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हरदोई से फिर संदना पहुंचा टाइगर
Sitapur
Updated Tue, 21 Oct 2014 05:31 AM IST
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सीतापुर। शनिवार को हरदोई जिले के संडीला वन रेंज में दिखा टाइगर रविवार देर शाम फिर संदना क्षेत्र में पहुंच गया। वन विभाग के विशेषज्ञों ने पगचिह्नों के आधार पर टाइगर के वापस संदना रेंज में होने की पुष्टि कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि वह फिर से संदना क्षेत्र में लौट आया है। पहले टाइगर बिल्कुल सही लोकेश्ान में जा रहा था, जहां उसे पकड़ना आसान था।
टाइगर को पकड़ने के लिए आए वन्यजीव विशेषज्ञ आफताब वली खान ने बताया कि शनिवार को संदना क्षेत्र के भीखपुर गांव के पास टाइगर के पगचिह्न मिले थे। उस स्थान के करीब ही एक तरफ सरायन नदी तो दूसरी तरफ दक्षिण में गोमती नदी बह रही है। शनिवार रात टाइगर गोमती नदी पार कर हरदोई जिले की सीमा में पहुंच गया था। उसके पगमॉर्क हरदोई जिले के संडीला वन रेंज में छावन ग्रामसभा के तुलसीपुर गांव के पास मिले। यह स्थ्ाान टाइगर के रहने के लिए काफी मुफीद था। आसपास दूर-दूर तक नरकुल का जंगल था। इसमें यह आसानी से छिप सकता था। इसके अलावा पड़ोस में ही करीब 30 हेक्टेयर भूमि पर भारी जंगल है। उस इलाके में नीलगाय भी बहुतायत में हैं। पड़ोस में ही गोमती नदी है। लिहाजा टाइगर को इस स्थान पर शिकार के लिए नीलगाय, पीने के पानी के लिए गोमती नदी और रहने के लिए नरकुल व जंगल उपलब्ध है। विशेषज्ञों ने बताया कि टाइगर को पकड़ने के लिए वन विभाग को इससे अच्छा मौका नहीं मिल सकता था लेकिन रविवार शाम उसके ताजा पगचिह्न फिर से संदना रेंज में देखे गए हैं। इससे वन विभाग के कर्मी हैरत में हैं। टीम को सतर्क कर दिया गया। विशेषज्ञों की टीम हरदोई के संडीला रेंज से देर शाम वापस संदना पहुंच गई। वन विभाग के एसडीओ राकेश चौधरी ने बताया कि टाइगर के हरदोई जिले के वन रेंज संडीला पहुंचने की सूचना वहां के अधिकारियों को दे दी गई थी लेकिन अब टाइगर के संदना में वापस आने के बाद नए सिरे से उसे पकड़ने की रणनीति बनाई जा रही है।
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टाइगर को पकड़ने के लिए आए वन्यजीव विशेषज्ञ आफताब वली खान ने बताया कि शनिवार को संदना क्षेत्र के भीखपुर गांव के पास टाइगर के पगचिह्न मिले थे। उस स्थान के करीब ही एक तरफ सरायन नदी तो दूसरी तरफ दक्षिण में गोमती नदी बह रही है। शनिवार रात टाइगर गोमती नदी पार कर हरदोई जिले की सीमा में पहुंच गया था। उसके पगमॉर्क हरदोई जिले के संडीला वन रेंज में छावन ग्रामसभा के तुलसीपुर गांव के पास मिले। यह स्थ्ाान टाइगर के रहने के लिए काफी मुफीद था। आसपास दूर-दूर तक नरकुल का जंगल था। इसमें यह आसानी से छिप सकता था। इसके अलावा पड़ोस में ही करीब 30 हेक्टेयर भूमि पर भारी जंगल है। उस इलाके में नीलगाय भी बहुतायत में हैं। पड़ोस में ही गोमती नदी है। लिहाजा टाइगर को इस स्थान पर शिकार के लिए नीलगाय, पीने के पानी के लिए गोमती नदी और रहने के लिए नरकुल व जंगल उपलब्ध है। विशेषज्ञों ने बताया कि टाइगर को पकड़ने के लिए वन विभाग को इससे अच्छा मौका नहीं मिल सकता था लेकिन रविवार शाम उसके ताजा पगचिह्न फिर से संदना रेंज में देखे गए हैं। इससे वन विभाग के कर्मी हैरत में हैं। टीम को सतर्क कर दिया गया। विशेषज्ञों की टीम हरदोई के संडीला रेंज से देर शाम वापस संदना पहुंच गई। वन विभाग के एसडीओ राकेश चौधरी ने बताया कि टाइगर के हरदोई जिले के वन रेंज संडीला पहुंचने की सूचना वहां के अधिकारियों को दे दी गई थी लेकिन अब टाइगर के संदना में वापस आने के बाद नए सिरे से उसे पकड़ने की रणनीति बनाई जा रही है।
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