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बुखार से तीन की मौत, 80 बीमार
Updated Tue, 11 Sep 2018 12:05 AM IST
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दूषित पानी की वजह से बीमारी फैलने की आशंका, विधायक व स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची गांव
संदना (सीतापुर)। विकासखंड गोंदलामऊ में सोमवार को तीन लोगों की मौत हो गई। इनमें से दो लोगों की मौत लखनऊ में इलाज के दौरान हुई है। इसके अलावा गांव में 80 लोग बुखार से पीड़ित हैं। घरवाले बुखार से मौत होने की बात कह रहे हैं जबकि स्वास्थ्य विभाग इससे इन्कार कर रहा है।
वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव पहुंचकर मरीजों को दवाएं वितरित की। छह गंभीर मरीजों को सीएचसी में भर्ती कराया गया है। गोंदलामऊ इलाके में बुखार का प्रकोप लगातार बढ़ता ही जा रहा है। दर्जन भर से अधिक गांव इसकी चपेट में आ चुके हैं। नगवा जयराम की सरोज कुमारी (50) को कई दिनों से बुखार आ रहा था।
इस पर घरवाले इलाज के लिए सिधौली के एक प्राइवेट अस्पताल जा रहे थे। रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। रंजना (24) व रूपरानी (70) को भी बुखार आ रहा था। घरवालों ने पहले जिले में इलाज कराया। उसके बाद एक सप्ताह से दोनों का इलाज लखनऊ के निजी हास्पिटल में चल रहा था। इन दोनो की सोमवार को मौत हो गई।
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इन दोनों के परिवारों के अन्य लोग भी बुखार से पीड़ित हैं। इसके अलावा अखिलेश (27), श्रवण (28), सुमाना (30), आकांक्षा (15), घनश्याम (45) व कुंवर (40) तेज बुखार से कराह रहे हैं। गांव में इनके अलावा छह लोग गंभीर मिले। इन्हें सीएचसी गोंदलामऊ में भर्ती कराया गया है। इसकी जानकारी होने पर डॉ. ओमेंद्र सिंह की टीम गांव पहुंची। मरीजों को दवाएं वितरित की गई।
दो सौ लोग बुखार की चपेट में
औरंगाबाद/सीतापुर। गोंदलामऊ के बाद अब यह बुखार मिश्रिख इलाके में भी पहुंच गया है। करीब दो सौ लोग बुखार से पीड़ित मिले हैं। मिश्रिख विकासखंड के गांव रामशाला, कादीनगर व मानपुर में करीब दो सौ लोग बुखार से पीड़ित हैं। इनको कई दिनो से बुखार आ रहा है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. प्रखर श्रीवास्तव की टीम कादीनगर पहुंची। मरीजों को दवाएं वितरित की गईं।
गंदगी व दूषित पानी है संक्रमण का कारण
गोंदलामऊ इलाके में संक्रमण फैल चुका है। नगवा जयराम में स्वास्थ्य विभाग के अनुरोध पर जलनिगम ने सात हैंडपंपों के नमूने भरे थे। इनमें से तीन के नमूने फेल हुए हैं। इन हैंडपंपों से दूषित पानी आ रहा था। इस पर सीएमओ ने इन हैंडपंपों का संचालन बंद करा दिया था।
इससे अब यहां के हालात सामान्य हो रहे हैं। कुछ यही स्थिति इन गांवों की भी है। सहायक अभियंता जल निगम अजय प्रभाकर ने बताया नटवरग्रंट में दूषित पानी की रिपोर्ट आ चुकी है। अब अन्य गांवों के नमूने भरे जाएंगे।
क्या है स्वास्थ्य विभाग
सीएमओ डॉ. आरके नैय्यर ने बताया सरोज कुमारी श्वांस रोग से काफी समय से बीमार चल रही थीं। वह प्राइवेट अस्पताल में इलाज करा रही थीं। रंजना अपने पति के साथ बांदा जिले में रहती थी। वह भी काफी समय से बीमार चल रही थी। दो दिन पहले ही गांव आई थी। इनका लखनऊ के निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था।
रूपरानी लखनऊ में रहती थी। वह काफी वृद्ध थी। लखनऊ में इलाज के दौरान मौत हुई थी। किसी भी मरीज की बुखार से मौैत नहीं हुई है। गांव का पानी दूषित हो रहा है। इसकी शिकायत जिलाधिकारी से की जा चुकी है। विधायक से भी हैंडपंप सही कराने का अनुरोध किया गया है। टीमें बराबर गांव पहुंचकर मरीजों की देखरेख कर रही हैं।
प्रधान भी कम नहीं है दोषी
प्रत्येक ग्राम पंचायत में ग्रामीण स्वास्थ्य स्वच्छता समिति का खाता होता है। इस खाते का संचालन ग्राम प्रधान व आशा के संयुक्त प्रयास से किया जाता है। शासन द्वारा प्रतिवर्ष 10 हजार का बजट दिया जाता है। इस बजट से प्रधान ग्राम पंचायत में एंटीलार्वा व चूना का छिड़काव, फागिंग मशीन खरीदते हैं लेकिन जिन गांवों में यह प्रकोप फैला हुआ है।
वहां के प्रधानों ने अभी तक खाता ही नहीं खुलवाया है। केवल स्वास्थ्य विभाग पर आरोप मढ़कर बच रहे हैं। हर बार वह स्वास्थ्य विभाग से ही छिड़काव कराने की बात कहते है जबकि वे खुद ही साफ-सफाई की व्यवस्था कर सकते हैं।
