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Sonebhadra News: दस रुपये के स्टांप पेपर पर छापते थे 500 रुपये के नोट
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सोनभद्र। कोन थाना क्षेत्र से पुलिस ने नकली नोट छापने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। दो जालसाजों को गिरफ्तार करते हुए उनके पास से दस हजार रुपये के 500-500 के नोट बरामद किए हैं। दोनों दस रुपये के स्टांप पेपर पर कंप्यूटर प्रिंटर की मदद से 500 रुपये के नोट छापते थे। दोनों 30 हजार रुपये के नकली नोट खपा चुके हैं। पुलिस इस कार्य में शामिल अन्य लोगों के बारे में भी जानकारी जुटाने में लगी है।
पुलिस लाइन सभागार में एएसपी कालू सिंह ने मीडिया को बताया कि बृहस्पतिवार को छठ पूजा पर शांति व्यवस्था के मद्देनजर कोन थाना प्रभारी गोपालजी गुप्ता पुलिस टीम के साथ रामगढ़ स्थित इंडियन बैंक शाखा के पास मौजूद थे। इसी दौरान सूचना पर उन्होंने बिना नंबर की एक कार को रोका। तलाशी के दौरान कार सवार दो युवकों के पास से 500-500 रुपये के 20 नोट बरामद हुए। सभी नोटों पर एक ही सीरियल नंबर दर्ज था। पुलिस ने कार की डिकी से नोट छापने में इस्तेमाल होने वाला प्रिंटर, लैपटॉप, 10 रुपये मूल्य के 27 सादे स्टांप भी बरामद किए। पूछताछ में जालसाजों की पहचान मिर्जापुर के चुनार कोतवाली क्षेत्र के नौगरहा निवासी सतीश राय और रॉबर्ट्सगंज के चुर्क बाजार निवासी प्रमाेद मिश्र के रूप में हुई। दोनों ने बताया कि वे पहले कंप्यूटर में 500 रुपये का नोट स्कैन करते हैं। फिर दस रुपये के स्टांप पेपर पर उसे प्रिंट कर लेते हैं। इस तरह से तैयार करीब 30 हजार रुपये के नकली नोट वे अब तक खपा चुके हैं। ये दस हजार रुपये के नोट भी यहां खपाने के लिए आए थे। एएसपी ने बताया कि दोनाें को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। इस कार्य में सहयोग करने वाले अन्य लोगों के बारे में सूचना जुटाई जा रही है।
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यू ट्यूब से सीखा नकली नोट छापने का तरीका
पकड़े गए जालसाजों ने नकली नोट छापने का तरीका यू ट्यूब से सीखा था। दोनों पहले मिनरल वाटर के विज्ञापन छापने की प्रैक्टिस करते थे। इसी दौरान उन्होंने यू ट्यूब पर नकली नोट छापने की तरकीब देखी। वीडियो देखकर उन्होंने नोट छापना शुरू किया। ग्रामीण क्षेत्र के बाजारों में वह उसे आसानी से चला लेते थे। स्टांप पेपर का कागज सामान्य कागज से मोटा होता है और नोट वाले कागज से थोड़ी समानता भी है। साथ ही स्टांप पेपर के बीच में भारत लिखी हुई पट्टी बनी हुई होती है, जिससे गांवों के लोग उसे आसानी से पहचान नहीं पाते थे। हालांकि हर नोट पर सीरियल नंबर एक ही होता था।
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मिर्जापुर से लाते थे स्टांप पेपर
जालसाज नोट छापने के लिए स्टांप पेपर मिर्जापुर से लाते थे। पुलिस पकड़े गए सभी स्टांप पेपर की भी जांच कर रही है। यह किसके नाम से आवंटित हुए हैं और उनकी इसमें भूमिका भी खंगाली जा रही है। एएसपी के मुताबिक जांच के बाद इसमें आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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झारखंड चुनाव को लेकर भी सतर्क है पुलिस
