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खसरा-खतौनी दुरुस्त न करने पर हाईकोर्ट सख्त

Mon, 05 Sep 2022 12:09 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 05 Sep 2022 12:09 AM IST
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High court strict on not correcting measles-khatauni
आदेश के बावजूद टांड़ के डौर (राबर्ट्सगंज) की खसरा-खतौनी दुरुस्त न करने पर हाईकोर्ट ने अवमानना की नोटिस जारी की है। जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल ने डीएम सहित अन्य को नोटिस जारी कर एक माह के अंदर आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने को कहा है।
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टांड़ के डौर उर्फ राबर्ट्सगंज में खुद को अमरनाथ महाल का जमींदार बताने वाले पारसनाथ अग्रहरी ने अधिवक्ता अनिल कुमार मिश्रा के जरिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। कहा था कि राबर्ट्सगंज के एक हिस्से में जमींदारी विनाश कानून के प्रावधान लागू नहीं हैं। जिला प्रशासन 1995 से अब तक इससे जुड़े रिकॉर्ड मेंटेन नहीं कर रहा। इस एरिया की वर्ष में तीन बार पड़ताल करते हुए नानजेडए खसरा-खतौनी तैयार करना और अभिलेख अद्यतन रखना लेखपाल की जिम्मेदारी है। इसके लिए डीएम को निर्देशित किये जाने की मांग थी। इस पर हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन से जानकारी मांगी। तब 1995 से अब तक जमींदारी से जुड़ी प्रक्रिया के तहत खतौनी का लेखन कार्य न होने का मामला सामने आया। हाईकोर्ट ने खतौनी अपडेट क्यों नहीं की गई, इसको लेकर क्या कार्रवाई की जा रही है, इसका विवरण मांगा। तत्कालीन डीएम ने स्टैंडिंग काउंसिल के जरिए कोर्ट को बताया कि उनके पूर्व के डीएम की तरफ से 25 अगस्त 2020 को ही ग्राम टांड़ के डौर उर्फ राबर्ट्सगंज के जमींदारी की खतौनी खसरा एवं अन्य अभिलेखों की पड़ताल एवं उसे अद्यतन करने के लिए टीम गठित की जा चुकी है। कोरोना में व्यस्तता के कारण नानजेडए के खतौनी का लेखन कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है। डीएम ने दो माह के भीतर नानजेडए खतौनी का लेखन कार्य पूर्ण कराने की बात कही थी। तब कोर्ट ने मामले को निस्तारित कर दिया था लेकिन खसरा-खतौनी दुरूस्त न होने पर अवमानना का विकल्प खुला रखा था। हालांकि लेखपालों की तरफ से राजस्व रिकॉर्ड दुरूस्त न किए जाने के कारण ये मामला एक बार फिर से हाईकोर्ट जा पहुंचा है। वहां से डीएम सहित अन्य को अवमानना की नोटिस जारी कर एक माह के भीतर आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने को कहा गया है।
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काफी इंतजार के बाद भी रिकॉर्ड दुरूस्त नहीं किया गया, तब मामले को लेकर अवमानना याचिका दाखिल की गई। गत 29 अगस्त को इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की बेंच ने डीएम सहित अन्य को नोटिस जारी की है। आदेश में कहा गया है कि अभिलेख के अवलोकन से प्रथम दृष्ट्या यह अवमानना का मामला है। नोटिस जारी कर पक्षकारों को एक और अवसर दिया गया है कि एक महीने के भीतर आदेश का पालन करते हुए, उसकी अनुपालन आख्या उपलब्ध कराई जाए।
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- अनिल मिश्रा, अधिवक्ता, इलाहाबाद हाईकोर्ट
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