{"_id":"69331c1d498d55262a0e6883","slug":"arrest-of-two-teachers-accused-of-fraud-stopped-sonbhadra-news-c-194-1-son1018-138378-2025-12-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sonebhadra News: फर्जीवाड़े के आरोपी दो शिक्षकों की गिरफ्तारी पर रोक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sonebhadra News: फर्जीवाड़े के आरोपी दो शिक्षकों की गिरफ्तारी पर रोक
विज्ञापन
सोनभद्र। जंग बहादुर सिंह इंटर काॅलेज शाहगंज में फर्जीवाड़े के जरिये वेतन भुगतान और सेवा संबंधी लाभ लेने के आरोपी दो शिक्षकों की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। मुकदमा विचाराधीन होने की की वजह से हाईकोर्ट की डबल बेंच ने यह आदेश पारित किया। पुलिस की रिपोर्ट दाखिल होने तक यह आदेश प्रभावी रहेगा।
छह नवंबर को डीआईओएस जयराम सिंह ने तत्कालीन डीआईओएस प्रभुराम चौहान सहित नौ लोगों के खिलाफ रॉबर्ट्सगंज कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि तीन शिक्षकों को वेतन भुगतान और सेवा संबंधी लाभ एक ऐसे पत्र को आधार बनाकर दिया गया, जो शासन से जारी ही नहीं हुआ था।
मामले में आरोपी सहायक अध्यापक गुलाब प्रसाद और ओमप्रकाश ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। चार दिन पहले न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की बेंच ने सुनवाई की। बचाव पक्ष ने दलील दी कि पहले से इस मामले में मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन था। उसे दरकिनार कर गलत तरीके से प्रकरण को आपराधिक रंग दिया जा रहा है।
विज्ञापन
कोर्ट ने पक्षकारों से तीन हफ्ते के भीतर जवाबी शपथ पत्र दाखिल करने का आदेश दिया। याची पक्ष अगर प्रति उत्तर दाखिल करना चाहता है तो जवाबी हलफनामा दाखिल होने के दो सप्ताह के अंदर कर सकता है। अदालत ने आदेश दिया कि मामले की अगली सुनवाई तक या पुलिस रिपोर्ट जमा होने तक, याचियों को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। अगर जांच में सहयोग नहीं करेंगे तो पुलिस कोर्ट में जाने के लिए स्वतंत्र होगी।
विज्ञापन
छह नवंबर को डीआईओएस जयराम सिंह ने तत्कालीन डीआईओएस प्रभुराम चौहान सहित नौ लोगों के खिलाफ रॉबर्ट्सगंज कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि तीन शिक्षकों को वेतन भुगतान और सेवा संबंधी लाभ एक ऐसे पत्र को आधार बनाकर दिया गया, जो शासन से जारी ही नहीं हुआ था।
विज्ञापन
मामले में आरोपी सहायक अध्यापक गुलाब प्रसाद और ओमप्रकाश ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। चार दिन पहले न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की बेंच ने सुनवाई की। बचाव पक्ष ने दलील दी कि पहले से इस मामले में मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन था। उसे दरकिनार कर गलत तरीके से प्रकरण को आपराधिक रंग दिया जा रहा है।
विज्ञापन
कोर्ट ने पक्षकारों से तीन हफ्ते के भीतर जवाबी शपथ पत्र दाखिल करने का आदेश दिया। याची पक्ष अगर प्रति उत्तर दाखिल करना चाहता है तो जवाबी हलफनामा दाखिल होने के दो सप्ताह के अंदर कर सकता है। अदालत ने आदेश दिया कि मामले की अगली सुनवाई तक या पुलिस रिपोर्ट जमा होने तक, याचियों को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। अगर जांच में सहयोग नहीं करेंगे तो पुलिस कोर्ट में जाने के लिए स्वतंत्र होगी।