इन दिनों झारखंड में विधानसभा चुनाव चल रहा है। चुनाव में नकली नोट खपाने की आशंका के मद्देनजर भी पुलिस सतर्क है। कोन थाने की सीमा झारखंड से लगती हैं। बॉर्डर क्षेत्र में सतर्कता बरती जा रही है। वहां से गुजरने वाले हर व्यक्ति पर पैनी निगाह रखते हुए तलाशी भी ली जा रही है। कोन थाना प्रभारी गोपाल जी गुप्ता खुद इसकी निगरानी कर रहे हैं। पिछले एक सप्ताह में ही कोन पुलिस ने तस्करी पर कई कार्रवाइयां की हैं।
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पुलिस लाइन सभागार में एएसपी कालू सिंह ने मीडिया को बताया कि बृहस्पतिवार को छठ पूजा पर शांति व्यवस्था के मद्देनजर कोन थाना प्रभारी गोपालजी गुप्ता पुलिस टीम के साथ रामगढ़ स्थित इंडियन बैंक शाखा के पास मौजूद थे। इसी दौरान सूचना पर उन्होंने बिना नंबर की एक कार को रोका। तलाशी के दौरान कार सवार दो युवकों के पास से 500-500 रुपये के 20 नोट बरामद हुए। सभी नोटों पर एक ही सीरियल नंबर दर्ज था। पुलिस ने कार की डिकी से नोट छापने में इस्तेमाल होने वाला प्रिंटर, लैपटॉप, 10 रुपये मूल्य के 27 सादे स्टांप भी बरामद किए। पूछताछ में जालसाजों की पहचान मिर्जापुर के चुनार कोतवाली क्षेत्र के नौगरहा निवासी सतीश राय और रॉबर्ट्सगंज के चुर्क बाजार निवासी प्रमाेद मिश्र के रूप में हुई। दोनों ने बताया कि वे पहले कंप्यूटर में 500 रुपये का नोट स्कैन करते हैं। फिर दस रुपये के स्टांप पेपर पर उसे प्रिंट कर लेते हैं। इस तरह से तैयार करीब 30 हजार रुपये के नकली नोट वे अब तक खपा चुके हैं। ये दस हजार रुपये के नोट भी यहां खपाने के लिए आए थे। एएसपी ने बताया कि दोनाें को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। इस कार्य में सहयोग करने वाले अन्य लोगों के बारे में सूचना जुटाई जा रही है।
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यू ट्यूब से सीखा नकली नोट छापने का तरीका
पकड़े गए जालसाजों ने नकली नोट छापने का तरीका यू ट्यूब से सीखा था। दोनों पहले मिनरल वाटर के विज्ञापन छापने की प्रैक्टिस करते थे। इसी दौरान उन्होंने यू ट्यूब पर नकली नोट छापने की तरकीब देखी। वीडियो देखकर उन्होंने नोट छापना शुरू किया। ग्रामीण क्षेत्र के बाजारों में वह उसे आसानी से चला लेते थे। स्टांप पेपर का कागज सामान्य कागज से मोटा होता है और नोट वाले कागज से थोड़ी समानता भी है। साथ ही स्टांप पेपर के बीच में भारत लिखी हुई पट्टी बनी हुई होती है, जिससे गांवों के लोग उसे आसानी से पहचान नहीं पाते थे। हालांकि हर नोट पर सीरियल नंबर एक ही होता था।
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मिर्जापुर से लाते थे स्टांप पेपर
जालसाज नोट छापने के लिए स्टांप पेपर मिर्जापुर से लाते थे। पुलिस पकड़े गए सभी स्टांप पेपर की भी जांच कर रही है। यह किसके नाम से आवंटित हुए हैं और उनकी इसमें भूमिका भी खंगाली जा रही है। एएसपी के मुताबिक जांच के बाद इसमें आगे की कार्रवाई की जाएगी।
झारखंड चुनाव को लेकर भी सतर्क है पुलिस
इन दिनों झारखंड में विधानसभा चुनाव चल रहा है। चुनाव में नकली नोट खपाने की आशंका के मद्देनजर भी पुलिस सतर्क है। कोन थाने की सीमा झारखंड से लगती हैं। बॉर्डर क्षेत्र में सतर्कता बरती जा रही है। वहां से गुजरने वाले हर व्यक्ति पर पैनी निगाह रखते हुए तलाशी भी ली जा रही है। कोन थाना प्रभारी गोपाल जी गुप्ता खुद इसकी निगरानी कर रहे हैं। पिछले एक सप्ताह में ही कोन पुलिस ने तस्करी पर कई कार्रवाइयां की हैं।