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Sitapur News: अस्पतालों के सफाई कर्मियों का पोर्टल पर डेटा नहीं
Sat, 26 Oct 2024 11:49 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sat, 26 Oct 2024 11:49 PM IST
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सीतापुर। जिला व महिला सहित 24 अन्य सरकारी अस्पतालों में साफ सफाई का टेंडर निर्धारित मजदूरी से कम पर कर दिया गया। जब कर्मचारियों के ईपीएफ के भुगतान की बारी आई तो पोर्टल पर सफाई कार्य में लगे किसी भी कर्मचारी का पोर्टल पर कोई डेटा दर्ज नहीं मिला। टेंडर में हुए इस घालमेल की शिकायत जिलाधिकारी को भेजे गए पत्र में की गई है।
सफाई कर्मियों के लिए 252 बेड के जिला अस्पताल व 132 बेड के जिला महिला अस्पताल सहित अन्य सीएचसी के लिए टेंडर हुआ था। इसके माध्यम से अस्पतालों में साफ सफाई, लांड्री व रखरखाव के लिए मैन पॉवर की व्यवस्थाएं की गई थी। स्वास्थ्य विभाग ने यह टेंडर हरदोई की फर्म मैसर्स शैलेंद्र प्रताप को दिया था। मानक के तहत कार्यरत कर्मियों को न्यूनतम मजदूरी 12 हजार मिलना चाहिए। लेकिन टेंडर 394 रुपये प्रति बेड के हिसाब से कर दिया गया। इसके साथ ही कार्यरत साफ सफाई, माली व लांड्री करने वाले कर्मचारियों का डेटा भी पोर्टल पर उपलब्ध नहीं है।
ईपीएफ कटौती के लिए यह डेटा उपलब्ध होना जरूरी है। संस्था ने जब भुगतान के बिल लगाए तो पता चला कि कर्मचारियों का विवरण पोर्टल पर दर्ज ही नहीं है। इस संबंध में सीएमओ डॉ. हरपाल सिंह ने बताया कि जिस समय टेंडर हुआ था। उस समय रेट कम थे। इससे राजस्व की बचत हुई थी। इस मामले में पोर्टल पर डेटा दर्ज न होने की शिकायत की जांच कराई जाएगी।
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सफाई कर्मियों के लिए 252 बेड के जिला अस्पताल व 132 बेड के जिला महिला अस्पताल सहित अन्य सीएचसी के लिए टेंडर हुआ था। इसके माध्यम से अस्पतालों में साफ सफाई, लांड्री व रखरखाव के लिए मैन पॉवर की व्यवस्थाएं की गई थी। स्वास्थ्य विभाग ने यह टेंडर हरदोई की फर्म मैसर्स शैलेंद्र प्रताप को दिया था। मानक के तहत कार्यरत कर्मियों को न्यूनतम मजदूरी 12 हजार मिलना चाहिए। लेकिन टेंडर 394 रुपये प्रति बेड के हिसाब से कर दिया गया। इसके साथ ही कार्यरत साफ सफाई, माली व लांड्री करने वाले कर्मचारियों का डेटा भी पोर्टल पर उपलब्ध नहीं है।
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ईपीएफ कटौती के लिए यह डेटा उपलब्ध होना जरूरी है। संस्था ने जब भुगतान के बिल लगाए तो पता चला कि कर्मचारियों का विवरण पोर्टल पर दर्ज ही नहीं है। इस संबंध में सीएमओ डॉ. हरपाल सिंह ने बताया कि जिस समय टेंडर हुआ था। उस समय रेट कम थे। इससे राजस्व की बचत हुई थी। इस मामले में पोर्टल पर डेटा दर्ज न होने की शिकायत की जांच कराई जाएगी।
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