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बिजली संकट से मरीज व्याकुल, एक्स-रे ठप
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सीतापुर। जिले की लड़खड़ाई बिजली व्यवस्था ने स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल कर दिया है। ग्रामीण इलाके की सीएचसी की सेवाएं बेपटरी हो गई है। बिजली के अभाव में न तो जांच हो पा रही है और न ही भर्ती मरीजों को राहत मिल पा रही है। इसके कारण सीएचसी कर्मी, मरीज व उनके तीमारदार परेशान हो रहे हैं।
जिले में जरूरत के मुताबिक बिजली न मिलने से कस्बों व गांवों में भीषण कटौती हो रही है। इस कटौती की चपेट में जिले की 19 सीएचसी भी आ रही है। इन सीएचसी पर अधिकतर ग्रामीण इलाके के मरीज इलाज कराने आते है। सीएचसी पर एक्स-रे, खून की जांच सहित अन्य तमाम सुविधाएं मिलती है। मरीजों को भर्ती करके इलाज दिया जाता है। पर्याप्त बिजली न आने से सीएचसी पर एक्स-रे कराने के लिए मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। अगर दो बजे के बाद बिजली आती है तो मरीजों को अगले दिन आने के लिए बुलाया जाता है।
अगर अगले दिन सुबह बिजली नहीं आई तो मरीज वापस लौट जाते है। दो बजे के बाद ओपीडी सेवाएं बंद कर दी जाती है। इससे वह महंगे दामों पर बाहर से जांच करवाने के लिए मजबूर हैं। कहने को तो सीएचसी पर जनरेटर व इन्वर्टर की सुविधा है लेकिन जनरेटर बहुत ही इमरजेंसी होने पर ही चलाए जा रहे है। इसके कारण ओपीडी व भर्ती मरीज गर्मी में बेहाल हो रहे है। मरीजों के साथ परिजन भी गर्मी से राहत नहीं पा रहे हैं।
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बिजली न आने से पंखा व कूलर चल नहीं पाते है। मरीजों का कहना है कि अस्पताल में मुश्किल से सात से आठ घंटे ही बिजली आ रही है। इतनी कम बिजली आने से मरीजों को गर्मी से राहत दिलाने में पसीने निकल रहा है। मरीजों के साथ सीएचसी के चिकित्सक व अन्य कर्मी भी परेशान है। यह हालात पिसावां, मिश्रिख, सिधौली, महमूदाबाद, बिसवां, हरगांव, गोंदलामऊ सहित अन्य सीएचसी के बने हुए है।
जांच के लिए बिजली का करते रहे इंतजार
मरीज नील कुमार ने बताया कि मिर्जापुर से चलकर सुबह सीएचसी पिसावां आया था। हाथ में कुछ दिक्कत थी। चिकित्सक ने एक्स-रे कराने के लिए लिख दिया। यहां पर बिजली न आने से काफी देर तक बैठा रहा। उसके बाद घर वापस चला गया। मरीज शांती देवी ने बताया कि सीएचसी रेउसा में सुबह नौ बजे एक्स-रे कराने के लिए लाइन में लग गई थी।
यहां पर बताया गया कि बिजली आने पर एक्स-रे हो जाएगा। दोपहर तक बिजली नहीं आई। अब मजबूरन बाहर एक्स-रा करवाना पड़ेगा। आशा बहु मंजनी ने कहा कि गांव से एक गर्भवती को लेकर रात में सीएचसी रेउसा आई थी। डिलीवरी के बाद यहां पर बिजली चली गई। रात भर बिजली न आने से दिक्कत हुई। मच्छरों ने खूब परेशान किया।
नहीं हो पाया मरीजों का एक्स-रे
सीएचसी रेउसा में 11 बजे कई मरीज बैठे थे। मरीज एक्स-रे कराने का इंतजार कर रहे थे। सीएचसी में बिजली नहीं आ रही थी। पंखे भी न चलने से मरीज बेहाल हो रहे थे। घंटों बैठने के बाद जब बिजली नहीं आई तो मरीज वापस लौट गए। यहां पर वैक्सीनेशन करने के लिए बैठी निरमा भारती हाथ से दफ्ती चलाकर हवा लेने का प्रयास करती दिखी। यहां पर भर्ती तमाम मरीज गर्मी में इधर उधर टहल रहे थे। मरीजों ने बताया बिजली न आने से जांच नहीं हो पा रही है।
महंगे दामों पर एक्स-रे कराने को मजबूर
सीएचसी पिसावां में दोपहर के समय काफी मरीज आए थे। मरीज बिजली के इंतजार में बैठे हुए थे। एक्स-रे मशीन चलाने के लिए बिजली का इंतजार किया जा रहा था। जनरेटर था लेकिन वह चल नहीं रहा था। मरीजों ने बताया इन्वर्टर है, वह कुछ ही देर में डिस्चार्ज हो जाता है। इसकी वजह से मरीज बिना एक्स-रे कराए ही लौट गए। उन्होंने बाहर जाकर महंगे दामों पर एक्स-रे करवाया। मरीजों ने बताया कि 15 दिन से बिजली बहुत ही रुला रही है। घर पर समस्या बनी हुई है। अस्पताल आने पर इलाज नहीं मिल पाता है।
