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Sitapur News: पराली जलने पर तय होगी प्रधान और कमेटी की जिम्मेदारी
Fri, 25 Sep 2026 01:27 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Fri, 25 Sep 2026 01:27 AM IST
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सीतापुर। जिले के किसानाें के लिए फसल अवशेष न जलाने पर बृहस्पतिवार को जिला प्रशासन ने गाइड लाइन जारी की है। जिलाधिकारी डॉ राजा गणपति आर ने बताया कि खेतों में पराली जलने पर अब प्रधान व निगरानी के लिए गठित कमेटी के सदस्यों की जिम्मेदारी तय होगी। उन्होंने किसानों से फसल अवशेष न जलाने की अपील भी की।
डीएम ने बताया कि पराली और गन्ने की पत्तियां जलाने से पर्यावरण प्रदूषण के साथ मिट्टी के तापमान में वृद्धि होती है, जिससे खेती के लिए उपयोगी मिट्टी में मौजूद सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं। जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है। इसकी रोकथाम के लिए प्रत्येक ग्राम सभा में प्रधान, राजस्व, कृषि, ग्राम्य विकास और पंचायती राज विभाग के कर्मचारियों की समिति गठित की गई है। समिति ग्रामीणों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान और दंडात्मक प्रावधानों की जानकारी देगी।
उन्होंने कहा कि इसके लिए वाल पेंटिंग और सोशल मीडिया के माध्यम से जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। पराली जलने की सूचना पर तत्काल आग बुझाने के साथ थाना और तहसील को जानकारी देनी होगी। एक हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र वाले तथा पराली जलाने की आशंका वाले किसानों की सूची बनाकर उन्हें सचेत किया जाएगा। बिना सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम के कंबाइन हार्वेस्टर चलाने की सूचना भी अधिकारियों को देना होगी।
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ग्राम पंचायतों में दिलाया जाएगा संकल्प
डीएम ने सभी ग्राम पंचायतों में एक सप्ताह के भीतर पूर्व प्रधान व वर्तमान प्रशासक की अध्यक्षता में बैठक कर पराली न जलाने का संकल्प दिलाने के निर्देश भी दिए। तहसील स्तर पर एसडीएम और उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी इसकी निगरानी करेंगे। इसके बाद भी पराली जलने पर प्रधान और समिति के कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई होगी।
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डीएम ने बताया कि पराली और गन्ने की पत्तियां जलाने से पर्यावरण प्रदूषण के साथ मिट्टी के तापमान में वृद्धि होती है, जिससे खेती के लिए उपयोगी मिट्टी में मौजूद सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं। जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है। इसकी रोकथाम के लिए प्रत्येक ग्राम सभा में प्रधान, राजस्व, कृषि, ग्राम्य विकास और पंचायती राज विभाग के कर्मचारियों की समिति गठित की गई है। समिति ग्रामीणों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान और दंडात्मक प्रावधानों की जानकारी देगी।
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उन्होंने कहा कि इसके लिए वाल पेंटिंग और सोशल मीडिया के माध्यम से जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। पराली जलने की सूचना पर तत्काल आग बुझाने के साथ थाना और तहसील को जानकारी देनी होगी। एक हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र वाले तथा पराली जलाने की आशंका वाले किसानों की सूची बनाकर उन्हें सचेत किया जाएगा। बिना सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम के कंबाइन हार्वेस्टर चलाने की सूचना भी अधिकारियों को देना होगी।
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ग्राम पंचायतों में दिलाया जाएगा संकल्प
डीएम ने सभी ग्राम पंचायतों में एक सप्ताह के भीतर पूर्व प्रधान व वर्तमान प्रशासक की अध्यक्षता में बैठक कर पराली न जलाने का संकल्प दिलाने के निर्देश भी दिए। तहसील स्तर पर एसडीएम और उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी इसकी निगरानी करेंगे। इसके बाद भी पराली जलने पर प्रधान और समिति के कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई होगी।