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नहीं रहे सियासी हवा का रुख भांपने वाले दिग्गज नेता रामलाल राही
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पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री रामलाल राही (फाइल फोटो)
- फोटो : SITAPUR
सीतापुर। पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री व दिग्गज नेता रामलाल राही का गुरुवार शाम को जिला अस्पताल में कोरोना के कारण निधन हो गया। सीने में तेज दर्द होने के कारण उन्हें सुबह 11 बजे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच में वे कोरोना पॉजिटिव आए थे। उन्हें कोविड के एल-2 वार्ड में भर्ती किया गया था, जहां शाम करीब साढ़े चार बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से जिले में शोक की लहर दौड़ गई। रामलाल राही कांग्रेस पार्टी में थे। उनके पुत्र सुरेश राही भाजपा से हरगांव विधानसभा से विधायक हैं। दूसरे पुत्र रमेश राही भी विधायक रह चुके हैं।
राजनीति में उनका 63 साल का लंबा सफर रहा। वे जनता की नब्ज को बखूबी समझते थे। सियासी हवा का रुख भांपने और विरोधियों के दिल में भी जगह बनाने वाले दूरदर्शी व जनप्रिय नेता रामलाल राही के निधन से एक युग का अंत हो गया। कोरोना संक्रमण ने सीतापुर से एक सियासी पुरोधा ही नहीं बल्कि सामाजिक सरोकारों से वास्ता रखने वाले संवेदनशील शख्सियत को छीन लिया। गुरुवार सुबह जिला अस्पताल में एंटीजन टेस्ट के बाद उनके कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई थी। शाम को अचानक उनका स्वास्थ्य और बिगड़ गया, जिसके बाद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
लहरपुर के ढखेरा गांव में एक जनवरी 1938 को जन्मे रामलाल राही ने अपना राजनीतिक सफर 1957 में शुरू किया। उनकी सक्रियता को देखते हुए 1960 के पीसीसी चुनाव में उन्हें लहरपुर व मिश्रिख मंडलों का रिटर्निंग अधिकारी बनाया गया। कांग्रेस के टिकट पर 1969 में हरगांव विधानसभा क्षेत्र से पहला चुनाव लड़े और जीत हासिल की। 1974 में दोबारा विजयी हुए। 1977 में कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी पार्टी से मिश्रिख लोकसभा सीट से मैदान में उतरे और जीत दर्ज की। फिर 1980 में दोबारा करीब 50 हजार मतों से विजयी हुए। अगला लोकसभा चुनाव लोकदल से लड़ा पर इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
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1989 में फिर कांग्रेस से मैदान में उतरे और लगभग 80 हजार मतों से जीत दर्ज की। 1991 में भी चुनाव जीता तो पार्टी ने उन्हें तोहफा देते हुए केन्द्रीय मंत्री बनाया। इसके बाद सियासत का उतार-चढ़ाव देखते हुए पहले सपा फिर भाजपा में रहे। लेकिन कांग्रेसी विचारधारा को त्याग नहीं सके। लोकसभा चुनाव 2019 में फिर घर वापसी करते हुए कांग्रेस में आ गए। राजनीति में उनका जीवन कई मामलों में एक मिसाल है। उनके निधन से न केवल कांग्रेस बल्कि जिले की राजनीति ने भी एक कुशल नेता खो दिया है, जिसकी भरपाई होना लगभग असंभव है।
मौजूदा सियासत थे वे आहत
राजनीति में बढ़ते अपराधीकरण, जातीयता व पूंजीवाद से वह काफी आहत थे। लोकसभा चुनाव 2014 के दौरान अमर उजाला को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि मौजूदा समय में कोई भी ऐसा सियासी दल नहीं है जो राष्ट्रीय सरोकारों व संवैधानिक मान्यताओं से जुड़कर राजनीति कर रहा हो। उन्होंने बताया था कि अपना पहला चुनाव वह केवल 3300 रुपये खर्च कर जीते थे। समर्थक नि:स्वार्थ प्रचार करते थे। नेता भी सामाजिक सेवा का उद्देश्य लेकर राजनीति करते थे। उनका कहना था कि मौजूदा राजनीति की सूरत बदलने के लिए नेताओं को आत्मचिंतन करना होगा।
परिवार को विरासत में दी राजनीति
चार बार सांसद व दो बार विधायक रह चुके पूर्व केंद्रीय मंत्री रामलाल राही परिवार को विरासत में राजनीति दे गए हैं। अपनी पत्नी स्व सुंदरी राही को जिला पंचायत अध्यक्ष बनाया। बेटे रमेश राही को हरगांव विधानसभा से सपा के टिकट पर विधायक बनाया। वर्तमान में दूसरा बेटा सुरेश राही हरगांव से ही भाजपा विधायक हैं।
सांस की बीमारी से रहे थे जूझ
सीएमएस डॉ. अनिल अग्रवाल ने बताया कि रामलाल राही सांस की बीमारी से जूझ रहे थे। पहले से ही उनका इलाज चल रहा था। गुरुवार को प्राथमिक इलाज के बाद वह राहत महसूस कर रहे थे। कोई खास दिक्कत नहीं थी। ऐसा लग रहा है कि हदय गति रुकने से उनकी मौत हुई है। जिले में कोरोना से यह 72वीं मौत हुई है।
निधन पर जताया शोक
