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रसोइयों ने शुरू की बेमियादी भूख हड़ताल
अमर उजाला ब्यूरो/ सोनभद्र
Updated Wed, 05 Oct 2016 10:41 PM IST
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कलेक्ट्रेट में बुधवार को अपनी मांगों के समर्थन में एकजुटता दिखाते ग्रामीण रसोइया संघ के सदस्य।
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जिले के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत रसोइयों ने विभिन्न मांगों को लेकर बुधवार से कलेक्ट्रेट में बेमियादी भूख हड़ताल शुरू कर दिया। 24-24 घंटे की भूख हड़ताल पर 10-10 रसोइयां प्रतिदिन भूख हड़ताल पर बैठेंगी। चेताया है कि मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन तेज करेंगी।
माध्यमिक भारतीय रसोइया वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष तईयब अंसारी ने पहले दिन जिलाध्यक्ष शिवनारायण केशरी, जगदीश प्रसाद, चंद्रावती देवी और सभी ब्लॉक अध्यक्षों को माल्यार्पण कर भूख हड़ताल पर बैठाया। कहा कि रसोइयां का रुका हुआ मानदेय करीब एक लाख रुपये का भुगतान अब तक नहीं किया गया। वर्ष 2004 से रसोइयां कार्यरत हैं। सरकार बार-बार मानदेय बढ़ाने, फालोवर की ट्रेनिंग देने, रसाइयों को प्रत्येक माह की एक तारीख को भुगतान देने, नवीनीकरण की व्यवस्था समाप्त करने, मातृत्व अवकाश 90 दिन और मासिक अवकाश पांच दिन, दुर्घटना बीमा पांच लाख रुपये करने आदि की सुविधा देने का वादा साढ़े चार साल से ही करती चली आ रही है। अब वादा पूरा नहीं हुआ तो 2017 के विधानसभा चुुनाव का रसोइया संघ बहिष्कार करेगा। प्रदेेश उपाध्यक्ष कामेश्वर प्रजापति, जिलाध्यक्ष शिवनारायन केशरी ने कहा कि रसोइयों से जंगल से लकड़ी मंगाया जाता है लेकिन उसका भुगतान नहीं किया जाता।
90 प्रतिशत विद्यालयों में रसोइयों को खाना बनाने के लिए गिली लकड़ी दी जाती है। सभी विद्यालयों पर गैस चूल्हा की व्यवस्था कराने की मांग की। भूख हड़ताल पर धनुकधारी, धनशू, भगवानदास, अशरफी, नंदू, कांता, बसंती, चंद्रावती, फूलविना, अनवरी बेगम मौजूद रहीं।
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माध्यमिक भारतीय रसोइया वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष तईयब अंसारी ने पहले दिन जिलाध्यक्ष शिवनारायण केशरी, जगदीश प्रसाद, चंद्रावती देवी और सभी ब्लॉक अध्यक्षों को माल्यार्पण कर भूख हड़ताल पर बैठाया। कहा कि रसोइयां का रुका हुआ मानदेय करीब एक लाख रुपये का भुगतान अब तक नहीं किया गया। वर्ष 2004 से रसोइयां कार्यरत हैं। सरकार बार-बार मानदेय बढ़ाने, फालोवर की ट्रेनिंग देने, रसाइयों को प्रत्येक माह की एक तारीख को भुगतान देने, नवीनीकरण की व्यवस्था समाप्त करने, मातृत्व अवकाश 90 दिन और मासिक अवकाश पांच दिन, दुर्घटना बीमा पांच लाख रुपये करने आदि की सुविधा देने का वादा साढ़े चार साल से ही करती चली आ रही है। अब वादा पूरा नहीं हुआ तो 2017 के विधानसभा चुुनाव का रसोइया संघ बहिष्कार करेगा। प्रदेेश उपाध्यक्ष कामेश्वर प्रजापति, जिलाध्यक्ष शिवनारायन केशरी ने कहा कि रसोइयों से जंगल से लकड़ी मंगाया जाता है लेकिन उसका भुगतान नहीं किया जाता।
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90 प्रतिशत विद्यालयों में रसोइयों को खाना बनाने के लिए गिली लकड़ी दी जाती है। सभी विद्यालयों पर गैस चूल्हा की व्यवस्था कराने की मांग की। भूख हड़ताल पर धनुकधारी, धनशू, भगवानदास, अशरफी, नंदू, कांता, बसंती, चंद्रावती, फूलविना, अनवरी बेगम मौजूद रहीं।
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