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Sitapur News: राम की खड़ाऊ सिर पर लेकर अयोध्या लौटे भरत
Mon, 29 Sep 2025 11:48 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Mon, 29 Sep 2025 11:48 PM IST
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पिसावां (सीतापुर)। रामलीला में रविवार रात भरत मिलाप, शूर्पणखा के नाक कान काटना व सीताहरण का मंचन किया गया। भगवान राम की खड़ाऊ सिर पर लेकर अयोध्या लौटे भरत का सजीव मंचन देख दर्शक भाव विभोर हो गए।
कस्बे के बाबू सिंह इंटर कालेज के समीप जय मड़ैया बाबा सेवा समिति के स्थानीय कलाकारों ने मंचन में दिखाया कि राम-लक्ष्मण व सीता वनवास पर हैं। जब भरत को यह पता चलता है तो वह माता केकैयी के पास जाते हैं और उन्हें बुरा भला बोलते हैं। कहते हैं कि मुझे राज्य नहीं चाहिए, मुझे भाई राम चाहिए। भरत भगवान राम को वापस लाने के लिए वन जाते हैं। भगवान राम से भरत कहते हैं कि भैया आप अयोध्या चलकर राजकाज संभालिए। प्रभु श्रीराम के समझाने पर भरत उनकी खड़ाऊ सिर पर रखकर अयोध्या वापस लौटते हैं और राजगद्दी पर खड़ाऊ रखकर राजकाज में लग जाते हैं। उधर, वन में सूपर्णखा भगवान राम को देख उन पर मोहित होकर विवाह का प्रस्ताव देती है। राम के समझाने पर भी सूपर्णखा अपनी बात पर अड़ी रहती है। इससे लक्ष्मण क्रोधित होकर सूपर्णखा के नाक-कान काट देते हैं। तब वह अपने भाई रावण के पास जाती है। रावण यह देखकर क्रोधित होता है और अपने मामा मारीच से मिलकर छल से सीता माता का हरण कर लंका ले जाता है। लंका जाते समय जटायू के विरोध करने पर रावण उसे घायल कर देता है। राम-लक्ष्मण कुटिया में सीता को न पाकर उनकी खोज करने लगते हैं।
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कस्बे के बाबू सिंह इंटर कालेज के समीप जय मड़ैया बाबा सेवा समिति के स्थानीय कलाकारों ने मंचन में दिखाया कि राम-लक्ष्मण व सीता वनवास पर हैं। जब भरत को यह पता चलता है तो वह माता केकैयी के पास जाते हैं और उन्हें बुरा भला बोलते हैं। कहते हैं कि मुझे राज्य नहीं चाहिए, मुझे भाई राम चाहिए। भरत भगवान राम को वापस लाने के लिए वन जाते हैं। भगवान राम से भरत कहते हैं कि भैया आप अयोध्या चलकर राजकाज संभालिए। प्रभु श्रीराम के समझाने पर भरत उनकी खड़ाऊ सिर पर रखकर अयोध्या वापस लौटते हैं और राजगद्दी पर खड़ाऊ रखकर राजकाज में लग जाते हैं। उधर, वन में सूपर्णखा भगवान राम को देख उन पर मोहित होकर विवाह का प्रस्ताव देती है। राम के समझाने पर भी सूपर्णखा अपनी बात पर अड़ी रहती है। इससे लक्ष्मण क्रोधित होकर सूपर्णखा के नाक-कान काट देते हैं। तब वह अपने भाई रावण के पास जाती है। रावण यह देखकर क्रोधित होता है और अपने मामा मारीच से मिलकर छल से सीता माता का हरण कर लंका ले जाता है। लंका जाते समय जटायू के विरोध करने पर रावण उसे घायल कर देता है। राम-लक्ष्मण कुटिया में सीता को न पाकर उनकी खोज करने लगते हैं।
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