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संदना (सीतापुर)। विकासखंड गोंदलामऊ में सोमवार को तीन लोगों की मौत हो गई। इनमें से दो लोगों की मौत लखनऊ में इलाज के दौरान हुई है। इसके अलावा गांव में 80 लोग बुखार से पीड़ित हैं। घरवाले बुखार से मौत होने की बात कह रहे हैं जबकि स्वास्थ्य विभाग इससे इन्कार कर रहा है।
वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव पहुंचकर मरीजों को दवाएं वितरित की। छह गंभीर मरीजों को सीएचसी में भर्ती कराया गया है। गोंदलामऊ इलाके में बुखार का प्रकोप लगातार बढ़ता ही जा रहा है। दर्जन भर से अधिक गांव इसकी चपेट में आ चुके हैं। नगवा जयराम की सरोज कुमारी (50) को कई दिनों से बुखार आ रहा था।
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इस पर घरवाले इलाज के लिए सिधौली के एक प्राइवेट अस्पताल जा रहे थे। रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। रंजना (24) व रूपरानी (70) को भी बुखार आ रहा था। घरवालों ने पहले जिले में इलाज कराया। उसके बाद एक सप्ताह से दोनों का इलाज लखनऊ के निजी हास्पिटल में चल रहा था। इन दोनो की सोमवार को मौत हो गई।
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इन दोनों के परिवारों के अन्य लोग भी बुखार से पीड़ित हैं। इसके अलावा अखिलेश (27), श्रवण (28), सुमाना (30), आकांक्षा (15), घनश्याम (45) व कुंवर (40) तेज बुखार से कराह रहे हैं। गांव में इनके अलावा छह लोग गंभीर मिले। इन्हें सीएचसी गोंदलामऊ में भर्ती कराया गया है। इसकी जानकारी होने पर डॉ. ओमेंद्र सिंह की टीम गांव पहुंची। मरीजों को दवाएं वितरित की गई।
दो सौ लोग बुखार की चपेट में
औरंगाबाद/सीतापुर। गोंदलामऊ के बाद अब यह बुखार मिश्रिख इलाके में भी पहुंच गया है। करीब दो सौ लोग बुखार से पीड़ित मिले हैं। मिश्रिख विकासखंड के गांव रामशाला, कादीनगर व मानपुर में करीब दो सौ लोग बुखार से पीड़ित हैं। इनको कई दिनो से बुखार आ रहा है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. प्रखर श्रीवास्तव की टीम कादीनगर पहुंची। मरीजों को दवाएं वितरित की गईं।
गंदगी व दूषित पानी है संक्रमण का कारण
गोंदलामऊ इलाके में संक्रमण फैल चुका है। नगवा जयराम में स्वास्थ्य विभाग के अनुरोध पर जलनिगम ने सात हैंडपंपों के नमूने भरे थे। इनमें से तीन के नमूने फेल हुए हैं। इन हैंडपंपों से दूषित पानी आ रहा था। इस पर सीएमओ ने इन हैंडपंपों का संचालन बंद करा दिया था।
इससे अब यहां के हालात सामान्य हो रहे हैं। कुछ यही स्थिति इन गांवों की भी है। सहायक अभियंता जल निगम अजय प्रभाकर ने बताया नटवरग्रंट में दूषित पानी की रिपोर्ट आ चुकी है। अब अन्य गांवों के नमूने भरे जाएंगे।
क्या है स्वास्थ्य विभाग
सीएमओ डॉ. आरके नैय्यर ने बताया सरोज कुमारी श्वांस रोग से काफी समय से बीमार चल रही थीं। वह प्राइवेट अस्पताल में इलाज करा रही थीं। रंजना अपने पति के साथ बांदा जिले में रहती थी। वह भी काफी समय से बीमार चल रही थी। दो दिन पहले ही गांव आई थी। इनका लखनऊ के निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था।
रूपरानी लखनऊ में रहती थी। वह काफी वृद्ध थी। लखनऊ में इलाज के दौरान मौत हुई थी। किसी भी मरीज की बुखार से मौैत नहीं हुई है। गांव का पानी दूषित हो रहा है। इसकी शिकायत जिलाधिकारी से की जा चुकी है। विधायक से भी हैंडपंप सही कराने का अनुरोध किया गया है। टीमें बराबर गांव पहुंचकर मरीजों की देखरेख कर रही हैं।
प्रधान भी कम नहीं है दोषी
प्रत्येक ग्राम पंचायत में ग्रामीण स्वास्थ्य स्वच्छता समिति का खाता होता है। इस खाते का संचालन ग्राम प्रधान व आशा के संयुक्त प्रयास से किया जाता है। शासन द्वारा प्रतिवर्ष 10 हजार का बजट दिया जाता है। इस बजट से प्रधान ग्राम पंचायत में एंटीलार्वा व चूना का छिड़काव, फागिंग मशीन खरीदते हैं लेकिन जिन गांवों में यह प्रकोप फैला हुआ है।
वहां के प्रधानों ने अभी तक खाता ही नहीं खुलवाया है। केवल स्वास्थ्य विभाग पर आरोप मढ़कर बच रहे हैं। हर बार वह स्वास्थ्य विभाग से ही छिड़काव कराने की बात कहते है जबकि वे खुद ही साफ-सफाई की व्यवस्था कर सकते हैं।