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सीतापुर ट्रैक पर आज दौड़ेगा इलेक्ट्रिक इंजन
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सीतापुर। डॉलीगंज से सीतापुर रेलवे ट्रैक पर मंगलवार को पहली बार ट्रायल के लिए इलेक्ट्रिक इंजन दौड़ाया जाएगा। इंजन को 90 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाने की तैयारी है। ट्रायल सफल रहने के बाद सीआरएस होगा। सब कुछ सही रहा तो सीतापुर से लखनऊ के बीच इलेक्ट्रिक ट्रेनों का संचालन जल्द शुरू हो जाएगा।
वर्ष 2016 में पूर्वोत्तर रेलवे का ऐशबाग वाया सीतापुर-लखीमपुर मीटर गेज ट्रैक को ब्रॉडगेज में बदलने का काम शुरू किया गया था। जनवरी 2019 में पहले लखनऊ से सीतापुर के बीच बड़ी लाइन की ट्रेनों का संचालन शुरू किया गया, फिर लखीमपुर तक ट्रेनें संचालित की जाने लगीं। लखीमपुर से आगे अभी ट्रेन का संचालन शुरू नहीं हुआ है। इस रूट पर ट्रेनों की संख्या भी कम है।
अब रेलवे इस ट्रैक पर इलेक्ट्रिक ट्रेनों का संचालन करने की तैयारी में है। ऐशबाग वाया सीतापुर, बरेली तक ट्रैक का विद्युतीकरण किया जा रहा है। रेल विद्युतीकरण का काम कार्यदायी संस्था कल्पतरु कर रही है। पहले चरण में ऐशबाग से सीतापुर जंक्शन तक रेल विद्युतीकरण कार्य पूरा कर लिया गया है।
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पिछले दिनों मुख्य विद्युत वितरण इंजीनियर एके शुक्ल तथा मुख्य परियोजना अधिकारी (रेल विकास निगम लिमिटेड लखनऊ) संजीव सहगल ने डालीगंज से सीतापुर रेल विद्युतीकरण खंड का निरीक्षण किया था। निरीक्षण सफल रहने के बाद इलेक्ट्रिक इंजन दौड़ाकर ट्रायल की कवायद शुरू कर दी गई। इस बीच कुछ खामियां मिलने पर उन्हें दुरुस्त किया गया।
अब मंगलवार को इस रूट पर पहली बार इलेक्ट्रिक इंजन दौड़ने जा रहा है। इलेक्ट्रिक इंजन 14 जनवरी की दोपहर 12 बजे डॉलीगंज लखनऊ से सीतापुर के लिए रवाना होगा। इसे 90 किमी. प्रति घंटे की स्पीड से दौड़ाया जाएगा। ट्रायल सफल रहने के बाद सीआरएस होगा। सीआरएस की रिपोर्ट आने पर इलेक्ट्रिक ट्रेनों का संचालन शुरू करने की तैयारी है।
डॉलीगंज से सीतापुर तक बने दो हजार फाउंडेशन
लखनऊ (डॉलीगंज) से सीतापुर जंक्शन के बीच रेलवे लाइन के किनारे दो हजार फाउंडेशन बनाए गए हैं। इन्हीं फाउंडेशनों पर लगाए गए खंभों के सहारे तार लगाए गए है। इस विद्युत तार के जरिए इलेक्ट्रिक इंजन को करंट मिलेगा।
नए रेल युग का आगाज जल्द
पहले छोटी से बड़ी लाइन कर लखनऊ से सीतापुर के मध्य रेलवे का नया युग शुरू किया गया। अब इस रूट पर इलेक्ट्रिक ट्रेनों के संचालन की तैयारी है। रेल विद्युतीकरण का काम पूरा हो गया है। ट्रायल व सीआरएस के बाद जल्द ही लखनऊ से सीतापुर के बीच एक बार फिर से नए रेल युग का आगाज होने जा रहा है।
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वर्ष 2016 में पूर्वोत्तर रेलवे का ऐशबाग वाया सीतापुर-लखीमपुर मीटर गेज ट्रैक को ब्रॉडगेज में बदलने का काम शुरू किया गया था। जनवरी 2019 में पहले लखनऊ से सीतापुर के बीच बड़ी लाइन की ट्रेनों का संचालन शुरू किया गया, फिर लखीमपुर तक ट्रेनें संचालित की जाने लगीं। लखीमपुर से आगे अभी ट्रेन का संचालन शुरू नहीं हुआ है। इस रूट पर ट्रेनों की संख्या भी कम है।
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अब रेलवे इस ट्रैक पर इलेक्ट्रिक ट्रेनों का संचालन करने की तैयारी में है। ऐशबाग वाया सीतापुर, बरेली तक ट्रैक का विद्युतीकरण किया जा रहा है। रेल विद्युतीकरण का काम कार्यदायी संस्था कल्पतरु कर रही है। पहले चरण में ऐशबाग से सीतापुर जंक्शन तक रेल विद्युतीकरण कार्य पूरा कर लिया गया है।
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पिछले दिनों मुख्य विद्युत वितरण इंजीनियर एके शुक्ल तथा मुख्य परियोजना अधिकारी (रेल विकास निगम लिमिटेड लखनऊ) संजीव सहगल ने डालीगंज से सीतापुर रेल विद्युतीकरण खंड का निरीक्षण किया था। निरीक्षण सफल रहने के बाद इलेक्ट्रिक इंजन दौड़ाकर ट्रायल की कवायद शुरू कर दी गई। इस बीच कुछ खामियां मिलने पर उन्हें दुरुस्त किया गया।
अब मंगलवार को इस रूट पर पहली बार इलेक्ट्रिक इंजन दौड़ने जा रहा है। इलेक्ट्रिक इंजन 14 जनवरी की दोपहर 12 बजे डॉलीगंज लखनऊ से सीतापुर के लिए रवाना होगा। इसे 90 किमी. प्रति घंटे की स्पीड से दौड़ाया जाएगा। ट्रायल सफल रहने के बाद सीआरएस होगा। सीआरएस की रिपोर्ट आने पर इलेक्ट्रिक ट्रेनों का संचालन शुरू करने की तैयारी है।
डॉलीगंज से सीतापुर तक बने दो हजार फाउंडेशन
लखनऊ (डॉलीगंज) से सीतापुर जंक्शन के बीच रेलवे लाइन के किनारे दो हजार फाउंडेशन बनाए गए हैं। इन्हीं फाउंडेशनों पर लगाए गए खंभों के सहारे तार लगाए गए है। इस विद्युत तार के जरिए इलेक्ट्रिक इंजन को करंट मिलेगा।
नए रेल युग का आगाज जल्द
पहले छोटी से बड़ी लाइन कर लखनऊ से सीतापुर के मध्य रेलवे का नया युग शुरू किया गया। अब इस रूट पर इलेक्ट्रिक ट्रेनों के संचालन की तैयारी है। रेल विद्युतीकरण का काम पूरा हो गया है। ट्रायल व सीआरएस के बाद जल्द ही लखनऊ से सीतापुर के बीच एक बार फिर से नए रेल युग का आगाज होने जा रहा है।