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आज शाम थम जाएगा चुनावी शोर, सीमाओं पर लग जाएंगे बैरियर
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सोनभद्र। सातवें चरण में मतदान के लिए अब उल्टी गिनती शुरू हो गई है। अंतिम समय में राजनीतिक दलों ने जहां पूरी ताकत झोंक दी है तो प्रशासन भी सकुशल चुनाव कराने के लिए मुस्तैदी से जुट गया है। शनिवार की शाम से चुनाव प्रचार का शोर थम जाएगा। इसके साथ ही प्रशासन ने बाहर के सभी लोगों को जिले की सीमा छोड़ने का सख्त निर्देश दिया है। इस अवधि के बाद अगर कोई राजनीतिक व्यक्ति जिले की सीमा में पाया गया तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिले से लगते चार राज्यों की सीमा पर भी बैरियर स्थापित कर चेकिंग शुरू की जाएगी।
नाव प्रचार का अंतिम दौर होने के कारण सभी दल मतदाताओं को रिझाने में एड़ी-चोटी का जोर लगा रखे हैं। भाजपा, सपा, कांग्रेस, बसपा सहित अन्य दलों के नेता जिले में जनसंपर्क और सभाएं कर रहे हैं। चुनाव के एलान के बाद से ही शुरू हुआ प्रचार का शोर शनिवार की शाम से थम जाएगा। इसके बाद प्रत्याशी व नेता सिर्फ पैदल घर-घर जाकर जनसंपर्क ही कर पाएंगे। किसी भी तरह की सभा या रैली नहीं हो पाएगी। प्रचार में दौड़ रहे सभी वाहनों से झंडे भी उतार दिए जाएंगे। अंतिम समय में वोटरों को अपने पाले में लाने के लिए धनबल, बाहुबल के इस्तेमाल की आशंकाओं के मद्देनजर खूफिया इकाई को भी सतर्क किया गया है। फ्लाइंग स्क्वाड, स्टेटिक सर्विलांस टीम सहित अन्य टीमों को लगाया गया है। नक्सल प्रभावित जिले की सीमाएं छत्तीसगढ़, मप्र, झारखंड और बिहार से लगती हैं। इन प्रांतों से विभिन्न कार्यों से रोजाना हजारों लोगों का आवागमन होता है। चुनाव प्रचार के लिए भी इन प्रांतों से राजनीतिक लोग जिले में डेरा डाले हुए हैं। मतदान तिथि से पहले इन्हें हर हाल में जिला छोड़ने का निर्देश दिया गया है। जिला निर्वाचन अधिकारी टीके शिबू ने सभी उपजिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में मतदान के 48 घंटे पूर्व जन सभा, रोड शो आदि पर पूरी तरी से प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया है। रोक के बाद भी प्रचार-प्रसार करने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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नाव प्रचार का अंतिम दौर होने के कारण सभी दल मतदाताओं को रिझाने में एड़ी-चोटी का जोर लगा रखे हैं। भाजपा, सपा, कांग्रेस, बसपा सहित अन्य दलों के नेता जिले में जनसंपर्क और सभाएं कर रहे हैं। चुनाव के एलान के बाद से ही शुरू हुआ प्रचार का शोर शनिवार की शाम से थम जाएगा। इसके बाद प्रत्याशी व नेता सिर्फ पैदल घर-घर जाकर जनसंपर्क ही कर पाएंगे। किसी भी तरह की सभा या रैली नहीं हो पाएगी। प्रचार में दौड़ रहे सभी वाहनों से झंडे भी उतार दिए जाएंगे। अंतिम समय में वोटरों को अपने पाले में लाने के लिए धनबल, बाहुबल के इस्तेमाल की आशंकाओं के मद्देनजर खूफिया इकाई को भी सतर्क किया गया है। फ्लाइंग स्क्वाड, स्टेटिक सर्विलांस टीम सहित अन्य टीमों को लगाया गया है। नक्सल प्रभावित जिले की सीमाएं छत्तीसगढ़, मप्र, झारखंड और बिहार से लगती हैं। इन प्रांतों से विभिन्न कार्यों से रोजाना हजारों लोगों का आवागमन होता है। चुनाव प्रचार के लिए भी इन प्रांतों से राजनीतिक लोग जिले में डेरा डाले हुए हैं। मतदान तिथि से पहले इन्हें हर हाल में जिला छोड़ने का निर्देश दिया गया है। जिला निर्वाचन अधिकारी टीके शिबू ने सभी उपजिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में मतदान के 48 घंटे पूर्व जन सभा, रोड शो आदि पर पूरी तरी से प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया है। रोक के बाद भी प्रचार-प्रसार करने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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