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खेतों में पड़ी दरार, नर्सरी के साथ चेहरे भी मुर्झाए
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किसानों की मुश्किलें खत्म नहीं हो रही है। हर बार मौसम उनकी परीक्षा ले रहा है। धान की नर्सरी डाल चुके किसान अब उसे बचाने के लिए जूझ रहे हैं। बारिश न होने से खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं। फसल के साथ जमा पूंजी नष्ट होने की चिंता सता रही है। धान के अलावा दलहन, तिलहन की खेती करने वाले किसान भी मौसम की बेरुखी से परेशान हैं।
जिले के दक्षिणी एवं पूर्वी क्षेत्रों में लगभग 10 दिनों से वर्षा नहीं होने से किसानों के सामने सबसे बड़ी मुसीबत आ गई है। मानसून की पहली बारिश के बाद किसानों ने किसी तरह कर्ज लेकर धान की नर्सरी डाल दी। उन्हें उम्मीद थी कि मानसून की अच्छी बारिश होने से पौधों का विकास होगा और फिर उन्हें समय से रोपाई में सहूलियत मिलेगी। इससे इतर नर्सरी डालने के बाद से बारिश की बूंद भी नहीं पड़ी। अलबत्ता तेज धूप से पौधे मुर्झाने लगे हैं। इलाके में खेती के लिए बारिश ही सबसे प्रमुख साधन है। ऐसे में पिछले दस दिनों से वर्षा न होने से किसान चिंतित हैं। किसान रामचंद्र, जगदीश, महादेव, नारायण, इंद्रदेव, रमाशंकर, राधेश्याम आदि का कहना है कि पिछले कई वर्षों से मानसून की अनिश्चितता से खेती चौपट हो रही है। किसी तरह कर्ज लेकर खेती कर रहे हैं। इस बार भी समय से बारिश नहीं हुई तो बहुत बड़ी क्षति होगी, जिसकी पूर्ति नहीं की जा सकती। धान के अलावा दलहन-तिलहन की खेती करने वाले किसान भी परेशान हैं। जिन किसानों ने किसी तरह तिल, अरहर, मूंग, उड़द की बोआई कर भी दी है तो ठीक से उगी नहीं है। बीच-बीच में हुई हल्की बारिश से अगर कहीं बीज उग भी आया है तो वह अब तेज धूप व गर्म हवा के कारण मुरझाने लगा है। किसानों का कहना है कि जुलाई का पहला और दूसरा सप्ताह बीत गया फिर भी मौसम इतना तल्ख बना हुआ है। जल्द बारिश न हुई तो फसल की बोवाई में विलंब हो जाएगा और इसका असर पैदावार पर पडे़गा।
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जिले के दक्षिणी एवं पूर्वी क्षेत्रों में लगभग 10 दिनों से वर्षा नहीं होने से किसानों के सामने सबसे बड़ी मुसीबत आ गई है। मानसून की पहली बारिश के बाद किसानों ने किसी तरह कर्ज लेकर धान की नर्सरी डाल दी। उन्हें उम्मीद थी कि मानसून की अच्छी बारिश होने से पौधों का विकास होगा और फिर उन्हें समय से रोपाई में सहूलियत मिलेगी। इससे इतर नर्सरी डालने के बाद से बारिश की बूंद भी नहीं पड़ी। अलबत्ता तेज धूप से पौधे मुर्झाने लगे हैं। इलाके में खेती के लिए बारिश ही सबसे प्रमुख साधन है। ऐसे में पिछले दस दिनों से वर्षा न होने से किसान चिंतित हैं। किसान रामचंद्र, जगदीश, महादेव, नारायण, इंद्रदेव, रमाशंकर, राधेश्याम आदि का कहना है कि पिछले कई वर्षों से मानसून की अनिश्चितता से खेती चौपट हो रही है। किसी तरह कर्ज लेकर खेती कर रहे हैं। इस बार भी समय से बारिश नहीं हुई तो बहुत बड़ी क्षति होगी, जिसकी पूर्ति नहीं की जा सकती। धान के अलावा दलहन-तिलहन की खेती करने वाले किसान भी परेशान हैं। जिन किसानों ने किसी तरह तिल, अरहर, मूंग, उड़द की बोआई कर भी दी है तो ठीक से उगी नहीं है। बीच-बीच में हुई हल्की बारिश से अगर कहीं बीज उग भी आया है तो वह अब तेज धूप व गर्म हवा के कारण मुरझाने लगा है। किसानों का कहना है कि जुलाई का पहला और दूसरा सप्ताह बीत गया फिर भी मौसम इतना तल्ख बना हुआ है। जल्द बारिश न हुई तो फसल की बोवाई में विलंब हो जाएगा और इसका असर पैदावार पर पडे़गा।
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