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लोड पर ली गई लैंको और अनपरा की एक-एक इकाई, दो अब भी बंद
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अनपरा। ब्वायलर ट्यूब लीकेज (बीटीएल) के कारण बुधवार से बंद चल रही लैंको और शुक्रवार को फाल्ट के कारण बंद हुई अनपरा-डी की एक-एक इकाई को लोड पर ले लिया गया है। करीब एक हजार मेगावाट की दोनों इकाइयों से उत्पादन शुरू होने से निगम को थोड़ी राहत मिली है। उधर, अनपरा-बी और ए की बंद एक-एक इकाइयों में बीटीएल दुरुस्त करने में अभियंताओं की टीम दूसरे दिन भी लगी रही।
सूबे में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने में राज्य उत्पादन निगम को इन दिनों काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों को पर्याप्त कोयला नहीं मिल पा रहा। कम कोयले के बाद भी पूरी क्षमता से चल रही यह इकाइयां क्षमता से अधिक उत्पादन करने में लगी हैं। इसके बावजूद बड़ी मात्रा में निजी क्षेत्रों से महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है। इसी में तकनीकी फाल्ट से इकाइयों के बंद होने के कारण दुश्वारी और बढ़ रही है। उत्पादन निगम की सबसे बड़ी 2630 मेगावाट की अनपरा की ए, बी और डी तीनों परियोजनाओं में एक-एक इकाई से शुक्रवार को उत्पादन ठप हो गया था। मामूली फाल्ट के कारण बंद हुई 500 मेगावाट वाली डी-परियोजना की एक इकाई को तो शनिवार को लोड पर ले लिया गया, लेकिन बीटीएल के कारण बंद हुई 710 मेगावाट की दो अन्य इकाइयां अभी अनुरक्षण पर ही हैं। उधर, बुधवार को बीटीएल के कारण बंद हुई लैंको की एक इकाई को भी मरम्मत के बाद शनिवार से उत्पादनरत कर दिया गया है।
पानी के संकट से बंद है हाइड्रो इकाइयां
तापीय परियोजनाओं में कोयला संकट बना हुआ है तो दूसरी ओर भीषण गर्मी के कारण हाइड्रो इकाइयों को चलाने में पानी की कमी भी बाधा बन रही है। जलस्तर को देखते हुए रिहंद और ओबरा जल विद्युत परियोजना की इकाइयों को बंद रखा गया है। बिजली की मांग बढ़ने पर सस्ती उत्पादन निगम हाइड्रो इकाइयों की मदद लेता रहा है, लेकिन इस बार आगामी परिस्थितियों को देखते हुए फिलहाल इन दोनों की इकाइयों को बंद रखा गया है।
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सूबे में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने में राज्य उत्पादन निगम को इन दिनों काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों को पर्याप्त कोयला नहीं मिल पा रहा। कम कोयले के बाद भी पूरी क्षमता से चल रही यह इकाइयां क्षमता से अधिक उत्पादन करने में लगी हैं। इसके बावजूद बड़ी मात्रा में निजी क्षेत्रों से महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है। इसी में तकनीकी फाल्ट से इकाइयों के बंद होने के कारण दुश्वारी और बढ़ रही है। उत्पादन निगम की सबसे बड़ी 2630 मेगावाट की अनपरा की ए, बी और डी तीनों परियोजनाओं में एक-एक इकाई से शुक्रवार को उत्पादन ठप हो गया था। मामूली फाल्ट के कारण बंद हुई 500 मेगावाट वाली डी-परियोजना की एक इकाई को तो शनिवार को लोड पर ले लिया गया, लेकिन बीटीएल के कारण बंद हुई 710 मेगावाट की दो अन्य इकाइयां अभी अनुरक्षण पर ही हैं। उधर, बुधवार को बीटीएल के कारण बंद हुई लैंको की एक इकाई को भी मरम्मत के बाद शनिवार से उत्पादनरत कर दिया गया है।
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पानी के संकट से बंद है हाइड्रो इकाइयां
तापीय परियोजनाओं में कोयला संकट बना हुआ है तो दूसरी ओर भीषण गर्मी के कारण हाइड्रो इकाइयों को चलाने में पानी की कमी भी बाधा बन रही है। जलस्तर को देखते हुए रिहंद और ओबरा जल विद्युत परियोजना की इकाइयों को बंद रखा गया है। बिजली की मांग बढ़ने पर सस्ती उत्पादन निगम हाइड्रो इकाइयों की मदद लेता रहा है, लेकिन इस बार आगामी परिस्थितियों को देखते हुए फिलहाल इन दोनों की इकाइयों को बंद रखा गया है।
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