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पर्याप्त धन मिलने के बाद भी ढांचा है अधूरा
अमर उजाला ब्यूरो/सोनभद्र
Updated Tue, 17 Jan 2017 09:29 PM IST
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नगवॉ ब्लॉक के नंदना में अधूरा पड़ा राजकीय माडल स्कूल।
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सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में किस कदर अफसर लापरवाही बरत रहे हैं इसका उदाहरण निर्माणाधीन राजकीय मॉडल इंटर कालेज है। नगवां ब्लॉक के नंदना गांव में 2012 में विद्यालय निर्माण के लिए तीन करोड़ दो लाख रुपये में से दो करोड़ 72 लाख राजकीय निर्माण निगम को दे दिए गए लेकिन 40 फीसदी काम भी इस धन से नहीं हुआ। शिक्षा विभाग ने कार्यदायी संस्था के खिलाफ 2014 में रायपुर थाने में तहरीर दी लेकिन आज तक कार्रवाई नहीं हुई। पूछने पर डीआईओएस प्रभुराम का कहना है कि मामला प्रमुख सचिव स्तर पर चल रहा है, जल्द निर्माण फिर शुरू होगा।
नगवां ब्लॉक के अति नक्सल प्रभावित नंदना गांव में राजकीय मॉडल इंटर कालेज का निर्माण वर्ष 2012 से शुरू हुआ था। तीन करोड़ दो लाख रुपये की लागत से विद्यालय बनना था। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम को 90 फीसदी धन दो करोड़ 72 लाख रुपये रिलीज किया गया। लेकिन काम काफी धीमी गति से हुआ और करीब 40 फीसदी होने के बाद ही बंद हो गया।
वर्ष 2014 से काम बंद है और विभाग के अफसर इसको लेकर महज पंचायत में ही जुटे हैं। सूत्र बताते हैं कि डीआईओएस की ओर से कार्यदायी संस्था के खिलाफ एफआईआर के लिए 2014 में ही रायपुर थाने में तहरीर दी गई लेकिन लापरवाही की इंतहां रही कि किसी ने पता नहीं किया कि केस दर्ज कर अग्रिम कार्रवाई शुरू हुई भी या नहीं। स्थिति यह है कि अभी तक भवन निर्माण के नाम पर सिर्फ आधी-अधूरी दीवारें खड़ी हैं। अब यह निर्माण कब पूरा होगा और कब से नक्सल प्रभावित क्षेत्र के गरीबों के बच्चे इस विद्यालय में पढ़ेंगे इसको लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है।
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नगवां ब्लॉक के अति नक्सल प्रभावित नंदना गांव में राजकीय मॉडल इंटर कालेज का निर्माण वर्ष 2012 से शुरू हुआ था। तीन करोड़ दो लाख रुपये की लागत से विद्यालय बनना था। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम को 90 फीसदी धन दो करोड़ 72 लाख रुपये रिलीज किया गया। लेकिन काम काफी धीमी गति से हुआ और करीब 40 फीसदी होने के बाद ही बंद हो गया।
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वर्ष 2014 से काम बंद है और विभाग के अफसर इसको लेकर महज पंचायत में ही जुटे हैं। सूत्र बताते हैं कि डीआईओएस की ओर से कार्यदायी संस्था के खिलाफ एफआईआर के लिए 2014 में ही रायपुर थाने में तहरीर दी गई लेकिन लापरवाही की इंतहां रही कि किसी ने पता नहीं किया कि केस दर्ज कर अग्रिम कार्रवाई शुरू हुई भी या नहीं। स्थिति यह है कि अभी तक भवन निर्माण के नाम पर सिर्फ आधी-अधूरी दीवारें खड़ी हैं। अब यह निर्माण कब पूरा होगा और कब से नक्सल प्रभावित क्षेत्र के गरीबों के बच्चे इस विद्यालय में पढ़ेंगे इसको लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है।
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