घोरावल। कोतवाली के उभ्भा गांव में 17 जुलाई 2019 को भूमि संबंधी विवाद में 11 आदिवासियों की हत्या होने के बाद प्रदेश सरकार ने इमदाद का पिटारा खोल दिया था। प्रत्येक मृतक आश्रित को करीब 18.50 लाख रुपये दिए गए। इसके अलावा पीड़ितों और पात्रों को जमीन का पट्टा, आवास, शौचालय, राशनकार्ड, गोल्डेन कार्ड आदि दिए गए। गांव में पुलिस चौकी, सड़कों की मरम्मत समेत अन्य विकास कार्य कराए गए। हालांकि मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी अभी तक पुलिस चौकी और पं. दीनदयाल उपाध्याय आश्रम पद्धति विद्यालय के भवन का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।उभ्भा गांव में 17 जुलाई 2019 को एक समिति की विवादित जमीन को लेकर दो पक्षों में लाठी-डंडे, गोली, धारदार हथियार चले थे। इसमें एक पक्ष से 11 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं दोनों तरफ से ढाई दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए थे। जहां प्रदेश सरकार ने प्रभावित लोगों को मदद बांटी थी तो वहीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की तरफ से प्रत्येक मृतक के आश्रितों को 10 लाख रुपये व घायलों को एक-एक लाख रुपये आर्थिक सहायता प्रदान की गई। सपा ने भी एक-एक लाख रुपये व घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता दी। दूसरी बार 13 सितंबर 2019 को उभ्भा गांव आए मुख्यमंत्री ने पीड़ितों व ग्रामीणों को जमीन का पट्टा दिया था और गांव के विकास के लिए 340 करोड़ रुपये की 35 परियोजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण किया था। उधर, आदिवासियों के पक्ष में केस की पैरवी करने वाले कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामराज गोंड़ ने बताया कि उभ्भाकांड के बाद तीन चार महीने तक बड़े नेताओं व अधिकारियों के लगातार दौरे से गांव के विकास व मुख्यमंत्री की घोषणाओं को अमलीजामा पहनाने के लिए प्रशासन सिर के बल खड़ा रहा। लेकिन जैसे-जैसे दिन बीतते गए, प्रशासन के कार्य कराने का रवैया भी ढीला होता गया। सीएम की घोषणा के बावजूद अभी तक पुलिस चौकी के भवन का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, जबकि चौकी के लिए निर्धारित जगह पर भूमि पूजन हो चुका है। वर्तमान में पुलिस चौकी उभ्भा से करीब सात किलोमीटर दूर कन्हारी मोड़ पर बने प्राथमिक विद्यालय से संचालित हो रही है। आश्रम पद्धति विद्यालय की स्थापना के लिए अभी तक कोई सार्थक प्रयास नहीं हुआ। कहा कि सरकार द्वारा घोषित बहुत सी परियोजनाओं का काम धीमी गति से चल रहा है अथवा अभी तक काम ही शुरू नहीं हुआ है। आरोप लगाया कि प्रशासन की ओर से पट्टे की जमीन के आवांटन में गड़बड़ी करने और आधारभूत सुविधाओं को मुहैया कराने में लापरवाही बरतने पीड़ित नाराज हैं।