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जिला अस्पताल में बेड फुल, लौटे मरीज

Mon, 18 Jul 2022 11:45 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 18 Jul 2022 11:45 PM IST
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Beds full in district hospital, returned patients
जिला अस्पताल में मेडिकल बी वार्ड में भर्ती मरीज। - संवाद - फोटो : SITAPUR
सीतापुर। जुलाई की बढ़ती गर्मी मरीजों के लिए संकट बन रही है। जिला अस्पताल फुल होने से मरीजों को भर्ती करना मुश्किल हो रहा है। 230 बेड के अस्पताल में इस समय करीब 250 मरीज भर्ती हैं। कई बेड़ पर दो मरीज लिटाकर इलाज हो रहा है। इससे मरीजों को इलाज कराने के लिए काफी दुश्वारियां उठानी पड़ रही हैं।
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जिला अस्पताल की क्षमता 230 बेड की है। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक जुलाई में बरसात न होने के कारण मरीजों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। अमर उजाला टीम ने सोमवार सुबह अस्पताल की रियलटी परखी तो हर तरफ भीड़ नजर आई। सुबह नौ बजे कई लोग सर्जन डॉ. गौरव मिश्र के कक्ष के बाहर लाइन में खड़े हुए थे।
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एक मरीज भर्ती करने की जिद कर रहा था तो डॉक्टर साहब ने बताया अभी बेड नहीं है। डॉ. एमके प्रजापति का कक्ष बंद मिला। इनके कक्ष के बाहर कई मरीज इंतजार में खड़े हुए थे। पर्चा काउंटर पर सुबह 10 बजे अस्पताल के मुख्य गेट तक लंबी लाइन दिखाई दी। इसी तरह पुरुष व महिला के दवा काउंटर पर भी काफी भीड़ नजर आई।
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लाइन में खड़े रमेश ने बताया दवा लेने के लिए 20 मिनट से लाइन में खड़ा हूं। लेकिन अभी तक दवा नहीं मिल पाई है। एक मरीज को दवा देने में कम से कम पांच मिनट का समय लग रहा था। मरीजों की बढ़ती तादाद के कारण अस्पताल के मेडिकल वार्ड, महिला वार्ड, चिल्ड्रेन वार्ड, पेइंग वार्ड के सभी बेड फुल हैं। इसके कारण नए मरीजों को अस्पताल में भर्ती करना मुश्किल हो रहा है।
कई मरीजों के साथ बेड साझा किए जा रहे है। इससे अगर कोई गंभीर मरीज आता है तो भर्ती करना मुश्किल हो जाता है। एक-एक बेड के लिए अस्पताल में मारामारी मची हुई है। ओपीडी में इस समय दो हजार से अधिक मरीज आ रहे हैं।
बेड न होने से लौटाए गये मरीज
इस्माइलपुर के उदित को पेट में तेज दर्द था। इससे वह पहले इमरजेंसी पहुंचे। वहां पर चिकित्सकों ने उन्हें कुछ इंजेक्शन लगाए। उदित को जब राहत नहीं मिली तो बोले साहब भर्ती कर लीजिए। डॉक्टर ने बेड न होने का हवाला देकर लौटा दिया। खैराबाद की रूसखाना सीने में दर्द के चलते अस्पताल में दिखाने आई थी। डॉक्टर ने कहा कि पहले ईसीजी कराओ। वह जांच करवाकर लौटी तो डॉक्टर बोले आपको भर्ती करने की जरूरत है लेकिन बेड नहीं है।
ट्रांसफर के बाद ले लिया अवकाश
स्वास्थ्य विभाग की ट्रांसफर पॉलिसी में जिला अस्पताल के पांच चिकित्सकों का गैर जनपद स्थानांतरण हो गया था। किसी भी चिकित्सक को अभी तक रिलीव नहीं किया गया है। डॉ. जेएन सिंह मेडिकल लीव पर चले गए है। दो चिकित्सक आकर कामकाज कर रहे हैं। अन्य चिकित्सक छुट्टी पर हैं। स्थानांतरण में दो चिकित्सक गैर जनपद से आने थे, जिसमें अभी तक महज एक ही चिकित्सक ने जॉइनिंग दी है। वह भी अवकाश पर चले गए है। इससे अस्पताल में चिकित्सकों का संकट और भी गहराता जा रहा है। इसकी वजह से मरीजों को इलाज कराना बहुत ही मुश्किल पड़ रहा है।
इलाज के लिए जूझ रहे मरीज
एक तरफ जहां अस्पताल में मरीजों की भीड़ बढ़ती जा रही है, वहीं जांच कराने के लिए मरीज काफी परेशान हैं। पैथालॉजी के बाहर सुबह करीब 10 बजे मरीजों की काफी तादाद दिखाई दी। एक मरीज को अपना पर्चा जमा करके सैंपल देने में करीब 30 मिनट का समय लग रहा था। उसके बाद वह रिपोर्ट पाने के लिए करीब चार घंटे इंतजार करता। डेढ़ से दो बजे के बीच ही उसे रिपोर्ट मिल पाती। इतना लंबा समय खर्च करने के बाद ही मरीज को इलाज मिल पा रहा था।
अस्पताल में पार्किंग बन रही समस्या
जिला अस्पताल में पार्किंग व्यवस्था चौपट हो गई है। हाल यह है सोमवार को अस्पताल की इमरजेंसी से लेकर जन औषधि केंद्र तक वाहन तितर बितर खड़े हुए थे। इससे अगर कोई जन औषधि केंद्र तक पहुंचना चाहे तो वह इन वाहनों के बीच से ही होकर ही जाएगा। इसी तरह मुख्य गेट के पास भी वाहन खड़े हुए नजर आए। जबकि अस्पताल में पुलिस चौकी मौजूद है। फिर भी इन वाहनों पर कोई लगाम नहीं लग पा रही है।

इस समय अस्पताल में मरीजों की संख्या काफी अधिक है। जब तक बरसात नहीं होगी, मरीजों की संख्या बढ़ती चली जाएगी। बेड फुल हो गए है। इससे भर्ती करने में समस्या आ रही है।
- डॉ. आरके सिंह, सीएमएस, जिला अस्पताल
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