फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sonebhadra News ›   Girls' education , poor safety

बालिका शिक्षा, सुरक्षा की स्थिति लचर

Tue, 22 Sep 2015 11:52 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, सोनभद्र
अमर उजाला ब्यूरो, सोनभद्र Updated Tue, 22 Sep 2015 11:52 PM IST
विज्ञापन
Girls' education , poor safety

विज्ञापन
जिले में बालिका शिक्षा व्यवस्था बेपटरी है। शिक्षा के साथ ही सुरक्षा व्यवस्था भी लचर है। आश्रम पद्धति विद्यालय और कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय में पढ़ने वाली बालिकाओं को समुचित सुविधाओं के लिए तरसना पड़ता है।

कमोबेश यही हाल परिषदीय विद्यालयों की है। अधिकांश परिषदीय विद्यालयों में बालिकाओं को जमीन पर बैठकर शिक्षा ग्रहण करने के लिए आज भी विवश होना पड़ता है। मेन्यू के अनुसार भोजन भी उन्हें नहीं दिया जाता है।
विज्ञापन


जिले में बालिकाओं की शिक्षा के लिए विशेष रूप से कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय और आश्रम पद्धति बालिका आवासीय विद्यालय संचालित है। कस्तूरबा गांधी के विद्यालय सभी ब्लाकों में एक-एक है, जबकि चोपन ब्लाक में दो जगहों पर है। परिषदीय विद्यालयों में भी बालिकाएं अध्ययनरत हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


 कक्षा छह तक करीब 75 हजार बालिकाएं विद्यालयों में अध्ययनरत हैं, लेकिन उनकी शिक्षा का कोई खास इंतजाम नहीं है। शिक्षकों की भारी कमी का सीधा असर बालिकाओं की शिक्षा पर पड़ रहा है।

 ज्यादातर परिषदीय विद्यालयों में कक्षा छह तक की छात्राएं अब भी जमीन पर ही बैठती हैं। कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में बालिकाओं को आवासीय शिक्षा दी जाती है, लेकिन यहां भी मुकम्मल इंतजाम नहीं है।

 नगवां के कस्तूरबा गांधी विद्यालय नंदना में अब तक विद्युतीकरण नहीं हो सका है। यहां का शौचालय खराब पड़ा है। इस नाते छात्राओं को शौच के लिए बाहर जाना पड़ता है। पूर्व में छात्राएं इसका विरोध भी कर चुकी हैं लेकिन विभाग कोई पुख्ता इंतजाम अब तक नहीं कर सका है। ऐसा ही हाल अन्य विद्यालयों का भी है।

जहां शिक्षा को लेकर व्यवस्था बेपटरी हो चुकी है। वहीं बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर भी विभाग गंभीर नहीं है। सरकार ने बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर नवाचार शिक्षा की व्यवस्था की है।

 इसके तहत बालिकाओं को सप्ताह में तीन दिन जूडो कराटे का प्रशिक्षण देना था। यह प्रशिक्षण 90 दिन का होना था। प्रत्येक ब्लाक में एक प्रशिक्षक की नियुक्ति की जानी थी लेकिन अब तक इस पर विभाग कोई कार्य नहीं कर सका। न तो ब्लाकवार विद्यालयों का चयन किया गया और न ही प्रशिक्षकों की तैनाती की गई।


इस संबंध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रामभरन राम राजभर का कहना है कि उन्हें जिले में तैनात हुए महज दो दिन हुए हैं। यहां की व्यवस्था के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। जानकारी ली जाएगी कि शासन से क्या-क्या इंतजाम हैं और उनका क्रियान्वयन यहां हो रहा है कि नहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed