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सोनभद्र में वायु प्रदूषण में आई कमी, लॉकडाउन में सुधरी स्थिति को बरकरार रखने पर जोर 

Wed, 16 Sep 2020 10:31 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनभद्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनभद्र Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Wed, 16 Sep 2020 10:31 PM IST
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Reduction in air pollution in Sonbhadra, emphasis on maintaining improved condition in lockdown
वायु प्रदूषण - फोटो : अमर उजाला

सोनभद्र जिले के वायु प्रदूषण में कमी आई है। प्रदेश के प्रमुख सचिव पर्यावरण सुधीर गर्ग की वर्चुअल मीटिंग के दौरान बुधवार को यह तथ्य सामने आए। प्रमुख सचिव ने अन्य प्रदूषित क्षेत्रों के साथ सोनभद्र की स्थिति की समीक्षा की। 2019-2020 के ऑनलाइन डाटा के आधार पर बताया गया कि एयर क्लीन प्रोग्राम के बाद से हालात सुधरे हैं। 2019 में जिले में औसतन 187 रहने वाला वायु गुणवत्ता सूचकांक़ 173 पर आ गया।

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 वर्चुअल मीटिंग में अनपरा परिक्षेत्र (ऊर्जांचल) के हालात पर चर्चा हुई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से एकत्रित आंकड़ों के आधार पर बताया गया कि 2019 में सोनभद्र के प्रदूषित क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक का वार्षिक औसत 187 था। वह 2020 में घटकर 173 पर आ गया।
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औद्योगिक और कोयला खनन परिक्षेत्र होने के नाते जिले की हालत की निगरानी करने और प्रदूषण नियंत्रण मानकों का पालन सख्ती से कराने का निर्देश दिया गया। इसी तरह, लखनऊ, कानपुर, आगरा, प्रयागराज, वाराणसी, गाजियाबाद, नोएडा, खुर्जा, फिरोजाबाद, गजरौला, झांसी, मुरादाबाद, रायबरेली, बरेली, मेरठ पर चर्चा की गई।
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मीटिंग में जिले के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी इं. राधेश्याम ने भाग लिया। बताया कि प्रमुख सचिव ने जिले की स्थिति, खासकर अनपरा परिक्षेत्र के हालात की जानकारी लेने के साथ ही प्रदूषण नियंत्रण के लिए लगातार निगरानी और मानकों के पालन पर सख्ती का निर्देश दिया है। कहा कि लॉकडाउन की तरह ही आगे भी जिले की स्थिति बेहतर रहे, इसका प्रयास जारी है। 

इन वजहों से सोनभद्र संवेदनशील

सोनभद्र जिले और सीमा से सटे मध्य प्रदेश के सिंगरौली में 21 हजार मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता वाले बिजलीघर स्थापित होने और इन परियोजनाओं में रोजाना सवा तीन लाख टन कोयला जलाने के कारण प्रदूषण के लिहाज से सोनभद्र का आधे से अधिक भूभाग बेहद संवेदनशील है।



यहां दस कोल परियोजनाओं से रोजाना लाखों टन कोयले के उत्पादन-परिवहन को भी प्रदूषण की मुख्य वजह माना जाता है। सड़क मार्ग से असुरक्षित तरीके से कोयले की ढुलाई से भी समस्या बढ़ जाती है।  बिजली घरों से निकलने वाली राख के सुरक्षित निस्तारण का भी प्रबंध नहीं है। 

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