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500 मेगावाट इकाई नहीं हो सकी उत्पादनरत्
Updated Thu, 12 Oct 2017 11:31 PM IST
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सोनभद्र (अनपरा) । तापीय परियोजना अनपरा की पांच सौ मेगावाट की सातवीं इकाई से उत्पादन लेने में परियोजना प्रबंधन नाकाम साबित हुआ है। डेढ़ माह से अधिक समय से बंद चल रही इस इकाई के टेस्टिंग के बाद लाइटअप कर 10 अक्तूबर से उत्पादन शुरू करने का दावा परियोजना प्रशासन ने किया था।
लगभग डेढ़ माह से बंद चल रही पांच सौ मेगावाट की सातवीं इकाई को उत्पादन पर नहीं लिया जा सका है। यह इकाई के ट्रिप होने के बाद अनुरक्षण के दौरान गड़बड़ी होने से उत्पादन निगम को लाखों रुपये की क्षति उठानी पड़ी थी। इस मामले में अनपरा परियोजना के दो इंजीनियरों के खिलाफ जांच भी चल रही है। यूनिट के ट्रिप होने पर उत्पादन निगम के सीएमडी कामरान रिजवी को अनपरा आना पड़ा था। उन्होंने पहले तो दशहरा के पहले इससे उत्पादन शुरू हो जाने की उम्मीद जताई थी, लेकिन बाद में तापीय परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक ने इस यूनिट से 10 अक्तूबर से उत्पादन शुरू कर लिए जाने का दावा किया था। अनुरक्षण के बाद इस इकाई की आठ अक्तूबर को टेस्टिंग एवं नौ अक्तूबर को लाइटअप किया गया था। इस दौरान भी सीजीएम ने कहा था कि लाइटअप करने के एक दिन बाद 10 अक्तूबर से उत्पादन शुरू कर लिया जाएगा लेकिन अभी तक इससे उत्पादन करने में परियोजना प्रशासन नाकाम साबित हुआ है। इधर बिजली की मांग बढ़ने व उत्पादन में कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को आपात कटौती का सामना करना पड़ रहा है।
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लगभग डेढ़ माह से बंद चल रही पांच सौ मेगावाट की सातवीं इकाई को उत्पादन पर नहीं लिया जा सका है। यह इकाई के ट्रिप होने के बाद अनुरक्षण के दौरान गड़बड़ी होने से उत्पादन निगम को लाखों रुपये की क्षति उठानी पड़ी थी। इस मामले में अनपरा परियोजना के दो इंजीनियरों के खिलाफ जांच भी चल रही है। यूनिट के ट्रिप होने पर उत्पादन निगम के सीएमडी कामरान रिजवी को अनपरा आना पड़ा था। उन्होंने पहले तो दशहरा के पहले इससे उत्पादन शुरू हो जाने की उम्मीद जताई थी, लेकिन बाद में तापीय परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक ने इस यूनिट से 10 अक्तूबर से उत्पादन शुरू कर लिए जाने का दावा किया था। अनुरक्षण के बाद इस इकाई की आठ अक्तूबर को टेस्टिंग एवं नौ अक्तूबर को लाइटअप किया गया था। इस दौरान भी सीजीएम ने कहा था कि लाइटअप करने के एक दिन बाद 10 अक्तूबर से उत्पादन शुरू कर लिया जाएगा लेकिन अभी तक इससे उत्पादन करने में परियोजना प्रशासन नाकाम साबित हुआ है। इधर बिजली की मांग बढ़ने व उत्पादन में कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को आपात कटौती का सामना करना पड़ रहा है।
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