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मां वंशरा ने दिया था लोरिक को वरदान

Fri, 04 Apr 2014 05:30 AM IST
Sonbhadra
Sonbhadra Updated Fri, 04 Apr 2014 05:30 AM IST
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सोनभद्र/चोपन। गोठानी और अगोरी दुर्ग के बीच सोन तट स्थित मां वंशरा की महिमा अपरंपार है। लोकगाथा के महानायक वीर लोरिक ने यहीं मां की आराधना की थी और मां ने प्रसन्न होकर उसे विजय का वरदान दिया था। तब जाकर लोरिक को अजेय माने जाने वाले अगोरी दुर्ग पर विजय हासिल हो पाई थी। यह लोक आख्यान जन-जन की जुबां पर तो प्रचलित है ही, लोरिकायन के गायन एवं लोरिक-मंजरी प्रेमगाथा में मां वंशरा की महत्ता को प्रमुख स्थान दिया गया है।
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जनश्रुतियों एवं लोक आख्यानों के मुताबिक अगोरी दुर्ग पहले अघोर पीठ (अघोरियों का मठ) था। शिव के आराधक माने जाने वाले अघोरियों ने अघोर पीठ के गेट पर मां दुर्गा के तांत्रिक स्वरूप की स्थापना के साथ गोठानी में शोण तट के किनारे मां वंशरा देवी (मां दुर्गा का एक रूप) की मूर्ति स्थापित की। बताते हैं कि इनकी आराधना से प्रसन्न होकर मां दुर्गा ने अघोरपीठ को अजेय रहने का वरदान दिया था। बाद में चलकर अघोर पीठ अगोरी दुर्ग में तब्दील होकर रियासत का केंद्र बन गया, लेकिन इस दुर्ग पर मां का आशीर्वाद बना रहा। इसी दरम्यान अगोरी में राजा मोलागत का राज आया तो इन्होंने अपने सामंत महरा यादव को जुए में हराकर उसकी पुत्रियों को हरम में रखने की शर्त मंजूर करा ली।
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बताते हैं कि इसके क्रम में महरा की छह पुत्रियां हरम में चली गईं, लेकिन जब मंजरी की बारी आई तो बिरादरी के लोगों ने उसके लिए योग्य वर की तलाश शुरू कर दी। इसी दौरान उनकी बलिया के गौरा निवासी लोरिक से मुलाकात हुई। इनके अनुरोध पर लोरिक ने मंजरी से शादी के लिए हामी भरते हुए अगोरी दुर्ग पर चढ़ाई के लिए मारकुंडी में डेरा डाल दिया। अजेयता के वरदान को देखते हुए दुर्ग पर चढ़ाई से पहले उसने मां वंशरा की आराधना की। प्रसन्न होकर मां ने उसे विजयी होने का वरदान दिया तो उसने दुर्ग पर चढ़ाई कर दी। कई दिनों तक चले भीषण युद्ध में अंतत: विजय लोरिक की हुई। लोक आख्यान से जुड़े कई साक्ष्य जनपद में मौजूद हैं और शासन स्तर से पर्यटन महकमे को इनको संजोने के लिए आदेश भी जारी हो चुके हैं। इसके अलावा भी क्षेत्र में इस सिद्धपीठ के बारे में कई चमत्कारिक बातें प्रचलित हैं।
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