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केस के विरोध में बंद रखी दुकानें
Sonbhadra
Updated Wed, 02 May 2012 12:00 PM IST
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करमा(संवाददाता)। पिछले दिनों प्रधान पुत्र की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद ग्रामीणों द्वारा लगाए गए ऐतिहासिक जाम के बाद पुलिस द्वारा 25 नामजद और 75 अज्ञात ग्रामीणों के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कराने के विरोध में मंगलवार को व्यापारियों ने दुकानें बंद रखी। ग्रामीणों का प्रतिनिधि मंडल अपर जिलाधिकारी से मिलकर न्याय की गुहार लगाई।
राबर्ट्सगंज मिर्जापुर मार्ग पर 28 अप्रैल को करमा बाजार में वाहन की चपेट में आने से प्रधान पुत्र की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद सड़क पर ब्रेकर बनाने की मांग को लेकर बाजारवासियों ने चक्का जाम कर दिया था। इस घटना के बाद पुलिस ने जाम लगाने वालों में शामिल 25 नामजद और 75 अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इस कार्रवाई के बाद ग्रामीण एक बार फिर आंदोलित हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस बाजारवासियों को झूठे मुकदमे में फंसा रही है। इसी के विरोध में बाजारवासियों ने एक राय होकर मंगलवार को सुबह से शाम तक बाजार बंद रखी। बाद में प्रतिनिधि मंडल जिला मुख्यालय पहुंच कर अपर जिलाधिकारी से मिला तथा ज्ञापन सौंप कर झूठा मुकदमा वापस लिए जाने की मांग की। चेतावनी दी कि ऐसा नहीं किया गया ग्रामीण मजबूर होकर एक बार फिर आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। प्रतिनिधि मंडल में राधारमण, भुवनेश्वर सिंह, अजय कुमार, राजेन्द्र तिवारी, रामबरन, अशोक कुमार, चंद्रभूषण, वकालत, राम सिंह, मनोज कुमार, राजू जायसवाल, बबलू, रवि सिंह, संतोष, संतोष, हीरालाल, विजय विनोद, प्रदीप, रामप्रसाद, रामविलास आदि शामिल थे।
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राबर्ट्सगंज मिर्जापुर मार्ग पर 28 अप्रैल को करमा बाजार में वाहन की चपेट में आने से प्रधान पुत्र की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद सड़क पर ब्रेकर बनाने की मांग को लेकर बाजारवासियों ने चक्का जाम कर दिया था। इस घटना के बाद पुलिस ने जाम लगाने वालों में शामिल 25 नामजद और 75 अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इस कार्रवाई के बाद ग्रामीण एक बार फिर आंदोलित हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस बाजारवासियों को झूठे मुकदमे में फंसा रही है। इसी के विरोध में बाजारवासियों ने एक राय होकर मंगलवार को सुबह से शाम तक बाजार बंद रखी। बाद में प्रतिनिधि मंडल जिला मुख्यालय पहुंच कर अपर जिलाधिकारी से मिला तथा ज्ञापन सौंप कर झूठा मुकदमा वापस लिए जाने की मांग की। चेतावनी दी कि ऐसा नहीं किया गया ग्रामीण मजबूर होकर एक बार फिर आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। प्रतिनिधि मंडल में राधारमण, भुवनेश्वर सिंह, अजय कुमार, राजेन्द्र तिवारी, रामबरन, अशोक कुमार, चंद्रभूषण, वकालत, राम सिंह, मनोज कुमार, राजू जायसवाल, बबलू, रवि सिंह, संतोष, संतोष, हीरालाल, विजय विनोद, प्रदीप, रामप्रसाद, रामविलास आदि शामिल थे।
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