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जिले में जरूरत के मुताबिक बिजली न मिलने से कस्बों व गांवों में भीषण कटौती हो रही है। इस कटौती की चपेट में जिले की 19 सीएचसी भी आ रही है। इन सीएचसी पर अधिकतर ग्रामीण इलाके के मरीज इलाज कराने आते है। सीएचसी पर एक्स-रे, खून की जांच सहित अन्य तमाम सुविधाएं मिलती है। मरीजों को भर्ती करके इलाज दिया जाता है। पर्याप्त बिजली न आने से सीएचसी पर एक्स-रे कराने के लिए मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। अगर दो बजे के बाद बिजली आती है तो मरीजों को अगले दिन आने के लिए बुलाया जाता है।
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अगर अगले दिन सुबह बिजली नहीं आई तो मरीज वापस लौट जाते है। दो बजे के बाद ओपीडी सेवाएं बंद कर दी जाती है। इससे वह महंगे दामों पर बाहर से जांच करवाने के लिए मजबूर हैं। कहने को तो सीएचसी पर जनरेटर व इन्वर्टर की सुविधा है लेकिन जनरेटर बहुत ही इमरजेंसी होने पर ही चलाए जा रहे है। इसके कारण ओपीडी व भर्ती मरीज गर्मी में बेहाल हो रहे है। मरीजों के साथ परिजन भी गर्मी से राहत नहीं पा रहे हैं।
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बिजली न आने से पंखा व कूलर चल नहीं पाते है। मरीजों का कहना है कि अस्पताल में मुश्किल से सात से आठ घंटे ही बिजली आ रही है। इतनी कम बिजली आने से मरीजों को गर्मी से राहत दिलाने में पसीने निकल रहा है। मरीजों के साथ सीएचसी के चिकित्सक व अन्य कर्मी भी परेशान है। यह हालात पिसावां, मिश्रिख, सिधौली, महमूदाबाद, बिसवां, हरगांव, गोंदलामऊ सहित अन्य सीएचसी के बने हुए है।
जांच के लिए बिजली का करते रहे इंतजार
मरीज नील कुमार ने बताया कि मिर्जापुर से चलकर सुबह सीएचसी पिसावां आया था। हाथ में कुछ दिक्कत थी। चिकित्सक ने एक्स-रे कराने के लिए लिख दिया। यहां पर बिजली न आने से काफी देर तक बैठा रहा। उसके बाद घर वापस चला गया। मरीज शांती देवी ने बताया कि सीएचसी रेउसा में सुबह नौ बजे एक्स-रे कराने के लिए लाइन में लग गई थी।
यहां पर बताया गया कि बिजली आने पर एक्स-रे हो जाएगा। दोपहर तक बिजली नहीं आई। अब मजबूरन बाहर एक्स-रा करवाना पड़ेगा। आशा बहु मंजनी ने कहा कि गांव से एक गर्भवती को लेकर रात में सीएचसी रेउसा आई थी। डिलीवरी के बाद यहां पर बिजली चली गई। रात भर बिजली न आने से दिक्कत हुई। मच्छरों ने खूब परेशान किया।
नहीं हो पाया मरीजों का एक्स-रे
सीएचसी रेउसा में 11 बजे कई मरीज बैठे थे। मरीज एक्स-रे कराने का इंतजार कर रहे थे। सीएचसी में बिजली नहीं आ रही थी। पंखे भी न चलने से मरीज बेहाल हो रहे थे। घंटों बैठने के बाद जब बिजली नहीं आई तो मरीज वापस लौट गए। यहां पर वैक्सीनेशन करने के लिए बैठी निरमा भारती हाथ से दफ्ती चलाकर हवा लेने का प्रयास करती दिखी। यहां पर भर्ती तमाम मरीज गर्मी में इधर उधर टहल रहे थे। मरीजों ने बताया बिजली न आने से जांच नहीं हो पा रही है।
महंगे दामों पर एक्स-रे कराने को मजबूर
सीएचसी पिसावां में दोपहर के समय काफी मरीज आए थे। मरीज बिजली के इंतजार में बैठे हुए थे। एक्स-रे मशीन चलाने के लिए बिजली का इंतजार किया जा रहा था। जनरेटर था लेकिन वह चल नहीं रहा था। मरीजों ने बताया इन्वर्टर है, वह कुछ ही देर में डिस्चार्ज हो जाता है। इसकी वजह से मरीज बिना एक्स-रे कराए ही लौट गए। उन्होंने बाहर जाकर महंगे दामों पर एक्स-रे करवाया। मरीजों ने बताया कि 15 दिन से बिजली बहुत ही रुला रही है। घर पर समस्या बनी हुई है। अस्पताल आने पर इलाज नहीं मिल पाता है।