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एनजीटी की टीम ने चेताया, नदी में न जाए राख
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राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण की ओर से गठित तीन सदस्यीय टीम ने मंगलवार को ओबरा तापीय परियोजना सहित क्रशर एवं खदान क्षेत्रों का निरीक्षण किया। टीम ने सबसे पहले ओबरा तापीय परियोजना के राख निस्तारण के लिए रेणुका नदी पार बने चकाड़ी ऐश डैम का निरीक्षण किया। सख्त हिदायत दी कि निस्तारित राख किसी भी कीमत पर नदी में ना जाए।
टीम का नेतृत्व कर रहे आरडी पाटिल ने परियोजना की ओर से राख निस्तारण के लिए सारे बिंदुओं का लेआउट प्लान राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण को सम्मिलित करने को कहा है। जांच टीम को ओबरा तापीय परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक ने आश्वस्त किया कि किसी भी कीमत पर राख नदी में प्रवाहित नहीं की जाएगी। टीम ने यह भी स्वीकार किया कि ओबरा तापीय परियोजना काफी पुरानी है। इस वजह से शत प्रतिशत राख का निस्तारण ऐश डैम में संभव नहीं है। इसके बाद टीम ने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, कोल हैंडलिग प्लांट आदि का निरीक्षण किया। बता दें कि टीम सोनभद्र में स्थापित सभी कल कारखाने, बिजली घर एवं खदानों का स्थलीय निरीक्षण कर रिपोर्ट राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण को देगी। ओबरा तापीय परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक ई. दीपक कुमार ने बताया कि एनजीटी की टीम समय-समय पर निरीक्षण करती रहती है। जांच के दौरान राख निस्तारण के लिए बने एसटीपी संयंत्रों का संचालन संतोषजनक पाया गया है। टीम में एसडीएम शैलेंद्र कुमार मिश्रा, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी डॉ. टीएन सिंह, ओबरा तापीय परियोजना के महाप्रबंधक प्रशासन ई. जीके मिश्रा, एलपी गौतम, डीके सिंह, डीके उपाध्याय आदि रहे।
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टीम का नेतृत्व कर रहे आरडी पाटिल ने परियोजना की ओर से राख निस्तारण के लिए सारे बिंदुओं का लेआउट प्लान राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण को सम्मिलित करने को कहा है। जांच टीम को ओबरा तापीय परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक ने आश्वस्त किया कि किसी भी कीमत पर राख नदी में प्रवाहित नहीं की जाएगी। टीम ने यह भी स्वीकार किया कि ओबरा तापीय परियोजना काफी पुरानी है। इस वजह से शत प्रतिशत राख का निस्तारण ऐश डैम में संभव नहीं है। इसके बाद टीम ने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, कोल हैंडलिग प्लांट आदि का निरीक्षण किया। बता दें कि टीम सोनभद्र में स्थापित सभी कल कारखाने, बिजली घर एवं खदानों का स्थलीय निरीक्षण कर रिपोर्ट राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण को देगी। ओबरा तापीय परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक ई. दीपक कुमार ने बताया कि एनजीटी की टीम समय-समय पर निरीक्षण करती रहती है। जांच के दौरान राख निस्तारण के लिए बने एसटीपी संयंत्रों का संचालन संतोषजनक पाया गया है। टीम में एसडीएम शैलेंद्र कुमार मिश्रा, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी डॉ. टीएन सिंह, ओबरा तापीय परियोजना के महाप्रबंधक प्रशासन ई. जीके मिश्रा, एलपी गौतम, डीके सिंह, डीके उपाध्याय आदि रहे।
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