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Sonebhadra News: 39 ब्लैक स्पॉट पर न संकेतक बोर्ड लगे न रेलिंग, ध्वस्त हो गए ब्रेकर
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बीजपुर-मुर्धवा मार्ग पर हादसों को रोकने के लिए खाई के किनारे रेलिंग की जगह मिट्टी और बालू से भर
सोनभद्र। जिले में शनिवार से यातायात माह शुरू हुआ है। यातायात और परिवहन विभाग अभियान चलाकर नियमों का पाठ पढ़ाएंगे, लेकिन सड़कों पर सुरक्षा के जरूरी इंतजाम से बेखबर हैं। हाल यह है कि 39 ब्लैक स्पॉट पर न तो संकेतक बोर्ड लगाए गए न रिफ्लेक्टर। जो ब्रेकर बने थे, वे ध्वस्त हो गए हैं। पहाड़ी और घुमावदार मार्गों के किनारे बैरियर भी नहीं लगे। ऐसे में सड़क हादसे कैसे रुकेंगे।
वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग का 150 किमी लंबा हिस्सा जिले में है। इस सड़क की देखभाल का जिम्मा तीन कार्यदाई संस्थाओं का है। सुकृत से हाथीनाला तक की सड़क उपसा के अधीन है तो इससे आगे औड़ी मोड़ तक राष्ट्रीय राजमार्ग का हिस्सा है। औड़ी मोड़ से शक्तिनगर तक पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड ने सड़क का निर्माण किया है। तीन संस्थाएं मिलकर भी सुरक्षित आवागमन के लिए लोगों को सड़क मुहैया नहीं करा पा रही है। कुल 39 में से 22 ब्लैक स्पॉट इसी मार्ग पर हैं। जिला सड़क सुरक्षा समिति के माध्यम से करीब दो माह पहले सभी ब्लैक स्पॉट की सूची संबंधित संस्थाओं को उपलब्ध कराई गई थी। उन्हें प्राथमिकता से सुधारात्मक कार्य कराने के निर्देश भी दिए गए थे, मगर ज्यादातर जगहों पर स्थिति जस की तस है।
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इन संस्थाओं को दी गई थी जिम्मेदारी
उपसा : उरमौरा, चंडी तिराहा, हिंदुआरी, लोहरा, मधुपुर, मारकुंडी, तेंदु, बट, लोढ़ी, सुकृत, मारकुंडी घाटी, सलखन, पटवध, प्रीतनगर के ब्लैक स्पॉट पर पेंटिंग युक्त स्पीड ब्रेकर बनाए जाने थे। ब्रेकर से पहले सोलर कैट और संकेतक साइनेज बोर्ड, रेड लाइट ब्लिंकर, रंबल स्ट्रीप के कार्य हाेने थे। कुछ स्थानों पर कार्य हुए हैं, मगर वह मानक के अनुरूप नहीं है। ब्रेकर फिर से चपटे हो गए और ब्लिंकर, रंबल स्ट्रीप नदारद हैं।
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पीडब्ल्यूडी एनएच-39 : हथवानी, मुर्धवा, रेणुकूट, तुर्रा, औड़ी, डिबुलगंज संकेतक, पेंटिंग युक्त ब्रेकर, रेणुकूट से अनपरा के बीच पहाड़ी मार्ग पर किनारे लोहे के मजबूत पिलर के माध्यम से बैरिकेडिंग की जानी थी, जिससे खाई में वाहन न जा सकें। मार्ग पर खाई के किनारे पिलर नदारद हैं। इसके चलते अनियंत्रित वाहन अक्सर गहरी खाई में गिरकर बड़ी दुर्घटना की वजह बन रहे हैं।
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पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड : बैरपान, चिल्काडांड, खड़िया के ब्लैक स्पॉट पर संकेतक और ब्रेकर के साथ ही खराब सड़क को दुरुस्त कराना, पटरियों पर होने वाली पार्किंग को बंद कराने, परियोजनाओं से समन्वय बनाकर राख, धूल और कोयला की सफाई कराने का निर्देश दिया गया था। यहां भी कुछ खास नहीं हुआ। हादसों की प्रमुख वजह किनारों पर अवैध पार्किंग अब भी यथावत है।
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ये भी थे निर्देश
जिले में पहले 19 ब्लैक स्पॉट थे। दो माह पहले नए सिरे से सर्वे कर 20 नए ब्लैक स्पॉट सूची में शामिल किए गए। सभी ब्लैक स्पॉट के दोनों किनारे 500 मीटर तक सोलर डेलिनेटर लगाए जाने, 20 मीटर पहले आगे दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र का बोर्ड लगाने और ट्रैफिक सिग्नल रेड लाइट ब्लिंकर युक्त लगवाया जाना था। यह निर्देश भी सिर्फ कागजों तक सिमटे रहे।
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वर्जन...
