कर्मियों के कार्य पर नहीं पहुंचने से कारखाने का संचालन प्रभावित हो रहा है। पिपरी स्थित रिहंद जल विद्युत परियोजना के अधिशासी अभियंता शशिकांत राय ने बताया कि पिपरी चौराहे से रिहंद बांध के बीच में आए दिन जाम लगता रहता है, जिससे कर्मियों को आने-जाने में बहुत परेशानी होती है। उनके समय से न पहुंचने से कार्य प्रभावित हो रहा है। पिपरी नगर पंचायत अध्यक्ष दिग्विजय प्रताप सिंह ने कहा कि पटरियों पर मिट्टी डालकर उसे मरम्मत करा दिया जाए, लेकिन वन विभाग के अड़ंगे के कारण ऐसा नहीं हो पा रहा।
बच्चों का स्कूल छूटने से अभिभावकों में आक्रोश
दुद्धी। रेणुकूट में लगे जाम ने सैकड़ों छात्रों की पढ़ाई को प्रभावित कर दिया है। स्थानीय क्षेत्र के अलग-अलग गांव के विद्यार्थी प्रतिदिन स्कूली बस से रेणुकूट के निजी स्कूलों में पढ़ने जाते हैं। दो दिनों से भीषण जाम की वजह से बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पा रहे। इससे अभिभावकों में आक्रोश है। निजी विद्यालय के प्रबंधक ने बताया कि जाम में घंटों देर तक बच्चों को रखना ठीक नहीं है। इसलिए शुक्रवार को बच्चों से जाम की बात बताते हुए वापस कर दिया गया है। अभिभावक बालकृष्ण जायसवाल, डॉ. कृष्ण कुमार चौरसिया, शमीम अंसारी ने बताया कि बीते कई माह से छात्रों को आने-जाने में परेशान होना पड़ रहा है। अधिकारियों की लापरवाही की वजह से छात्रों की पढ़ाई, मजदूरों की मजदूरी, यात्री, मरीज सभी को दिक्कतें हो रही है।