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जिले में जल्द खुलेगी ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट
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राबर्ट्सगंज नगर स्थित ब्लड बैंक में जल्द ही ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट शुरू होगी। यूनिट को शुरू करने के लिए शासन स्तर से जिले में मशीनें पहुंच गई हैं। यूनिट में ब्लड से रेड सेल्स के अलावा प्लेटलेट्स और प्लाज्मा तैयार किया जाएगा। इसके लिए तीन लैब टेक्नीशियन को वाराणसी में प्रशिक्षण भी दे दिया गया है। तीन दिवसीय प्रशिक्षण में कर्मियों को मशीन शुरू करने से लेकर ब्लड सेपरेशन के बारे में बताया गया।
नक्सल प्रभावित जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी पर सरकार का विशेष जोर है। अभी तक जनपद में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन लैब न होने से मरीजों व उनके तीमारदारों को वाराणसी समेत अन्य जगहों पर प्लेटलेट्स और प्लाज्मा के लिए दौड़ लगानी पड़ती है। अब यह समस्या दूर होगी। जल्द ही राबर्ट्सगंज नगर स्थित राजकीय ब्लड बैंक में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट शुरू करने की तैयारी है। इसके शुरू होने पर ब्लड से आरबीसी, प्लेटलेट्स और प्लाज्मा अलग किया जा सकेगा। डेंगू आदि के गंभीर मरीजों को इलाज के लिए वाराणसी आदि जगहों पर नहीं जाना होगा। सबसे अधिक गरीब तबके मरीजों को जिले के बाहर जाकर उपचार कराने में दिक्कतें होती है।
अब एक यूनिट ब्लड तीन मरीजों के काम आएगा
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की वर्तमान में क्षमता 500 यूनिट ब्लड रखने की है। प्रतिदिन करीब 22-25 यूनिट ब्लड की यहां खपत होती है। ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट न होने से अभी तक एक यूनिट ब्लड एक ही मरीज के काम आता है। प्लेटलेट्स और प्लाज्मा की कमी होने पर भी मरीज को पूरा ब्लड दिया जाता है। डेंगू आदि के गंभीर मरीजों को इलाज के लिए रेफर करना पड़ता है। ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट में रक्त की एक यूनिट को तीन अलग-अलग भाग में बांटा जाएगा। जरूरतमंदों को रक्त के जरूरी तत्व ही दिए जाएंगे। घायलों और सिजेरियन केस में पीड़ितों को पूरा ब्लड चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। वहीं डेंगू व आग से जलने आदि कई मामलों में मरीजों को सिर्फ ब्लड के सहयोगी तत्व चढ़ाने की आवश्यकता होती है। वर्तमान में बैंक में करीब 140 यूनिट ही ब्लड है।
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ब्लड बैंक में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट शुरू कराने की तैयारी है। यूनिट में ब्लड से रेड सेल, प्लेटलेट्स और प्लाज्मा तैयार किया जाएगा। यूनिट के संचालन के लिए लैब टैक्नीशियनों का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है। मशीन व अन्य उपकरण मिलते ही यूनिट शुरू कर दी जाएगी। - डॉ. क्रांति कुमार, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक।
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नक्सल प्रभावित जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी पर सरकार का विशेष जोर है। अभी तक जनपद में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन लैब न होने से मरीजों व उनके तीमारदारों को वाराणसी समेत अन्य जगहों पर प्लेटलेट्स और प्लाज्मा के लिए दौड़ लगानी पड़ती है। अब यह समस्या दूर होगी। जल्द ही राबर्ट्सगंज नगर स्थित राजकीय ब्लड बैंक में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट शुरू करने की तैयारी है। इसके शुरू होने पर ब्लड से आरबीसी, प्लेटलेट्स और प्लाज्मा अलग किया जा सकेगा। डेंगू आदि के गंभीर मरीजों को इलाज के लिए वाराणसी आदि जगहों पर नहीं जाना होगा। सबसे अधिक गरीब तबके मरीजों को जिले के बाहर जाकर उपचार कराने में दिक्कतें होती है।
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अब एक यूनिट ब्लड तीन मरीजों के काम आएगा
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की वर्तमान में क्षमता 500 यूनिट ब्लड रखने की है। प्रतिदिन करीब 22-25 यूनिट ब्लड की यहां खपत होती है। ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट न होने से अभी तक एक यूनिट ब्लड एक ही मरीज के काम आता है। प्लेटलेट्स और प्लाज्मा की कमी होने पर भी मरीज को पूरा ब्लड दिया जाता है। डेंगू आदि के गंभीर मरीजों को इलाज के लिए रेफर करना पड़ता है। ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट में रक्त की एक यूनिट को तीन अलग-अलग भाग में बांटा जाएगा। जरूरतमंदों को रक्त के जरूरी तत्व ही दिए जाएंगे। घायलों और सिजेरियन केस में पीड़ितों को पूरा ब्लड चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। वहीं डेंगू व आग से जलने आदि कई मामलों में मरीजों को सिर्फ ब्लड के सहयोगी तत्व चढ़ाने की आवश्यकता होती है। वर्तमान में बैंक में करीब 140 यूनिट ही ब्लड है।
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ब्लड बैंक में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट शुरू कराने की तैयारी है। यूनिट में ब्लड से रेड सेल, प्लेटलेट्स और प्लाज्मा तैयार किया जाएगा। यूनिट के संचालन के लिए लैब टैक्नीशियनों का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है। मशीन व अन्य उपकरण मिलते ही यूनिट शुरू कर दी जाएगी। - डॉ. क्रांति कुमार, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक।