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कृष्ण की बाल लीला देखी
sonebhadra news
Updated Sun, 18 Nov 2018 11:38 PM IST
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रासलीला में मयूर नृत्य करते कलाकार।
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सोनभद्र। राबर्ट्सगंज नगर के रामलीला मैदान में चल रहे रासलीला में शनिवार की रात मथूरा वृदावन के कलाकारों ने कृष्ण के बाल लीला का मंचन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उधर घोरावल नगर में स्थित शिव मंदिर के धर्मशाला प्रांगण में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा भक्तियज्ञ के पांचवें दिन शनिवार रात्रि भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न बाल-लीलाओं का वर्णन एवं विश्लेषण किया गया। राधे-राधे एवं श्रीकृष्ण के जयकारों के बीच भगवान को प्रसाद चढ़ाया गया।
रासलीला में मइया यशोदा ने कान्हा को मटकी से माखन चोरी करते पकड़ लिया। कान्हा ने मुस्कुराते हुए मइया से दोबारा गलती न करने की बात कह कर उन्हें खुश कर दिया। रासलीला देखने के लिए दर्शकों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। व्यासपीठ से भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए श्रीब्रजरजदासजी महाराज ने राक्षसी पूतना द्वारा बालक कृष्ण को जहर लगे स्तनों को पिलाकर मारने का प्रयास और श्रीकृष्ण द्वारा पूतना का वध कर उसे मुक्ति प्रदान करने की रोचक कथा सुनाई। शकटासुर वध, बकासुर वध, गर्ग ऋषि द्वारा गुप्तरुप से कृष्ण व बलराम का नामकरण संस्कार, बाल सखाओं के साथ कृष्ण द्वारा गोपियों के घरों में माखन चोरी इत्यादि प्रसंगों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। श्रीब्रजरजदासजी महाराज ने प्रभु श्रीकृष्ण की लीलाओं का विश्लेषण करते हुए कहा कि जब जब धरती पर अधर्मी शक्तियां प्रभावी होती हैं तब तब धरती को पाप व पापियों से मुक्त करने के लिए स्वयं जगदीश्वर श्रीहरि विष्णु अवतार धारण कर इस वसुंधरा पर अवतरित होते हैं। कहा कि मुक्ति का सबसे सरल मार्ग है भक्ति और प्रभु का नामजप। संतों की सेवा, दरिद्रनारायण की सेवा और समस्त प्राणियों में स्वयं का स्वरूप देखने वाला ही प्रभु के चरणों में स्थान पाने का अधिकारी होता है। अशोक अग्रहरि, कृष्णकुमार उमर, काजू अग्रहरि, दयाशंकर रौनियार, द्वारिका प्रसाद खेमका,संतोष कुमार उमर, विपिन बिहारी इत्यादि मौजूद रहे।
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रासलीला में मइया यशोदा ने कान्हा को मटकी से माखन चोरी करते पकड़ लिया। कान्हा ने मुस्कुराते हुए मइया से दोबारा गलती न करने की बात कह कर उन्हें खुश कर दिया। रासलीला देखने के लिए दर्शकों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। व्यासपीठ से भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए श्रीब्रजरजदासजी महाराज ने राक्षसी पूतना द्वारा बालक कृष्ण को जहर लगे स्तनों को पिलाकर मारने का प्रयास और श्रीकृष्ण द्वारा पूतना का वध कर उसे मुक्ति प्रदान करने की रोचक कथा सुनाई। शकटासुर वध, बकासुर वध, गर्ग ऋषि द्वारा गुप्तरुप से कृष्ण व बलराम का नामकरण संस्कार, बाल सखाओं के साथ कृष्ण द्वारा गोपियों के घरों में माखन चोरी इत्यादि प्रसंगों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। श्रीब्रजरजदासजी महाराज ने प्रभु श्रीकृष्ण की लीलाओं का विश्लेषण करते हुए कहा कि जब जब धरती पर अधर्मी शक्तियां प्रभावी होती हैं तब तब धरती को पाप व पापियों से मुक्त करने के लिए स्वयं जगदीश्वर श्रीहरि विष्णु अवतार धारण कर इस वसुंधरा पर अवतरित होते हैं। कहा कि मुक्ति का सबसे सरल मार्ग है भक्ति और प्रभु का नामजप। संतों की सेवा, दरिद्रनारायण की सेवा और समस्त प्राणियों में स्वयं का स्वरूप देखने वाला ही प्रभु के चरणों में स्थान पाने का अधिकारी होता है। अशोक अग्रहरि, कृष्णकुमार उमर, काजू अग्रहरि, दयाशंकर रौनियार, द्वारिका प्रसाद खेमका,संतोष कुमार उमर, विपिन बिहारी इत्यादि मौजूद रहे।
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