सबसे ज्यादा ब्लैक स्पॉट वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग पर हैं। ब्लैक स्पॉट की सूची संबंधित संस्थाओं को भेजकर उन्हें सुरक्षा के प्रबंध करने के निर्देश दिए गए थे। फिर से पत्र भेजकर कार्यों की ऑडिट भी कराई जाएगी। अन्य मार्गों पर ब्रेकर, रंबल स्ट्रीप, बोर्ड आदि लगाए गए हैं। - शैलेश सिंह ठाकुर, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी व सचिव जिला सड़क सुरक्षा समिति।
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वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग का 150 किमी लंबा हिस्सा जिले में है। इस सड़क की देखभाल का जिम्मा तीन कार्यदाई संस्थाओं का है। सुकृत से हाथीनाला तक की सड़क उपसा के अधीन है तो इससे आगे औड़ी मोड़ तक राष्ट्रीय राजमार्ग का हिस्सा है। औड़ी मोड़ से शक्तिनगर तक पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड ने सड़क का निर्माण किया है। तीन संस्थाएं मिलकर भी सुरक्षित आवागमन के लिए लोगों को सड़क मुहैया नहीं करा पा रही है। कुल 39 में से 22 ब्लैक स्पॉट इसी मार्ग पर हैं। जिला सड़क सुरक्षा समिति के माध्यम से करीब दो माह पहले सभी ब्लैक स्पॉट की सूची संबंधित संस्थाओं को उपलब्ध कराई गई थी। उन्हें प्राथमिकता से सुधारात्मक कार्य कराने के निर्देश भी दिए गए थे, मगर ज्यादातर जगहों पर स्थिति जस की तस है।
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इन संस्थाओं को दी गई थी जिम्मेदारी
उपसा : उरमौरा, चंडी तिराहा, हिंदुआरी, लोहरा, मधुपुर, मारकुंडी, तेंदु, बट, लोढ़ी, सुकृत, मारकुंडी घाटी, सलखन, पटवध, प्रीतनगर के ब्लैक स्पॉट पर पेंटिंग युक्त स्पीड ब्रेकर बनाए जाने थे। ब्रेकर से पहले सोलर कैट और संकेतक साइनेज बोर्ड, रेड लाइट ब्लिंकर, रंबल स्ट्रीप के कार्य हाेने थे। कुछ स्थानों पर कार्य हुए हैं, मगर वह मानक के अनुरूप नहीं है। ब्रेकर फिर से चपटे हो गए और ब्लिंकर, रंबल स्ट्रीप नदारद हैं।
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पीडब्ल्यूडी एनएच-39 : हथवानी, मुर्धवा, रेणुकूट, तुर्रा, औड़ी, डिबुलगंज संकेतक, पेंटिंग युक्त ब्रेकर, रेणुकूट से अनपरा के बीच पहाड़ी मार्ग पर किनारे लोहे के मजबूत पिलर के माध्यम से बैरिकेडिंग की जानी थी, जिससे खाई में वाहन न जा सकें। मार्ग पर खाई के किनारे पिलर नदारद हैं। इसके चलते अनियंत्रित वाहन अक्सर गहरी खाई में गिरकर बड़ी दुर्घटना की वजह बन रहे हैं।
पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड : बैरपान, चिल्काडांड, खड़िया के ब्लैक स्पॉट पर संकेतक और ब्रेकर के साथ ही खराब सड़क को दुरुस्त कराना, पटरियों पर होने वाली पार्किंग को बंद कराने, परियोजनाओं से समन्वय बनाकर राख, धूल और कोयला की सफाई कराने का निर्देश दिया गया था। यहां भी कुछ खास नहीं हुआ। हादसों की प्रमुख वजह किनारों पर अवैध पार्किंग अब भी यथावत है।
ये भी थे निर्देश
जिले में पहले 19 ब्लैक स्पॉट थे। दो माह पहले नए सिरे से सर्वे कर 20 नए ब्लैक स्पॉट सूची में शामिल किए गए। सभी ब्लैक स्पॉट के दोनों किनारे 500 मीटर तक सोलर डेलिनेटर लगाए जाने, 20 मीटर पहले आगे दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र का बोर्ड लगाने और ट्रैफिक सिग्नल रेड लाइट ब्लिंकर युक्त लगवाया जाना था। यह निर्देश भी सिर्फ कागजों तक सिमटे रहे।
वर्जन...
सबसे ज्यादा ब्लैक स्पॉट वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग पर हैं। ब्लैक स्पॉट की सूची संबंधित संस्थाओं को भेजकर उन्हें सुरक्षा के प्रबंध करने के निर्देश दिए गए थे। फिर से पत्र भेजकर कार्यों की ऑडिट भी कराई जाएगी। अन्य मार्गों पर ब्रेकर, रंबल स्ट्रीप, बोर्ड आदि लगाए गए हैं। - शैलेश सिंह ठाकुर, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी व सचिव जिला सड़क सुरक्षा समिति।