{"_id":"57cafdb54f1c1b8f292cb575","slug":"honorarium-for-hunger-strike","type":"story","status":"publish","title_hn":"मानदेय के लिए की भूख हड़ताल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मानदेय के लिए की भूख हड़ताल
ब्यूरो/ अमर उजाला /सोनभद्र
Updated Sat, 03 Sep 2016 10:23 PM IST
विज्ञापन
कलेक्ट्रेट में शनिवार को क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे शिक्षा प्रेरक।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पिछले करीब 14 माह से मानदेय न मिलने से नाराज शिक्षा प्रेरकों ने शनिवार को कलेक्ट्रेट में क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठ गए। चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक बकाया मानदेय का भुगतान नहीं होगा तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
आदर्श लोक शिक्षा प्रेरक वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले शिक्षा प्रेरक मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे और भूख हड़ताल पर बैठ गए। जिलाध्यक्ष दिनेश बियार ने कहा कि प्रतिमाह प्रत्येक शिक्षा प्रेरक को सिर्फ दो हजार मानदेय दिया जाता है। कहा कि 14 माह से मानदेय न मिलने से कई प्रेरक भुखमरी के कगार पर पहुंच गए है। पूर्व में कई बाद जिला प्रशासन को बकाया मानदेय का भुगतान कराने के लिए मांगपत्र दिया गया, लेकिन अभी तक मानदेय नहीं मिला। छाया सिंह ने कहा कि शिक्षा प्रेरकों के मानदेय से अधिक मनरेगा श्रमिकों की मजदूरी हैै। जबकि प्रेरकों को करीब 66 रुपये प्रतिदिन मिलता हैै।
प्रेरकों का मानदेय कम से कम 20 हजार रुपये किया जाए, ताकि परिवार का जीवकोपार्जन कर सकें। विजेंद्र कुमार ने कहा कि केंद्रीय कर्मचारियों की भांति प्रत्येक वर्ष शिक्षा प्रेरकों के मानदेय में बढ़ोतरी हो। प्रदीप कुमार और सिद्धेश्वर शुक्ला ने कहा कि ऑनलाइन शिक्षा प्रेरकों के मानदेय का भुगतान किया जाए। इस मौके पर धर्मेंद्र पासवान, शारदा प्रसाद, पवन गुप्ता, रामभरोसे, विनय पांडेय, जयसिंह, अनुज कुमार, अनिल आदि रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
आदर्श लोक शिक्षा प्रेरक वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले शिक्षा प्रेरक मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे और भूख हड़ताल पर बैठ गए। जिलाध्यक्ष दिनेश बियार ने कहा कि प्रतिमाह प्रत्येक शिक्षा प्रेरक को सिर्फ दो हजार मानदेय दिया जाता है। कहा कि 14 माह से मानदेय न मिलने से कई प्रेरक भुखमरी के कगार पर पहुंच गए है। पूर्व में कई बाद जिला प्रशासन को बकाया मानदेय का भुगतान कराने के लिए मांगपत्र दिया गया, लेकिन अभी तक मानदेय नहीं मिला। छाया सिंह ने कहा कि शिक्षा प्रेरकों के मानदेय से अधिक मनरेगा श्रमिकों की मजदूरी हैै। जबकि प्रेरकों को करीब 66 रुपये प्रतिदिन मिलता हैै।
विज्ञापन
प्रेरकों का मानदेय कम से कम 20 हजार रुपये किया जाए, ताकि परिवार का जीवकोपार्जन कर सकें। विजेंद्र कुमार ने कहा कि केंद्रीय कर्मचारियों की भांति प्रत्येक वर्ष शिक्षा प्रेरकों के मानदेय में बढ़ोतरी हो। प्रदीप कुमार और सिद्धेश्वर शुक्ला ने कहा कि ऑनलाइन शिक्षा प्रेरकों के मानदेय का भुगतान किया जाए। इस मौके पर धर्मेंद्र पासवान, शारदा प्रसाद, पवन गुप्ता, रामभरोसे, विनय पांडेय, जयसिंह, अनुज कुमार, अनिल आदि रहे।
विज्ञापन