खून-पसीना एक कर धान की फसल उपजाने के बाद किसान अब उसे बेचने के लिए परेशान हैं। क्रय केंद्रों के बाहर वह ट्रैक्टर ट्राली पर धान लेकर कई दिनों से लाइन लगाए हुए हैं, मगर तौल ही नहीं हो पा रही। शनिवार को भी जिले में विपणन विभाग के केंद्रों पर धान खरीद ठप रही तो अन्य केंद्रों पर मजदूर, बोरा या नियमों के फेर में किसानों का धान नहीं बिक सका। व्यवस्था के प्रति किसानों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है।
किसानों को बिचौलियों के चंगुल से बचाने और उपज का सही मूल्य दिलाने के लिए सरकार ने जिले में विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से सौ क्रय केंद्र स्थापित किए हैं। किसानों की सहूलियत के लिए इस बार भले ही क्रय केंद्र की संख्या बढ़ा दी गई है, लेकिन धान की बिक्री में आफत खत्म नहीं हो रही। पहले बोरे और मजदूरों की कमी के कारण धान की खरीद बाधित रही तो अब रोजाना बदल रहे नियमों ने किसानों को परेशान किया है। सिर्फ किसान ही नहीं, खरीद कार्य में लगे अधिकारी भी परेशान हैं। उन्हें खुद समझ नहीं आ रहा कि कब-किस नियम से खरीद की जानी है। इसका सीधा असर खरीद प्रक्रिया पर पड़ा है। सरकारी दावे में लक्ष्य के सापेक्ष 50 फीसदी धान खरीदने का दावा किया जा रहा है, जबकि अब भी ज्यादातर किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर धान बेचने से वंचित है। पिछले चार दिनों से विपणन विभाग के क्रय केंद्रों पर धान खरीद पूरी तरह ठप पड़ी है। शनिवार को भी किसान विभिन्न केंद्रों पर उपज लेकर भटकते रहे। दिनभर इंतजार के बाद भी उन्हें मायूसी मिली। रविवार को अवकाश के कारण खरीद बंद रहेगी। मौसम के रुख से किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। वहीं ट्रैक्टर ट्राली का किराया भी बढ़ रहा है।