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Sitapur News: हेपेटाइटिस की जांच ठप, 20 दिन बाद लखनऊ से आ रही रिपोर्ट
Sat, 10 May 2025 12:38 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sat, 10 May 2025 12:38 AM IST
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सीतापुर। जिला अस्पताल में एक तरफ जहां जांचों का दायरा बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ पहले से चल रहीं जांचें ठप हो रही हैं। हेपेटाइटिस की पहचान में प्रमुख वायरल लोड की जांच बंद हो गई है। निजी पैथोलॉजी में यह जांच 3,500-6,500 रुपये में होती है। वहीं, लखनऊ से जांच करवाने में करीब 20 दिन बाद रिपोर्ट आती है। इससे मरीजों को समय से इलाज मिलना बहुत ही मुश्किल हो रहा है।
जिला अस्पताल में करीब दो साल से हेपेटाइटिस का इलाज चल रहा है। इलाज की महंगी जांच व दवाएं अस्पताल में निशुल्क में उपलब्ध करवाई जाती हैं। वायरल लोड इसकी प्रमुख जांच है। यह जांच अस्पताल की डीएसएल लैब में होती है। निजी केेंद्रो में इस जांच पर करीब 3500-6500 रूपये खर्च होते है। जिला अस्पताल में यह जांच शुरू होने से मरीजों को काफी राहत मिल गई थी। इससे उनको लखनऊ तक दौडऩा नहीं पड़ता था।
इधर, जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते जांच बंद हो गई है। अस्पताल आने वाले मरीजों का सैंपल लेकर मेडिकल कॉलेज लखनऊ भेजा जाता है। वहां से जांच रिपोर्ट आने में करीब 20 दिन लग जाते है। इससे मरीजों में समय से बीमारी की जानकारी नहीं मिल पाने से उनके इलाज में देरी होती है। इससे उनकी हालत गंभीर हो जाती है। चिकित्सक चाहकर भी जांच रिपोर्ट के अभाव में इलाज नहीं कर पाते हैं।
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इसके पीछे जिम्मेदारों का कहना है कि रीजेंट न होने के कारण जांच ठप हो गई है। इस लैब के प्रभारी डॉ. पीसी विश्वकर्मा ने अवकाश पर होने के कारण कुछ भी बताने से इन्कार कर दिया।
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जिला अस्पताल में करीब दो साल से हेपेटाइटिस का इलाज चल रहा है। इलाज की महंगी जांच व दवाएं अस्पताल में निशुल्क में उपलब्ध करवाई जाती हैं। वायरल लोड इसकी प्रमुख जांच है। यह जांच अस्पताल की डीएसएल लैब में होती है। निजी केेंद्रो में इस जांच पर करीब 3500-6500 रूपये खर्च होते है। जिला अस्पताल में यह जांच शुरू होने से मरीजों को काफी राहत मिल गई थी। इससे उनको लखनऊ तक दौडऩा नहीं पड़ता था।
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इधर, जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते जांच बंद हो गई है। अस्पताल आने वाले मरीजों का सैंपल लेकर मेडिकल कॉलेज लखनऊ भेजा जाता है। वहां से जांच रिपोर्ट आने में करीब 20 दिन लग जाते है। इससे मरीजों में समय से बीमारी की जानकारी नहीं मिल पाने से उनके इलाज में देरी होती है। इससे उनकी हालत गंभीर हो जाती है। चिकित्सक चाहकर भी जांच रिपोर्ट के अभाव में इलाज नहीं कर पाते हैं।
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इसके पीछे जिम्मेदारों का कहना है कि रीजेंट न होने के कारण जांच ठप हो गई है। इस लैब के प्रभारी डॉ. पीसी विश्वकर्मा ने अवकाश पर होने के कारण कुछ भी बताने से इन्कार कर दिया।