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टूटा डिजिटल का मोह, घर-घर जाकर ले रहे टोह
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नामांकन की प्रक्रिया पूरी होते ही चुनाव प्रचार जोर पकड़ने लगा है। गांव-गिरांव में डिजिटल माध्यमों की पहुंच न होने के कारण प्रचार में दिक्कतें आ रही थीं। लिहाजा कोरोना की पाबंदियां कम होते ही प्रत्याशी डिजिटल माध्यमों को छोड़कर सीधे मैदान में उतर गए हैं। गांव-गांव और घर-घर जाकर वह मतदाताओं के मन को टटोलने में लगे हैं। प्रत्याशियों और पदाधिकारियों के अलावा बूथ स्तर की कमेटियों को भी इसकी जिम्मेदारी दी गई है। विधानसभा और जिला स्तर पर कार्यालयों पर बैठकर वरिष्ठ पदाधिकारी इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
चुनाव कार्यक्रम के एलान के साथ ही आयोग ने रैली और सभाओं पर रोक लगा दी थी। पहले और दूसरे चरण के चुनाव में सभी दलों ने निर्देशों का पालन करते हुए प्रचार के डिजिटल तरीके को अपनाया। आधुनिक सुविधाओं वाले शहरी इलाकों में तो प्रचार के इस तरीके का कुछ असर भी दिखा लेकिन सुदूर गांवों में डिजिटल माध्यम बहुत कारगर नहीं हो पाया। जंगल, पहाड़ों के कारण दुरुह भौगोलिक क्षेत्रफल वाले जिले के लिए प्रचार का वर्चुअल तरीका सफल न होता देख सभी दल और प्रत्याशी कोरोना संक्रमण की गति रुकने पर पाबंदियां कम होने के बाद सीधे मतदाताओं से जुड़ने के लिए मैदान में उतर गए हैं। सुबह से देर शाम तक गांव-गांव और घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क किया जा रहा है। बाइक और पैदल रैली निकाली जा रही है। नुक्कड़ सभाएं हो रही हैं। हालांकि डिजिटल प्रचार भी बंद नहीं हुआ है। सभाओं और रैली खत्म होते ही प्रत्याशी तत्काल उससे जुड़े फोटो-वीडियो सोशल मीडिया में पोस्ट कर रहे हैं।
हर पन्ना प्रमुख को 60 घरों की जिम्मेदारी
पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने के लिए एक टीम घर-घर प्रचार में जुटी हुई है तो दूसरी कार्ल्यालयो में बैठकर उन्हें पीछे से तकनीकी सपोर्ट दे रही है। इस टीम का कार्य अगले दिन की रुपरेखा बनाना और प्रचार के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध कराना है। भाजपा ने जिलेस्त्रत्त् के चार विधानसभा क्षेत्रों के 1613 बूथों पर बूथ कमेटी को प्रचार में उतार दिया है। प्रत्येक बूथ पर 21 लोगों की कमेटी है। इसके अलावा मतदाता सूची के हर पन्ने का प्रमुख भी किसी तेज तर्रार व अनुभवी व्यक्ति को नामित किया गया है। उन्हें कम से कम 60 घरों में नियमित संपर्क बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वह इन घरों में पहुंचकर पार्टी का संदेश पहुंचा रहे हैं और अगर कोई गतिरोध है तो उसे भी दूर कर रहे हैं। इसी तरह सपा ने भी प्रत्येक बूथ कमेटी को सक्रिय कर दिया है। हर बूथ पर बनाई गई 11 और 21 सदस्यों की टोली अपने क्षेत्र में घर-घर पहुंच रही है। हर दूसरे-तीसरे दिन उनके कार्यों की समीक्षा भी हो रही है। जनसंपर्क के दौरान मिल रहे फीडबैक के आधार पर आगे की रुपरेखा तैयार करते हुए पार्टी के प्रत्याशी, पदाधिकारी या किसी बड़े नेता का कार्यक्रम तय हो रहा है।
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सोशल मीडिया में बढ़ गए नए फैन क्लब
