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बारिश में नहीं थमेगी कोयला आपूर्ति, बनी रणनीति
Updated Sun, 11 Jun 2017 11:51 PM IST
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सोनभद्र। पिछली बार हुई बारिश से एनसीएल मेें कोयला आपूर्ति प्रभावित हुई थी। इसके चलते राज्य सेक्टर की सबसे बड़ी अनपरा परियोजना में कोयला संकट उत्पन्न हो गया था। इसको देखते हुए इस बार विशेष रणनीति बनाई गई हैं। एनसीएल प्रबंधन ने हाईपावर कमेटी के जरिए पांच बिंदुओं पर फोकस करते कार्य शुरू कर दिया है। वहीं अनपरा परियोजना में कोयले का अच्छा-खासा स्टाक जमा कर लिया गया है। एनसीएल का दावा है कि इस बार कोयले की आपूर्ति प्रभावित नहीं होने पाएगी।
पिछले सीजन में अनुमान से अधिक बारिश ने सारे इंतजाम ध्वस्त कर दिए थे। इसके चलते अन्य परियोजनाओं में तो कोयले की किल्लत हुई ही, राज्य सेक्टर की अनपरा और एनटीपीसी विंध्यनगर में जबरदस्त संकट ने दिल्ली तक हड़कंप मचा दिया था। कोयला मंत्रालय ने दूसरी कोल कंपनियों से कोयला दिलाकर हालात संभाले थे। इस बार ऐसी नौबत न आने पाए, इसके लिए एनसीएल ने खुद की हाईपावर कमेटी गठित कर, सिंफर से बेहतर इंतजाम के लिए सर्वे करवाए। सिंफर की रिपोर्ट आने के बाद डंप मैनेजमेंट, संप मैनेजमेंट, पंप मैनेजमेंट, टोटल ड्रेनेज सिस्टम और गैवियन वाल्व के बेहतर व्यवस्था की रणनीति बनाते हुए पिछले दिनों काम भी शुरू कर दिया। खनन वाली जगह पर पानी का ठहराव न हो और ओवर वर्डेन का बहाव कम से कम हो, इस पर खासा ध्यान दिया जा रहा है। पिछली बार मोरवा-जयंत रोड दो बार टूट गया था। इस बार टूटी जगह पर 18 ह्यूम पाइप लगाकर सड़क दुरुस्त की गई है। भविष्य में सड़क टूटने न पाए, इसके लिए 16 करोड़ की कार्ययोजना बनाई है। इसमें टूटी जगह आरसीसी वर्क शामिल है। निगाही और जयंत परियोजना के बीच पानी की आवाजाही बनाए रखने को रोड ऊंचा करने और निगाही साइड से रिटर्निंग वाल निर्माण की योजना बनाई है। चूंकि मोरवा से जयंत के बीच आवागमन के लिए इकलौती सड़क है। इसलिए मरम्मत के दौरान जयंत परियोजना की आंतरिक सड़क इजनता के लिए खुली रहेगी।
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पिछले सीजन में अनुमान से अधिक बारिश ने सारे इंतजाम ध्वस्त कर दिए थे। इसके चलते अन्य परियोजनाओं में तो कोयले की किल्लत हुई ही, राज्य सेक्टर की अनपरा और एनटीपीसी विंध्यनगर में जबरदस्त संकट ने दिल्ली तक हड़कंप मचा दिया था। कोयला मंत्रालय ने दूसरी कोल कंपनियों से कोयला दिलाकर हालात संभाले थे। इस बार ऐसी नौबत न आने पाए, इसके लिए एनसीएल ने खुद की हाईपावर कमेटी गठित कर, सिंफर से बेहतर इंतजाम के लिए सर्वे करवाए। सिंफर की रिपोर्ट आने के बाद डंप मैनेजमेंट, संप मैनेजमेंट, पंप मैनेजमेंट, टोटल ड्रेनेज सिस्टम और गैवियन वाल्व के बेहतर व्यवस्था की रणनीति बनाते हुए पिछले दिनों काम भी शुरू कर दिया। खनन वाली जगह पर पानी का ठहराव न हो और ओवर वर्डेन का बहाव कम से कम हो, इस पर खासा ध्यान दिया जा रहा है। पिछली बार मोरवा-जयंत रोड दो बार टूट गया था। इस बार टूटी जगह पर 18 ह्यूम पाइप लगाकर सड़क दुरुस्त की गई है। भविष्य में सड़क टूटने न पाए, इसके लिए 16 करोड़ की कार्ययोजना बनाई है। इसमें टूटी जगह आरसीसी वर्क शामिल है। निगाही और जयंत परियोजना के बीच पानी की आवाजाही बनाए रखने को रोड ऊंचा करने और निगाही साइड से रिटर्निंग वाल निर्माण की योजना बनाई है। चूंकि मोरवा से जयंत के बीच आवागमन के लिए इकलौती सड़क है। इसलिए मरम्मत के दौरान जयंत परियोजना की आंतरिक सड़क इजनता के लिए खुली रहेगी।
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