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Sitapur News: चीनी मिल शुरू नहीं, नुकसान उठा गन्ना बेच रहे किसान

Sun, 17 Nov 2024 09:52 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर Updated Sun, 17 Nov 2024 09:52 PM IST
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Sugar mill not started, farmers selling sugarcane suffer loss
गुड़बेल पर लगा गन्ने का ढेर।
रामपुर मथुरा (सीतापुर)। किसी को गेहूं की बोआई के लिए खेत खाली करना है तो किसी को इलाज या परिवार में मांगलिक कार्यक्रम के लिए पैसों की जरूरत है। ऐसे समय में सहकारी चीनी मिल महमूदाबाद अब तक न शुरू हो पाने से किसानों को मजबूरी में अपना गन्ना 100 से 120 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान उठाकर गुड़ बेल पर बेचना पड़ रहा है।
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जिले में चार निजी व एक सहकारी चीनी मिल है। हरगांव, रामगढ़ व जवाहरपुर में नवंबर के पहले सप्ताह में पेराई शुरू हो गई है। बिसवां शुगर फैक्टरी का पेराई सत्र 21 नवंबर से शुरू हो रहा है। वहीं, सहकारी चीनी मिल महमूदाबाद इस माह चलने के आसार नहीं हैं। मिल के अफसरों के मुताबिक दिसंबर के पहले सप्ताह में पेराई सत्र शुरू होने की उम्मीद है।
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उधर, क्षेत्र के किसानों को गेहूं की बोआई के लिए खेत खाली करना है। सहालग शुरू होने से भी खर्च बढ़ गया है। इलाज के अलावा कई जरूरी कार्यों के लिए पैसों की जरूरत है। ऐसे में किसान अपना गन्ना बिचौलियों अथवा गुड़-बेल पर बेचने को विवश हैं। मिल में गन्ना 360 रुपये प्रति क्विंटल में बिकता है, जबकि गुड़-बेल पर 240 से 260 रुपये प्रति क्विंटल में खरीदा जा रहा है।
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कम कीमत पर 250 क्विंटल बेचना पड़ा गन्ना
गोंडा देवरिया निवासी किसान रविन्द्र कुमार ने बताया कि किसान सहकारी मिल के हालात ठीक नहीं हैं। हर वर्ष देर से चालू होने से गन्ना किसानों काे नुकसान उठाना पड़ता है। गेहूं की बोआई के लिए पैसे की सख्त जरूरत होने के कारण हम अब तक चार बीघे की करीब 250 क्विंटल गन्ने की फसल गुड़ बेल पर बेच चुके हैं।


इलाज के लिए पैसों की जरूरत पर बेचना पड़ा गन्ना
किसान उदयराज सिंह ने बताया कि वे काफी दिनों से बीमार है। इलाज व गेहूं की बोआई के लिए पैसे की जरूरत है। मजबूरन गुड़-बेल पर करीब पांच बीघे गन्ने की फसल बेचनी पड़ी है। गन्ना किसान मिंटू ने बताया कि गेहूं बोआई के लिए खेत खाली करना था। इसलिए करीब 300 क्विंटल गन्ना बिचौलियों के हाथ बेचा है।


दोहरा नुकसान होने की आशंका
गन्ना किसान जय प्रकाश ने बताया कि घर में वैवाहिक कार्यक्रम है। जरूरी खर्चों के लिए पैसों की जरूरत थी। इसलिए सात बीघे गन्ने की फसल गुड़ बेल पर बेचनी पड़ी। आर्थिक नुकसान के साथ सबसे बड़ी दिक्कत गन्ने के सर्वे व सट्टा बनवाने में आती है। जितना सट्टा है यदि उतनी फसल मिल को नहीं दे पाएंगे तो सट्टा में कटौती हो जाएगी। इससे दोहरा नुकसान होगा।




कलपुर्जे देर से आने पर हुआ विलंब
किसान सहकारी चीनी मिल में 29 नवंबर को पूजन कार्यक्रम होगा। इसके बाद दो दिसंबर से पेराई सत्र का शुभारंभ निश्चित हुआ है। मिल क्षेत्र में लगभग 11,491 हेक्टेयर गन्ने की फसल की बोआई होती है। मिल की मशीनों के कलपुर्जे देर से आने के कारण पेराई सत्र शुरू होने में विलंब हो रहा है। मिल चालू होने के बाद बाहर जा रहे गन्ने को रोका जाएगा।
- सुभाष चंद्र पांडेय, मुख्य गन्ना अधिकारी, चीनी मिल महमूदाबाद
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