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चौथी बार नारी शक्ति को िमलेगी अध्यक्षी
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सीतापुर। जिला पंचायत अध्यक्ष का ताज किसके सिर सजेगा इसकी तस्वीर शनिवार को होने वाले मतदान के बाद साफ हो जाएगी। चुनाव में ऐसा चौथी बार होने जा रहा है, जब जिले की सर्वोच्च सदन की कमान फिर नारी शक्ति के हाथ में होगी। सदन में नारी शक्ति का डंका फिर से बजेगा। जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए इस बार सीट अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित है। प्रतिष्ठा की इस लड़ाई में सीधा मुकाबला भाजपा की श्रद्धा सागर व सपा की अनीता राजवंशी के बीच माना जा रहा है। हालांकि बतौर निर्दलीय प्रभा सिंह व प्रीती भी मैदान में मौजूद रह कर लड़ाई को रोचक बना रही हैं।
ऐसा पहली बार नहीं है, जब कोई महिला जिले की सर्वोच्च सदन की कुर्सी पर विराजमान होगी। इससे पहले 1926 से लेकर 1995 तक जिला पंचायत अध्यक्ष की कमान हमेशा पुरुषों के हाथों में रही है। 1995 में पहली बार पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री रहे रामलाल की राही की पत्नी सुंदरी राही जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज हुईं थी। वह 2000 तक कुर्सी पर रही।
इसके बाद 2000 से 2010 तक जिला पंचायत अध्यक्ष की बागडोर फिर से पुरुषों के हाथों में रही। 2011 में एक बार फिर पूर्व कैबिनेट मंत्री मौजूदा समय में भाजपा नेता रामहेत भारती की पत्नी ऊषा भारती ने जिला पंचायत अध्यक्ष की कमान संभाली। ऊषा भारती कार्यकाल पूरा कर पाती, इससे पहले अविश्वास प्रस्ताव आने के कारण कुर्सी उनके हाथ से निकल गयी। 2014 में इस कुर्सी पर मधू गुप्ता ने जीत हासिल कर 2016 तक जिला पंचायत की बागडोर संभाले रखी। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मधू गुप्ता के बाद इस बार फिर से चौथी बार इस कुर्सी पर आधी आबादी का कब्जा होगा। यह बात अलग है कि जीत का सेहरा किस प्रत्याशी के सिर सजेगा।
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ऐसा पहली बार नहीं है, जब कोई महिला जिले की सर्वोच्च सदन की कुर्सी पर विराजमान होगी। इससे पहले 1926 से लेकर 1995 तक जिला पंचायत अध्यक्ष की कमान हमेशा पुरुषों के हाथों में रही है। 1995 में पहली बार पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री रहे रामलाल की राही की पत्नी सुंदरी राही जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज हुईं थी। वह 2000 तक कुर्सी पर रही।
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इसके बाद 2000 से 2010 तक जिला पंचायत अध्यक्ष की बागडोर फिर से पुरुषों के हाथों में रही। 2011 में एक बार फिर पूर्व कैबिनेट मंत्री मौजूदा समय में भाजपा नेता रामहेत भारती की पत्नी ऊषा भारती ने जिला पंचायत अध्यक्ष की कमान संभाली। ऊषा भारती कार्यकाल पूरा कर पाती, इससे पहले अविश्वास प्रस्ताव आने के कारण कुर्सी उनके हाथ से निकल गयी। 2014 में इस कुर्सी पर मधू गुप्ता ने जीत हासिल कर 2016 तक जिला पंचायत की बागडोर संभाले रखी। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मधू गुप्ता के बाद इस बार फिर से चौथी बार इस कुर्सी पर आधी आबादी का कब्जा होगा। यह बात अलग है कि जीत का सेहरा किस प्रत्याशी के सिर सजेगा।
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