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Sitapur News: कृषि सखियां सुधार रहीं किसानों की सेहत
Fri, 13 Mar 2026 12:16 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Fri, 13 Mar 2026 12:16 AM IST
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सीतापुर। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत नियुक्त कृषि सखियों ने किसानों को खेती-किसानी मेें सहयोग करने के साथ ही उनकी सेहत सुधारने का प्रयास शुरू किया है। वह घर के पास किचन गार्डन बना रही हैं। वहां ताजी सब्जियां उगाई जा रही हैं।
जिले में कृषि सखियां किसानों को गो आधारित प्राकृतिक खेती के लिए जागरूक कर रही हैं। वह जैविक पोषण वाटिका बनाने की जानकारी देती हैं। बिसवां ब्लॉक की पांच कृषि सखियों ने 60 किचन गार्डन बनवाए हैं। ये घर के आसपास ही बनवाए गए हैं। इसमें भिंडी, लोबिया, पालक, सोया, मेथी, लौकी, कद्दू, टमाटर, मूली, हरी धनिया, बैंगन आदि हरी सब्जियां उगाई जाती हैं।
बिसवां ब्लॉक की न्योराजपुर निवासी कृषि सखी वंदना देवी ने बताया कि पानी की बचत बहुत जरूरी है। इसका दुरुपयोग न किया जाए। यह बच्चों के भविष्य के लिए आवश्यक है। उन्होंने बताया कि किचन गार्डन बनाकर इसमें घर और रसोई से निकलने वाले पानी और अपशिष्ट का प्रयोग करने की किसानों को सलाह दी जाती है। इससे अच्छी सब्जियां पैदा होंगी, जिनका प्रयोग रसोई घर में किया जाए। केवीके कटिया के अध्यक्ष डा. दया शंकर श्रीवास्तव कृषि सखियों का तकनीकी मार्गदर्शन कर रहे हैं। इससे वह बेहतर ढंग से किसानों को आधुनिक खेती के लिए प्रेरित कर रही हैं।
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जिले में कृषि सखियां किसानों को गो आधारित प्राकृतिक खेती के लिए जागरूक कर रही हैं। वह जैविक पोषण वाटिका बनाने की जानकारी देती हैं। बिसवां ब्लॉक की पांच कृषि सखियों ने 60 किचन गार्डन बनवाए हैं। ये घर के आसपास ही बनवाए गए हैं। इसमें भिंडी, लोबिया, पालक, सोया, मेथी, लौकी, कद्दू, टमाटर, मूली, हरी धनिया, बैंगन आदि हरी सब्जियां उगाई जाती हैं।
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बिसवां ब्लॉक की न्योराजपुर निवासी कृषि सखी वंदना देवी ने बताया कि पानी की बचत बहुत जरूरी है। इसका दुरुपयोग न किया जाए। यह बच्चों के भविष्य के लिए आवश्यक है। उन्होंने बताया कि किचन गार्डन बनाकर इसमें घर और रसोई से निकलने वाले पानी और अपशिष्ट का प्रयोग करने की किसानों को सलाह दी जाती है। इससे अच्छी सब्जियां पैदा होंगी, जिनका प्रयोग रसोई घर में किया जाए। केवीके कटिया के अध्यक्ष डा. दया शंकर श्रीवास्तव कृषि सखियों का तकनीकी मार्गदर्शन कर रहे हैं। इससे वह बेहतर ढंग से किसानों को आधुनिक खेती के लिए प्रेरित कर रही हैं।
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