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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sitapur News ›   The villager was shot dead, the body thrown out of the village

ग्रामीण को गोली से उड़ाया, शव गांव के बाहर फेंका

Sat, 23 Sep 2017 11:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 23 Sep 2017 11:38 PM IST
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तालगांव में शुक्रवार रात कुछ लोगों ने रंजिश में एक ग्रामीण की गोली मारकर हत्या कर दी। बाद में उसका शव गांव के बाहर फेंककर फरार हो गए। ग्रामीण की बहन ने गांव के चार लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी हुई है। 

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तालगांव के अमौरा मोती सिंह निवासी दुर्योधन (50) घर पर अकेले ही रहता था। शुक्रवार रात संदिग्ध हालात में वह लापता हो गया। शनिवार सुबह जब गांव के कुछ लोग खेतों की तरफ टहलने निकले, तो दुर्योधन का शव प्राथमिक स्कूल को जाने वाले रास्ते पर पड़ा देखा। खबर फैलते ही गांव में हड़कंप मच गया। पुलिस भी मौके पर पहुंची।
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दुर्योधन की बहन तालगांव के कोरैया दुघरा निवासी रामदेवी भी आ गई। रामदेवी ने अमौरा गांव के ही अनिरुद्ध सिंह व उसके पुत्र इंद्रजीत सिंह, रंजीत सिंह व शिवपाल सिंह पर हत्या का आरोप लगाया है। आरोप है कि चारों लोगों ने रंजिश के चलते शुक्रवार की रात दुर्योधन को अगवा कर लिया।
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जिसके बाद गांव के बाहर ले जाकर उसे गोली मार दी। इसके बाद शव फेंककर फरार हो गए। थानाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह ने बताया कि दुर्योधन की बहन की तहरीर पर अनिरुद्ध सिंह व उसके तीन पुत्रों के खिलाफ हत्या आदि धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई है।  

गांव के बाशिंदों का कहना है कि दुर्योधन से हत्या आरोपी रंजीत की दुश्मनी 2016 में हुई है। बताया जा रहा है कि 2016 में एक मामले में दुर्योधन को जेल जाना पड़ा था। दुर्योधन हाल ही में जेल से छूटकर घर आया था। लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर संदेह जताया कि उसी वारदात को लेकर रंजीत पक्ष ने बदला लेते हुए दुर्योधन को मौत के घाट उतार दिया।

शुक्रवार की सुबह जिस स्थान पर दुर्योधन का शव मिला है, वह स्थान गांव से बामुश्किल 200 से 300 मीटर की दूरी पर है। बावजूद इसके गांव के किसी बाशिंदे ने फायर की आवाज सुनने की पुष्टि नहीं की। गांव के बाशिंदों का क हना है कि रात को तेज बारिश हो रही थी, उसके साथ बिजली गरज रही थी। शायद यही वजह रही कि फायर की आवाज लोगों को सुनाई नहीं दी। 


बहन रामदेवी ने बताया कि दुर्योधन ने विवाह नहीं किया था। इस वजह से वह अकेला ही घर पर रहता था। रंजीत पक्ष से दुश्मनी की वजह से वह गांव में नहीं रुकता था। वह अपनी बहन रामदेवी के घर कोरैया दुघरा में रह रहा था। चार दिन पहले ही वह बहन के घर से अपने घर आया था।  

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