चुनावी दौर में सोशल मीडिया में प्रत्याशियों से जुड़े कई नए फैन क्लब बन गए हैं। व्हाट्सएप और फेसबुक पर बन रहे इन फैन क्लब में इलाके के प्रमुख लोगों को जोड़ा जा रहा है। पार्टी की विविध प्रचार सामग्री को उस ग्रुप में भेजकर संदेश दिया जा रहा है। जिले की सभी विधानसभा क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों में ही कई प्रत्याशियों के दर्जनों नए फैन क्लब बनाए गए हैं।
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चुनाव कार्यक्रम के एलान के साथ ही आयोग ने रैली और सभाओं पर रोक लगा दी थी। पहले और दूसरे चरण के चुनाव में सभी दलों ने निर्देशों का पालन करते हुए प्रचार के डिजिटल तरीके को अपनाया। आधुनिक सुविधाओं वाले शहरी इलाकों में तो प्रचार के इस तरीके का कुछ असर भी दिखा लेकिन सुदूर गांवों में डिजिटल माध्यम बहुत कारगर नहीं हो पाया। जंगल, पहाड़ों के कारण दुरुह भौगोलिक क्षेत्रफल वाले जिले के लिए प्रचार का वर्चुअल तरीका सफल न होता देख सभी दल और प्रत्याशी कोरोना संक्रमण की गति रुकने पर पाबंदियां कम होने के बाद सीधे मतदाताओं से जुड़ने के लिए मैदान में उतर गए हैं। सुबह से देर शाम तक गांव-गांव और घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क किया जा रहा है। बाइक और पैदल रैली निकाली जा रही है। नुक्कड़ सभाएं हो रही हैं। हालांकि डिजिटल प्रचार भी बंद नहीं हुआ है। सभाओं और रैली खत्म होते ही प्रत्याशी तत्काल उससे जुड़े फोटो-वीडियो सोशल मीडिया में पोस्ट कर रहे हैं।
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हर पन्ना प्रमुख को 60 घरों की जिम्मेदारी
पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने के लिए एक टीम घर-घर प्रचार में जुटी हुई है तो दूसरी कार्ल्यालयो में बैठकर उन्हें पीछे से तकनीकी सपोर्ट दे रही है। इस टीम का कार्य अगले दिन की रुपरेखा बनाना और प्रचार के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध कराना है। भाजपा ने जिलेस्त्रत्त् के चार विधानसभा क्षेत्रों के 1613 बूथों पर बूथ कमेटी को प्रचार में उतार दिया है। प्रत्येक बूथ पर 21 लोगों की कमेटी है। इसके अलावा मतदाता सूची के हर पन्ने का प्रमुख भी किसी तेज तर्रार व अनुभवी व्यक्ति को नामित किया गया है। उन्हें कम से कम 60 घरों में नियमित संपर्क बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वह इन घरों में पहुंचकर पार्टी का संदेश पहुंचा रहे हैं और अगर कोई गतिरोध है तो उसे भी दूर कर रहे हैं। इसी तरह सपा ने भी प्रत्येक बूथ कमेटी को सक्रिय कर दिया है। हर बूथ पर बनाई गई 11 और 21 सदस्यों की टोली अपने क्षेत्र में घर-घर पहुंच रही है। हर दूसरे-तीसरे दिन उनके कार्यों की समीक्षा भी हो रही है। जनसंपर्क के दौरान मिल रहे फीडबैक के आधार पर आगे की रुपरेखा तैयार करते हुए पार्टी के प्रत्याशी, पदाधिकारी या किसी बड़े नेता का कार्यक्रम तय हो रहा है।
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सोशल मीडिया में बढ़ गए नए फैन क्लब
चुनावी दौर में सोशल मीडिया में प्रत्याशियों से जुड़े कई नए फैन क्लब बन गए हैं। व्हाट्सएप और फेसबुक पर बन रहे इन फैन क्लब में इलाके के प्रमुख लोगों को जोड़ा जा रहा है। पार्टी की विविध प्रचार सामग्री को उस ग्रुप में भेजकर संदेश दिया जा रहा है। जिले की सभी विधानसभा क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों में ही कई प्रत्याशियों के दर्जनों नए फैन क्लब बनाए गए हैं।