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कोई खनन अधिकारी तो कोई आइएएस का रिश्तेदार
अमर उजाला ब्यूरो/सोनभद्र
Updated Wed, 28 Jun 2017 11:11 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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खनन विभाग में वर्षों से जमे खनिज लिपिक और मुहर्रिर फर्श से अर्श तक का सफर तय कर चुके हैं। इसमें कोई पूर्व के खनन अधिकारी तो कोई आईएएस का रिश्तेदार है। किसी ने समायोजन के जरिए खनिज विभाग में इंट्री मार ली तो कुछ भाई-भतीजे को ढाल बनाते रहे। तैनाती के दौरान अधिकारी, सर्वेयर और लिपिक यहां के खनन में हिस्सेदारी करते रहे हैं। माफिया-प्रशासनिक गठजोड़ के बीच मजबूत पैठ बनाकर इन्होंने लखनऊ, दिल्ली, इलाहाबाद और वाराणसी में अच्छी-खासी संपत्ति बना ली है।
बात करते हैं जिले के सृजन के समय से ही यहां जमे खनिज लिपिक/मोहर्रिर राजेश राय की। राजेश को 1989 में मृतक आश्रित कोटे में मिर्जापुर डीएम कार्यालय में तैनाती मिली। इसके बाद इसने इसी साल गठित हुए अलग जिला सोनभद्र के खनिज विभाग में समायोजन करा लिया। राजेश की 24 साल की नौकरी सोनभद्र में ही है। बीच में थोड़े-थोड़े समय के लिए तीन-चार बार तबादला हुआ और हर बार अधिकारियों-नेताओं से सिफारिशी पत्र इसे वापस सोनभद्र लाते रहे।
तीन जनवरी को भी राजेश राय का स्थानांतरण वाराणसी के लिए हुआ था लेकिन न जाने कैसे रुक गया। अब फिर तबादला हुआ तो रोकवाने के लिए पूरी जुगत शुरू हो गई। इसी तरह अब्दुल गनी अंसारी दस साल से, कुंदन वर्मा भी लंबे समय से जमे हुए हैं। इन्हें एक आईएएस का रिश्तेदार बताया जाता है। रंजन वर्मा पूर्व खनन अधिकारी बीएल दास के रिश्तेदार हैं। इनकी नियुक्ति चतुर्थ श्रेणी कर्मी के रूप में हुई बाद में पदोन्नति हासिल कर मुहर्रिर बन गए। इसी तरह अरशद इकबाल को भी चतुर्थ श्रेणी कर्मी के रूप में तैनाती मिली थी। पदोन्नति के जरिए मुहर्रिर बन गए।
बात करते हैं जिले के सृजन के समय से ही यहां जमे खनिज लिपिक/मोहर्रिर राजेश राय की। राजेश को 1989 में मृतक आश्रित कोटे में मिर्जापुर डीएम कार्यालय में तैनाती मिली। इसके बाद इसने इसी साल गठित हुए अलग जिला सोनभद्र के खनिज विभाग में समायोजन करा लिया। राजेश की 24 साल की नौकरी सोनभद्र में ही है। बीच में थोड़े-थोड़े समय के लिए तीन-चार बार तबादला हुआ और हर बार अधिकारियों-नेताओं से सिफारिशी पत्र इसे वापस सोनभद्र लाते रहे।
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तीन जनवरी को भी राजेश राय का स्थानांतरण वाराणसी के लिए हुआ था लेकिन न जाने कैसे रुक गया। अब फिर तबादला हुआ तो रोकवाने के लिए पूरी जुगत शुरू हो गई। इसी तरह अब्दुल गनी अंसारी दस साल से, कुंदन वर्मा भी लंबे समय से जमे हुए हैं। इन्हें एक आईएएस का रिश्तेदार बताया जाता है। रंजन वर्मा पूर्व खनन अधिकारी बीएल दास के रिश्तेदार हैं। इनकी नियुक्ति चतुर्थ श्रेणी कर्मी के रूप में हुई बाद में पदोन्नति हासिल कर मुहर्रिर बन गए। इसी तरह अरशद इकबाल को भी चतुर्थ श्रेणी कर्मी के रूप में तैनाती मिली थी। पदोन्नति के जरिए मुहर्रिर बन गए।
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