पूर्व केंद्रीय मंत्री के निधन पर जिले में लोक की शहर दौड़ गई। भाजपा, कांग्रेस सहित अन्य पार्टियों के लोगों ने उनके निधन पर गहरा शोक जताया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि रामलाल राही के निधन से उन्हें गहरा आघात पहुंचा है। उनका पूरा जीवन सामाजिक सेवा में लगा रहा। कांग्रेस जिलाध्यक्ष उत्कर्ष अवस्थी, पूर्व जिलाध्यक्ष विनीत दीक्षित, भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व सांसद रेखा वर्मा, राजेश वर्मा, अशोक रावत, विधायक ज्ञान तिवारी, महेंद्र यादव, सुनील वर्मा, रामकृष्ण भार्गव, शशांक त्रिवेदी आदि ने शोक जताया है।
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राजनीति में उनका 63 साल का लंबा सफर रहा। वे जनता की नब्ज को बखूबी समझते थे। सियासी हवा का रुख भांपने और विरोधियों के दिल में भी जगह बनाने वाले दूरदर्शी व जनप्रिय नेता रामलाल राही के निधन से एक युग का अंत हो गया। कोरोना संक्रमण ने सीतापुर से एक सियासी पुरोधा ही नहीं बल्कि सामाजिक सरोकारों से वास्ता रखने वाले संवेदनशील शख्सियत को छीन लिया। गुरुवार सुबह जिला अस्पताल में एंटीजन टेस्ट के बाद उनके कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई थी। शाम को अचानक उनका स्वास्थ्य और बिगड़ गया, जिसके बाद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
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लहरपुर के ढखेरा गांव में एक जनवरी 1938 को जन्मे रामलाल राही ने अपना राजनीतिक सफर 1957 में शुरू किया। उनकी सक्रियता को देखते हुए 1960 के पीसीसी चुनाव में उन्हें लहरपुर व मिश्रिख मंडलों का रिटर्निंग अधिकारी बनाया गया। कांग्रेस के टिकट पर 1969 में हरगांव विधानसभा क्षेत्र से पहला चुनाव लड़े और जीत हासिल की। 1974 में दोबारा विजयी हुए। 1977 में कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी पार्टी से मिश्रिख लोकसभा सीट से मैदान में उतरे और जीत दर्ज की। फिर 1980 में दोबारा करीब 50 हजार मतों से विजयी हुए। अगला लोकसभा चुनाव लोकदल से लड़ा पर इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
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1989 में फिर कांग्रेस से मैदान में उतरे और लगभग 80 हजार मतों से जीत दर्ज की। 1991 में भी चुनाव जीता तो पार्टी ने उन्हें तोहफा देते हुए केन्द्रीय मंत्री बनाया। इसके बाद सियासत का उतार-चढ़ाव देखते हुए पहले सपा फिर भाजपा में रहे। लेकिन कांग्रेसी विचारधारा को त्याग नहीं सके। लोकसभा चुनाव 2019 में फिर घर वापसी करते हुए कांग्रेस में आ गए। राजनीति में उनका जीवन कई मामलों में एक मिसाल है। उनके निधन से न केवल कांग्रेस बल्कि जिले की राजनीति ने भी एक कुशल नेता खो दिया है, जिसकी भरपाई होना लगभग असंभव है।
मौजूदा सियासत थे वे आहत
राजनीति में बढ़ते अपराधीकरण, जातीयता व पूंजीवाद से वह काफी आहत थे। लोकसभा चुनाव 2014 के दौरान अमर उजाला को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि मौजूदा समय में कोई भी ऐसा सियासी दल नहीं है जो राष्ट्रीय सरोकारों व संवैधानिक मान्यताओं से जुड़कर राजनीति कर रहा हो। उन्होंने बताया था कि अपना पहला चुनाव वह केवल 3300 रुपये खर्च कर जीते थे। समर्थक नि:स्वार्थ प्रचार करते थे। नेता भी सामाजिक सेवा का उद्देश्य लेकर राजनीति करते थे। उनका कहना था कि मौजूदा राजनीति की सूरत बदलने के लिए नेताओं को आत्मचिंतन करना होगा।
परिवार को विरासत में दी राजनीति
चार बार सांसद व दो बार विधायक रह चुके पूर्व केंद्रीय मंत्री रामलाल राही परिवार को विरासत में राजनीति दे गए हैं। अपनी पत्नी स्व सुंदरी राही को जिला पंचायत अध्यक्ष बनाया। बेटे रमेश राही को हरगांव विधानसभा से सपा के टिकट पर विधायक बनाया। वर्तमान में दूसरा बेटा सुरेश राही हरगांव से ही भाजपा विधायक हैं।
सांस की बीमारी से रहे थे जूझ
सीएमएस डॉ. अनिल अग्रवाल ने बताया कि रामलाल राही सांस की बीमारी से जूझ रहे थे। पहले से ही उनका इलाज चल रहा था। गुरुवार को प्राथमिक इलाज के बाद वह राहत महसूस कर रहे थे। कोई खास दिक्कत नहीं थी। ऐसा लग रहा है कि हदय गति रुकने से उनकी मौत हुई है। जिले में कोरोना से यह 72वीं मौत हुई है।
निधन पर जताया शोक
पूर्व केंद्रीय मंत्री के निधन पर जिले में लोक की शहर दौड़ गई। भाजपा, कांग्रेस सहित अन्य पार्टियों के लोगों ने उनके निधन पर गहरा शोक जताया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि रामलाल राही के निधन से उन्हें गहरा आघात पहुंचा है। उनका पूरा जीवन सामाजिक सेवा में लगा रहा। कांग्रेस जिलाध्यक्ष उत्कर्ष अवस्थी, पूर्व जिलाध्यक्ष विनीत दीक्षित, भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व सांसद रेखा वर्मा, राजेश वर्मा, अशोक रावत, विधायक ज्ञान तिवारी, महेंद्र यादव, सुनील वर्मा, रामकृष्ण भार्गव, शशांक त्रिवेदी आदि ने शोक जताया है।