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जीएसटी क्रियान्वयन के अनुपालन में हो रही समस्या
Updated Wed, 18 Oct 2017 10:30 PM IST
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जीएसटी क्रियान्वयन के अनुपालन में हो रही समस्याओं के संबंध में बुधवार को दी सोनभद्र टैक्स बार एसोसिएशन अध्यक्ष राकेश शरण मिश्र ने आयुक्त राज्य कर(वाणिज्य कर) माल एवं सेवा कर को संबोधित 18 सूत्री मांगों का ज्ञापन डीएम को सौंपा। जिसमें अधिवक्ताओं एवं व्यापारियों की समस्याओं के समाधान की मांग उठाई है।
दिए ज्ञापन में जीएसटी रिर्टन में अगस्त माह में लगा विलंब शुक्ल मांफ कर लिया गया शुल्क वापस किए जाने,कर दाताओं को बीमारी या अन्य किसी अपरिहार्य कारणों से समय से रिर्टन/ टैक्स जमा करने में हुई देर के लिए किसी भी प्रकार की पेनाल्टी की कार्यवाही समाप्त करने के साथ ही जीएसटी पोर्टल को नियमित एवं सुचारू रूप से चलाने की व्यवस्था की जाए, जिससे करदाता समय से एवं सुगमता पूर्वक रिर्टन एवं कर जमा कर सकें। करदाताओं पर किसी भी प्रकार का विलंब शुल्क मार्च 2018 तक न लगाया जाए। पोर्टल की खामियों की वजह से पुन: रेगुलर मोड में दिखाई दे रही है, जिसको तत्काल संशोधित किया जाए। पूर्व में दाखिल गलत रिर्टन पुन: रिवाईज करने का विकल्प दिया जाए। पांच करोड़ से नीचे टर्नओवर वाले करदाताओं को त्रैमासिक रिर्टन दाखिल करने की सुविधा प्रदान की जाए। समाधान योजना में एक करोड़ के टर्नओवर को बढ़ाकर कम से कम दो करोड़ किया जाए। केवल एक रिर्टन दाखिल किया जाए। आवश्यकता अनुसार मोबाइल नंबर एवं मेल आईडी बदलने का प्राविधान लागू किया जाए। रिर्टन में अधिवक्ताओं के वकालतनामें को अनिवार्य किया जाए और अन्य व्यक्तियों की भूमिका समाप्त की जाए। किसी भी प्रकार की तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए स्थानीय कार्यालय में खंड वाइज अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए।
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दिए ज्ञापन में जीएसटी रिर्टन में अगस्त माह में लगा विलंब शुक्ल मांफ कर लिया गया शुल्क वापस किए जाने,कर दाताओं को बीमारी या अन्य किसी अपरिहार्य कारणों से समय से रिर्टन/ टैक्स जमा करने में हुई देर के लिए किसी भी प्रकार की पेनाल्टी की कार्यवाही समाप्त करने के साथ ही जीएसटी पोर्टल को नियमित एवं सुचारू रूप से चलाने की व्यवस्था की जाए, जिससे करदाता समय से एवं सुगमता पूर्वक रिर्टन एवं कर जमा कर सकें। करदाताओं पर किसी भी प्रकार का विलंब शुल्क मार्च 2018 तक न लगाया जाए। पोर्टल की खामियों की वजह से पुन: रेगुलर मोड में दिखाई दे रही है, जिसको तत्काल संशोधित किया जाए। पूर्व में दाखिल गलत रिर्टन पुन: रिवाईज करने का विकल्प दिया जाए। पांच करोड़ से नीचे टर्नओवर वाले करदाताओं को त्रैमासिक रिर्टन दाखिल करने की सुविधा प्रदान की जाए। समाधान योजना में एक करोड़ के टर्नओवर को बढ़ाकर कम से कम दो करोड़ किया जाए। केवल एक रिर्टन दाखिल किया जाए। आवश्यकता अनुसार मोबाइल नंबर एवं मेल आईडी बदलने का प्राविधान लागू किया जाए। रिर्टन में अधिवक्ताओं के वकालतनामें को अनिवार्य किया जाए और अन्य व्यक्तियों की भूमिका समाप्त की जाए। किसी भी प्रकार की तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए स्थानीय कार्यालय में खंड वाइज अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए।
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