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Sonebhadra News: आपस में नफरत आपस में तकरार, मानव के जीवन की है सबसे बड़ी हार...
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शहीद स्थल प्रबंधन ट्रस्ट करारी और सोनभद्र बार एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को बार एसोसिएशन सभागार में आयोजित कवि गोष्ठी में कवियों ने अपनी रचनाओं से लोगों की वाहवाही लूटी।
कौशल्या कुमारी चौहान ने आपस में नफरत आपस में तकरार, मानव के जीवन की है सबसे बड़ी हार सुनाकर तालियां बटोरी। गोष्ठी की शुरूआत शिक्षक, साहित्यकार राष्ट्रपति पदक विजेता ओमप्रकाश त्रिपाठी एवं उपन्यासकार कथाकार रामनाथ शिवेन्द्र ने मां सरस्वती, तुलसीदास और प्रेमचंद के चित्र पर माल्यार्पण कर और दीप प्रज्ज्वलित कर की।
गोष्ठी में धर्मेंश चौहान ने नित नूतन निर्माण हो जीवन, नीव अटल आधार हो जीवन, प्रद्युम्न त्रिपाठी ने पड़े जरूरत जब भी वतन को कफन बांध हम आएंगे, काश लहू का इक इक कतरा भारत मां के काम आए सुनाकर देश प्रेम का भाव जगाया।
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विकास वर्मा ने मजहब को अपने घर में ही महदूद कीजिये, दयानंद दयालू ने उजड़ल जाता बाग बगइचा सगरो लागै सूना, दिलीप सिंह दीपक ने जला श्मशान में घंटों तलक बस राख होने को सुनाकर वाहवाही लूटी।
इसी तरह दिवाकर मेघ ने बीए पढै लागल बा बेटौवा सुनाया तो संचालन कर रहे अशोक तिवारी ने बेबसी अंधेरे की जब देखी नहीं गयी,, हमने घर जलाकर रौशनी की है सुनाया। गोष्ठी में अजय चतुर्वेदी कक्का,राकेश शरण मिश्र, प्रभात सिंह चंदेल, सुधाकर स्वदेश प्रेम ने भी रचनाएं सुनाई। इस अवसर पर मदन चौबे, अमित सिंह, विवेक चतुर्वेदी,
दीपक केसरवानी, सुशील मिश्रा, दिव्या राय, बार अध्यक्ष अरुण मिश्र, अखिलेश कुमार पांडेय, पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र कुमार पाठक, चंद्र प्रकाश द्विवेदी, जयशंकर त्रिपाठी, राकेश दूबे, देवानंद पांडेय आदि रहे।
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कौशल्या कुमारी चौहान ने आपस में नफरत आपस में तकरार, मानव के जीवन की है सबसे बड़ी हार सुनाकर तालियां बटोरी। गोष्ठी की शुरूआत शिक्षक, साहित्यकार राष्ट्रपति पदक विजेता ओमप्रकाश त्रिपाठी एवं उपन्यासकार कथाकार रामनाथ शिवेन्द्र ने मां सरस्वती, तुलसीदास और प्रेमचंद के चित्र पर माल्यार्पण कर और दीप प्रज्ज्वलित कर की।
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गोष्ठी में धर्मेंश चौहान ने नित नूतन निर्माण हो जीवन, नीव अटल आधार हो जीवन, प्रद्युम्न त्रिपाठी ने पड़े जरूरत जब भी वतन को कफन बांध हम आएंगे, काश लहू का इक इक कतरा भारत मां के काम आए सुनाकर देश प्रेम का भाव जगाया।
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विकास वर्मा ने मजहब को अपने घर में ही महदूद कीजिये, दयानंद दयालू ने उजड़ल जाता बाग बगइचा सगरो लागै सूना, दिलीप सिंह दीपक ने जला श्मशान में घंटों तलक बस राख होने को सुनाकर वाहवाही लूटी।
इसी तरह दिवाकर मेघ ने बीए पढै लागल बा बेटौवा सुनाया तो संचालन कर रहे अशोक तिवारी ने बेबसी अंधेरे की जब देखी नहीं गयी,, हमने घर जलाकर रौशनी की है सुनाया। गोष्ठी में अजय चतुर्वेदी कक्का,राकेश शरण मिश्र, प्रभात सिंह चंदेल, सुधाकर स्वदेश प्रेम ने भी रचनाएं सुनाई। इस अवसर पर मदन चौबे, अमित सिंह, विवेक चतुर्वेदी,
दीपक केसरवानी, सुशील मिश्रा, दिव्या राय, बार अध्यक्ष अरुण मिश्र, अखिलेश कुमार पांडेय, पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र कुमार पाठक, चंद्र प्रकाश द्विवेदी, जयशंकर त्रिपाठी, राकेश दूबे, देवानंद पांडेय आदि रहे।