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जल संचयन को लेकर अफसर उदासीन जिले के
Updated Mon, 03 Jul 2017 02:03 AM IST
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जिले के दो ब्लॉकों में भूजल स्तर सेमी क्रिटिकल श्रेणी में
जल संचयन को लेकर अफसर उदासीन
जिले की चौका नदी बनी इतिहास व सरायन पर भी मंडरा रहा खतरा
सीतापुर। जिले में जल संरक्षण का कोई इंतजाम नहीं है। लिहाजा, जलस्तर तेजी से गिर रहा है। लगातार घटते जा रहे जलस्तर से जिले के दो ब्लॉक सेमी क्रिटिकल श्रेणी में आ गए हैं। इसके बाद भी अफसर जल संरक्षण को लेकर फिक्रमंद नजर नहीं आ रहे हैं। अनदेखी का आलम यह कि चौका नदी अब इतिहास बन गई है। जल्द ही हम न चेते तो हालात बेकाबू हो सकते हैं।
जिले में दावों के उलटे वर्षा के जल को संरक्षित करने के कोई उपाय नहीं किए जा रहे हैं। जल संचयन के लिए सिर्फ मुख्यालय के सदर तहसील भवन पर रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगा है। इसके अलावा जिले में किसी भी सरकारी भवन पर जल संचयन के लिए कोई इंतजाम नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में खोदे गए मॉडल तालाब भी नाकाम साबित हो रहे हैं। वहीं प्राकृतिक तालाबों, झीलों व पोखरों पर अवैध कब्जों ने जल संरक्षण की राह में रोड़ा अटका रखा है। अफसरों की अनदेखी से गांजर में बहने वाली चौका नदी का अस्तित्व खत्म हो गया है। शहर के बीच से बह रही सरायन नदी भी सिकुड़ती जा रही है। यही हाल गोन नदी का है। लघु सिंचाई विभाग के मुताबिक भूजल लगातार गिरता जा रहा है। जिसके चलते जिले के गोंदलामऊ व एलिया ब्लॉक में सेमी क्रिटिकल श्रेणी में पहुंच गए हैं। गोंदलामऊ के जलस्तर में करीब 79 फीसदी जबकि एलिया में लगभग 94 फीसदी कमी पाई गई है। जल संरक्षण को लेकर अगर इसी तरह लापरवाही बरती जाती रही तो आने वाले समय में हालात बेकाबू हो सकते हैं।
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जलस्तर सामान्य रखने को बारिश भी पर्याप्त नहीं
जिले में कुल 211774.34 हेक्टोमीटर भूजल उपलब्ध है। जानकार बताते हैं, कि जल स्तर सामान्य रखने के लिए एक हजार मिली. बारिश होनी चाहिए, लेकिन पिछले साल सिर्फ 659 मिली. बारिश हुई थी।
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जल की बर्बादी रोकनी होगी
जल दोहन की रोकथाम के साथ जागरूकता फैलाकर जल को बेकार बहने पर भी अंकुश लगाना होगा। वहीं जल संरक्षण भी बेहद जरूरी है। यह प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
एसपी रस्तोगी
बाक्स
अभी चेत जाने में ही भलाई
पानी हर व्यक्ति की मूलभूत आवश्यकता है। इसके बिना जीवन संभव नहीं है। हालात बेकाबू हों इससे पहले हम सबके चेत जाने में ही भलाई है। जल संचयन के साथ ही दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
डॉ. एके सिंह
बाक्स
जल संचयन के प्रति प्रशासन जागरूक है। वर्षा के पानी को संरक्षित करने के लिए गांवों में तालाब बनवाए गए हैं। नए सरकारी भवनों पर भी रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए हैं। यही नहीं लोगों को जागरूक करने का भी काम किया जा रहा है।
डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया, सीडीओ
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जल संचयन को लेकर अफसर उदासीन
जिले की चौका नदी बनी इतिहास व सरायन पर भी मंडरा रहा खतरा
सीतापुर। जिले में जल संरक्षण का कोई इंतजाम नहीं है। लिहाजा, जलस्तर तेजी से गिर रहा है। लगातार घटते जा रहे जलस्तर से जिले के दो ब्लॉक सेमी क्रिटिकल श्रेणी में आ गए हैं। इसके बाद भी अफसर जल संरक्षण को लेकर फिक्रमंद नजर नहीं आ रहे हैं। अनदेखी का आलम यह कि चौका नदी अब इतिहास बन गई है। जल्द ही हम न चेते तो हालात बेकाबू हो सकते हैं।
जिले में दावों के उलटे वर्षा के जल को संरक्षित करने के कोई उपाय नहीं किए जा रहे हैं। जल संचयन के लिए सिर्फ मुख्यालय के सदर तहसील भवन पर रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगा है। इसके अलावा जिले में किसी भी सरकारी भवन पर जल संचयन के लिए कोई इंतजाम नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में खोदे गए मॉडल तालाब भी नाकाम साबित हो रहे हैं। वहीं प्राकृतिक तालाबों, झीलों व पोखरों पर अवैध कब्जों ने जल संरक्षण की राह में रोड़ा अटका रखा है। अफसरों की अनदेखी से गांजर में बहने वाली चौका नदी का अस्तित्व खत्म हो गया है। शहर के बीच से बह रही सरायन नदी भी सिकुड़ती जा रही है। यही हाल गोन नदी का है। लघु सिंचाई विभाग के मुताबिक भूजल लगातार गिरता जा रहा है। जिसके चलते जिले के गोंदलामऊ व एलिया ब्लॉक में सेमी क्रिटिकल श्रेणी में पहुंच गए हैं। गोंदलामऊ के जलस्तर में करीब 79 फीसदी जबकि एलिया में लगभग 94 फीसदी कमी पाई गई है। जल संरक्षण को लेकर अगर इसी तरह लापरवाही बरती जाती रही तो आने वाले समय में हालात बेकाबू हो सकते हैं।
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जलस्तर सामान्य रखने को बारिश भी पर्याप्त नहीं
जिले में कुल 211774.34 हेक्टोमीटर भूजल उपलब्ध है। जानकार बताते हैं, कि जल स्तर सामान्य रखने के लिए एक हजार मिली. बारिश होनी चाहिए, लेकिन पिछले साल सिर्फ 659 मिली. बारिश हुई थी।
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जल की बर्बादी रोकनी होगी
जल दोहन की रोकथाम के साथ जागरूकता फैलाकर जल को बेकार बहने पर भी अंकुश लगाना होगा। वहीं जल संरक्षण भी बेहद जरूरी है। यह प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
एसपी रस्तोगी
बाक्स
अभी चेत जाने में ही भलाई
पानी हर व्यक्ति की मूलभूत आवश्यकता है। इसके बिना जीवन संभव नहीं है। हालात बेकाबू हों इससे पहले हम सबके चेत जाने में ही भलाई है। जल संचयन के साथ ही दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
डॉ. एके सिंह
बाक्स
जल संचयन के प्रति प्रशासन जागरूक है। वर्षा के पानी को संरक्षित करने के लिए गांवों में तालाब बनवाए गए हैं। नए सरकारी भवनों पर भी रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए हैं। यही नहीं लोगों को जागरूक करने का भी काम किया जा रहा है।
डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया, सीडीओ