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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   'son' leave her own 'mother' to mahakumbh mela

'जननी' को ही महाकुंभ मेले में छोड़ गए 'जिगर के दुकड़े'

Fri, 01 Mar 2013 10:27 AM IST
विजय जैन
विजय जैन Updated Fri, 01 Mar 2013 10:27 AM IST
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'son' leave her own 'mother' to mahakumbh mela
जिसने पैदा किया, उसी को छोड़ गए आस्था के महाकुंभ में दर-दर की ठोकरें खाने के लिए। ऐसी एक नहीं करीब 50 महिलाएं हैं, जिन्हें उनके 'अपने' ही मेले में छोड़ गए हैं।
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बूढी आंखों को अब भी है इंतज़ार अपने घर वालों का। कई लोगों को लगता है उन्हें जानबूझकर छोड़ दिया गया है। कई तो अपने घर का पता बखूबी जानती है, लेकिन कुछ महिलाओ को अपने जिले के नाम के अलावा कुछ नही पता। 80 वर्षीय रामदेई के पास तो अपने टिकट के अलावा कुछ भी नही है।
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कुम्भ में भटके लोगो के लिए दो शिविर है ”रणजीत पंडित शिक्षा समिति” और “हेमवती नंदन बहुगुणा स्मृति समिति” का संयुक्त रूप से संचालित शिविर है। अब तक 51000 लोगो को अपने परिवारों से मिलाया जा चुका है। बहुत से बुजुर्ग महिलाओं की आँखें अब भी अपने परिवार वालों का इंतज़ार कर रही है।
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“भाया हम जोगनी जाई, लई चला”

“भाया हम जोगनी जाई, लई चला”..75 साल की दुलिया देवी कुम्भ नगरी में भूली भटकी शिविर में किसी को भी आता देख यही रट लगाने लगाती है। अपनी आंखों में आंसू लिए वो अपनी आपबीती सुनती है की वे 25 जनवरी को अपने बेटे रत्नेश और कुछ रिश्तेदारों के साथ संगम में नहाने आई थी। गंगा नहाने के बाद जब वो बहार निकली तो वो भटक गई। किसी ने उन्हें भूले भटके शिविर में पंहुचा दिया। तब से उन्हें लेने कोई आया नही आया, वो खुद को बिहार की भागलपुर जिले के जोगानिपुर गांव की बताती है।

पड़ोसी के साथ भेज मेले में छुड़वाते हैं बच्चे

कुछ लोग खुद ही परिवार की बुजुर्ग महिलाओं को मेले में छोड़ जाते है तो कई बुजुर्ग महिलाओं को उनके बेटे रखने को तैयार नही होते है और वो अपने पड़ोसियों के द्वारा भेज देते हैं और उनसे उन्हें मेले में छुडवा देते हैं।

पुलिस का डर दिखाया तो ले गया मां को

रीवां म.प्र. की एक 80 वर्षीय महिला शिविर में आयी तो उनके बैग के रखे पर्ची में लिखे नंबर पर जब फ़ोन मिलाया गया तो उधर से उनके बेटे ने कहा आप उनको ट्रेन में बैठा दीजिये मैं यहां उनको उतार लूँगा। जब उसको पुलिस में शिकायत की धमकी दी गई तो अगले दिन अपनी मां को ले गया।

समाज में मानवीय मूल्य धराशायी

प्रेमलता जनकल्याण समिति चलने वाली अरुणा जी कहती की “ कथित रूप से आधुनिक होते समाज में मानवीय मूल्य धराशायी हो चुके हैं। संबंधो की डोर भी अब लाभ पर आधारित है। यही वजह है की बुजुर्गो के लाचार होते ही परिवार वाले उनसे पल्ला झाड़ लेते है।


गरीब और निम्न वर्गीय परिवार में यह प्रवृत्ति बहुत तेजी से चल रही है”। मेले में परिवार द्वारा ठुकरा दी गई बूढी महिलाओ का श्री राम जानकी मंदिर एक शरणस्थली है यहाँ लगभग 50 ऐसी महिलाएं रहती हैं, जिन्हें अपनों के आने का इंतजार आज भी है।
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