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साढ़े नौ हजार हैंडपंपों ने छोड़ा पानी
अमर उजाला ब्यूरो सोनभद्र
Updated Fri, 12 Feb 2016 10:41 PM IST
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तेजी से गिरते भूगर्भ जलस्तर के चलते हैंडपंपों ने पानी उगलना बंद कर दिया है। एडीसी संस्था के हालिया सर्वे पर यकीन करें तो जिले में स्थापित करीब 35 हजार हैंडपंपों में से साढ़े नौ हजार हैंडपंप पूरी तरह से जवाब दे चुके हैं। जो चालू हैं भी तो उसमें से अधिकांश हैंडपंपों से पानी निकालने में ग्रामीणों को कड़ी मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
संस्था की ओर से एक रिपोर्ट भी जल निगम को सौंपी गई है। हालात को देखते हुए जल निगम ने ढाई सौ हैंडपंपों के रिबोर का प्रस्ताव मंजूरी के लिए शासन को भेज दिया है। वहीं शेष खराब हैंडपंपों की मरम्मत के लिए भी कार्ययोजना बनाई जा रही है।
जिले की अधिकांश आबादी पहाड़ी और पठारी इलाकों में निवास करती है। इस कारण प्रतिवर्ष मार्च आते-आते पेयजल संकट मुंह बाए खड़ा हो जाता है। अवर्षण के चलते इस बार स्थिति कुछ ज्यादा ही खराब है। स्थिति यह है कि राबर्ट्सगंज, घोरावल, चतरा, नगवां इलाके के साथ ही चोपन ब्लॉक के रेणुकापार और कोन अंचल, बभनी, दुद्धी, म्योरपुर परिक्षेत्र के साथ ही ऊर्जांचल के भाठ क्षेत्र में बूंद-बूंद पानी के लिए संकट की स्थिति बनने लगी है।
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जल निगम यूनिसेफ के अधिशासी अभियंता दिनेश कुमार भी स्थिति पर चिंता जताते हैं। बताया कि जिले में करीब छह हजार हैंडपंप मरम्मत योग्य पाए गए हैं। जिसको लेकर कार्ययोजना बनाने के साथ ही मरम्मत को लेकर संबंधितों को जरूरी दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
वहीं ढाई हजार हैंडपंप रिबोर लायक पाए गए हैं। इसका प्रस्ताव मंजूरी के लिए शासन को भेज भी दिया गया है। कोशिश है कि जल्द से जल्द प्रस्ताव स्वीकृति के साथ ही शासन से बजट भी अवमुक्त हो जाए।
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संस्था की ओर से एक रिपोर्ट भी जल निगम को सौंपी गई है। हालात को देखते हुए जल निगम ने ढाई सौ हैंडपंपों के रिबोर का प्रस्ताव मंजूरी के लिए शासन को भेज दिया है। वहीं शेष खराब हैंडपंपों की मरम्मत के लिए भी कार्ययोजना बनाई जा रही है।
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जिले की अधिकांश आबादी पहाड़ी और पठारी इलाकों में निवास करती है। इस कारण प्रतिवर्ष मार्च आते-आते पेयजल संकट मुंह बाए खड़ा हो जाता है। अवर्षण के चलते इस बार स्थिति कुछ ज्यादा ही खराब है। स्थिति यह है कि राबर्ट्सगंज, घोरावल, चतरा, नगवां इलाके के साथ ही चोपन ब्लॉक के रेणुकापार और कोन अंचल, बभनी, दुद्धी, म्योरपुर परिक्षेत्र के साथ ही ऊर्जांचल के भाठ क्षेत्र में बूंद-बूंद पानी के लिए संकट की स्थिति बनने लगी है।
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जल निगम यूनिसेफ के अधिशासी अभियंता दिनेश कुमार भी स्थिति पर चिंता जताते हैं। बताया कि जिले में करीब छह हजार हैंडपंप मरम्मत योग्य पाए गए हैं। जिसको लेकर कार्ययोजना बनाने के साथ ही मरम्मत को लेकर संबंधितों को जरूरी दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
वहीं ढाई हजार हैंडपंप रिबोर लायक पाए गए हैं। इसका प्रस्ताव मंजूरी के लिए शासन को भेज भी दिया गया है। कोशिश है कि जल्द से जल्द प्रस्ताव स्वीकृति के साथ ही शासन से बजट भी अवमुक्त हो जाए।