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बुखार से चार की मौत, सौ से अधिक बीमार
Updated Sun, 16 Sep 2018 01:05 AM IST
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जिले में नहीं थम रहा बुखार का प्रकोप, मरने वालों की संख्या हुई 23
औरंगाबाद/सीतापुर। मिश्रिख व गोंदलामऊ विकासखंड में बुखार से चार की मौत हो गई। सौ से अधिक लोग बुखार से पीड़ित है। कोई सरकारी तो कोई प्राइवेट चिकित्सालय में इलाज करा रहा है। बुखार से मरने की वाली संख्या 19 से 23 पहुंच गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एक गांव जाकर कुछ मरीजों को दवाएं वितरित कीं। अन्य गांवों में टीम ने जाना जरुरी नहीं समझा।
मिश्रिख विकासखंड के अकबरपुर निवासी गोलू (12) को कई दिन से बुखार आ रहा था। पहले मिश्रिख सीएचसी पर दिखाया। हालत गंभीर होने पर जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। शनिवार को रास्ते में गोलू ने दम तोड़ दिया। गोंदलामऊ विकासखंड के रामपुर मढिय़ा निवासी साधना (12) दो दिन से बुखार से पीड़ित थी।
इनका प्राइवेट अस्पताल में इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान ही मौत हो गई। रघुनाथपुर हरिहरपुर निवासी रितेश (2) माह एक सप्ताह से तेज बुखार की चपेट में था। प्राइवेट अस्पताल में इलाज के दौरान ही मौत हो गई। कुनेरा निवासी सुमन देवी (32) आठ दिन से बुखार से ग्रस्त थी।
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प्राइवेट चिकित्सालय में इनकी मौत हो गई। वहीं इन गांवों में 100 से अधिक लोग बुखार की चपेट में आ गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कुनेरा गांव पहुंचकर 70 मरीजों को दवाएं वितरित कीं मगर विभाग बुखार से मौत की बात से इन्कार कर रहा है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. प्रखर श्रीवास्तव का कहना है कि टीम भेजकर दवाएं वितरित कराई जाएंगी।
देवपालपुर में भी बुखार से पीड़ित हैं कई लोग
तंबौर/सीतापुर। मिश्रिख व औरंगाबाद के बाद अब तंबौर इलाके में भी बुखार का प्रकोप पहुंच गया है। देवपालपुर में पिछले एक सप्ताह के अंदर तीन की मौत हो चुकी है। वहीं 100 से अधिक लोग बुखार से पीड़ित है। गांव के रामप्रसाद, बृजकिशोर व लखानी की बुखार से मौत हो चुकी है।
इसके अलावा रामखेलावन (45), भगवानदीन (26), अनूप (4), राजरानी (40), शत्रोहन (50), छोटू (9), नंदराम (26), सोनेलाल (30), रिन्कू (10), रामजी (5), रमेश (25), चंदवती (65) तेज बुखार से परेशान हैं। वहीं उमाशंकर (30) की हालत गंभीर बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव बाढ़ की चपेट में था। डीएम ने मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फॉगिंग कराने की बात कही थी। लेकिन आज तक एक भी गांव में फॉगिंग नहीं कराई गई है। न ही कोई टीम गांव पहुंची है। सफाईकर्मी न आने से हर तरफ गंदगी फैली हुई है। फिर भी स्वास्थ्य महकमा इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
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औरंगाबाद/सीतापुर। मिश्रिख व गोंदलामऊ विकासखंड में बुखार से चार की मौत हो गई। सौ से अधिक लोग बुखार से पीड़ित है। कोई सरकारी तो कोई प्राइवेट चिकित्सालय में इलाज करा रहा है। बुखार से मरने की वाली संख्या 19 से 23 पहुंच गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एक गांव जाकर कुछ मरीजों को दवाएं वितरित कीं। अन्य गांवों में टीम ने जाना जरुरी नहीं समझा।
मिश्रिख विकासखंड के अकबरपुर निवासी गोलू (12) को कई दिन से बुखार आ रहा था। पहले मिश्रिख सीएचसी पर दिखाया। हालत गंभीर होने पर जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। शनिवार को रास्ते में गोलू ने दम तोड़ दिया। गोंदलामऊ विकासखंड के रामपुर मढिय़ा निवासी साधना (12) दो दिन से बुखार से पीड़ित थी।
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इनका प्राइवेट अस्पताल में इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान ही मौत हो गई। रघुनाथपुर हरिहरपुर निवासी रितेश (2) माह एक सप्ताह से तेज बुखार की चपेट में था। प्राइवेट अस्पताल में इलाज के दौरान ही मौत हो गई। कुनेरा निवासी सुमन देवी (32) आठ दिन से बुखार से ग्रस्त थी।
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प्राइवेट चिकित्सालय में इनकी मौत हो गई। वहीं इन गांवों में 100 से अधिक लोग बुखार की चपेट में आ गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कुनेरा गांव पहुंचकर 70 मरीजों को दवाएं वितरित कीं मगर विभाग बुखार से मौत की बात से इन्कार कर रहा है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. प्रखर श्रीवास्तव का कहना है कि टीम भेजकर दवाएं वितरित कराई जाएंगी।
देवपालपुर में भी बुखार से पीड़ित हैं कई लोग
तंबौर/सीतापुर। मिश्रिख व औरंगाबाद के बाद अब तंबौर इलाके में भी बुखार का प्रकोप पहुंच गया है। देवपालपुर में पिछले एक सप्ताह के अंदर तीन की मौत हो चुकी है। वहीं 100 से अधिक लोग बुखार से पीड़ित है। गांव के रामप्रसाद, बृजकिशोर व लखानी की बुखार से मौत हो चुकी है।
इसके अलावा रामखेलावन (45), भगवानदीन (26), अनूप (4), राजरानी (40), शत्रोहन (50), छोटू (9), नंदराम (26), सोनेलाल (30), रिन्कू (10), रामजी (5), रमेश (25), चंदवती (65) तेज बुखार से परेशान हैं। वहीं उमाशंकर (30) की हालत गंभीर बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव बाढ़ की चपेट में था। डीएम ने मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फॉगिंग कराने की बात कही थी। लेकिन आज तक एक भी गांव में फॉगिंग नहीं कराई गई है। न ही कोई टीम गांव पहुंची है। सफाईकर्मी न आने से हर तरफ गंदगी फैली हुई है। फिर भी स्वास्थ्य महकमा इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।