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मौसम की मार से अन्नदाता की बढ़ीं मुसीबतें
Sitapur
Updated Fri, 10 Jan 2014 05:45 AM IST
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सीतापुर। पिछले कुछ दिनों से कोहरे के साथ ही मौसम में अचानक बढ़ी ठंड से फूल वाली फसलों को काफी क्षति पहुंच रही है। इसके अलावा तेज हवा के चलते आर्द्रता में भी इजाफा हुआ है। भयंकर पाले तथा कोहरे से अरहर, सरसों, मसूर और आलू की फसल को काफी नुकसान हो रहा है। उधर गुरुवार को हुई बारिश ने किसानों की मुसीबतों को और भी बढ़ा दिया है।
शीतकालीन सत्र में मुख्य रूप से जिले में गेहूं, सरसों, चना, मटर, मसूर व अरहर की फसलों की बोआई की जाती है। इसके साथ ही आलू की खेती भी बड़े पैमाने पर की जाती है। इन सभी फसलों के लिए सर्दी में पड़ने वाला पाला काफी हानिकारक है। फसलों में मुख्य रूप से शुंडी, झुलसा, उकठा, इल्ली व पत्तियाें में कीट लगने की संभावना बनी रहती है। इन रोगों के उपचार के लिए समय-समय पर कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करना जरूरी होता है। समय रहते छिड़काव न किए जाने पर फसलों को खासा नुकसान पहुंचता है, जिससे पैदावार भी घट जाती है। कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. आनंद सिंह का कहना है कि यदि इसी प्रकार ठंडक बनी रही और पाला गिरता रहा तो मसूर, सरसों तथा अरहर की फसलों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। आलू में भी झुलसा रोग लग सकता है। अधिक पाला पड़ने से अरहर तथा लाही, जो इस समय फूल पर हैं, को भी काफी नुकसान हो रहा है। ठंडक के चलते इन फसलों के फूल गिर रहे हैं। इस बीच बारिश होने के बाद सरसों, आलू, अरहर, मसूर, गोभी, पत्तागोभी की फसलों को भी खासा नुकसान पहुंच रहा है। दरअसल बारिश के बाद रात में तापमान न्यूनतम स्तर पर पहुंच जाता है, जिससे कोशिका द्रव्य जम जाता है और कोशिकाएं नष्ट होने लगती है।
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शीतकालीन सत्र में मुख्य रूप से जिले में गेहूं, सरसों, चना, मटर, मसूर व अरहर की फसलों की बोआई की जाती है। इसके साथ ही आलू की खेती भी बड़े पैमाने पर की जाती है। इन सभी फसलों के लिए सर्दी में पड़ने वाला पाला काफी हानिकारक है। फसलों में मुख्य रूप से शुंडी, झुलसा, उकठा, इल्ली व पत्तियाें में कीट लगने की संभावना बनी रहती है। इन रोगों के उपचार के लिए समय-समय पर कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करना जरूरी होता है। समय रहते छिड़काव न किए जाने पर फसलों को खासा नुकसान पहुंचता है, जिससे पैदावार भी घट जाती है। कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. आनंद सिंह का कहना है कि यदि इसी प्रकार ठंडक बनी रही और पाला गिरता रहा तो मसूर, सरसों तथा अरहर की फसलों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। आलू में भी झुलसा रोग लग सकता है। अधिक पाला पड़ने से अरहर तथा लाही, जो इस समय फूल पर हैं, को भी काफी नुकसान हो रहा है। ठंडक के चलते इन फसलों के फूल गिर रहे हैं। इस बीच बारिश होने के बाद सरसों, आलू, अरहर, मसूर, गोभी, पत्तागोभी की फसलों को भी खासा नुकसान पहुंच रहा है। दरअसल बारिश के बाद रात में तापमान न्यूनतम स्तर पर पहुंच जाता है, जिससे कोशिका द्रव्य जम जाता है और कोशिकाएं नष्ट होने लगती है।
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