{"_id":"5c69a5adbdec227366791df1","slug":"181550427565-sitapur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"तनाव दूर करने के दिए मंत्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तनाव दूर करने के दिए मंत्र
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सीतापुर। ब्रह्म कुमारी सेवा संस्थान की ओर से आयोजित अलविदा तनाव ध्यान शिविर में लोगों को तनाव दूर करने के उपाय बताए गए। साथ ही एक मिनट की ध्यान मुद्रा में शांति मंत्र भी बतलाया।
शहर स्थित लालबाग पार्क में आयोजित अलविदा तनाव ध्यान शिविर में वक्ता बीके पूनम ने बताया कि आज मनुष्य अधिकाधिक धनार्जन करने के दौर में खुशियां मनाना भी भूल चुका है। जबकि मात्र पैसा सच्ची खुशियों का माध्यम नहीं है। यदि हम चाहते हैं कि वास्तव में प्रसन्न रहें तो उसके लिए आवश्यक है कि हम सदा सकारात्मक सोच रखें और अपने आप से कहें मैं आनंदमय हूं। दिन में कई बार इसे दोहराएं। यही कार्य हमें उत्साह व जोश की अनुभूति करवाता है।
उन्होंने बताया कि तनाव हमारे शरीर को रोगी बनाता है, इसलिए यह कहना बंद ही कर दें कि मैं तनावग्रस्त हूं। क्योंकि यदि आप ऐसा कहते रहे तो यही आपका संस्कार बन जाएगा। इस स्थिति में मुक्ति के लिए बताया गया कि सदा सोच को सकारात्मक रखें।
विज्ञापन
यदि आप हर हाल में खुश रहना चाहते हो तो अपने आपसे सदा कहते रहें कि समय जैसा भी है, वह गुजर जाएगा। सदा सबके लिए अच्छी भावनाएं रखें। ईर्ष्या, तनाव व नफरत ही हमारी सेहत, शांति व सुखी निंद्रा के शत्रु हैं।
हमारे मन की दो स्थितियां है, एक आंतरिक व दूसरी बाह्य। अपने आंतरिक मन को हम जैसा निर्देश देते हैं, वह उसे उसी रूप में कार्य पूर्ण करता है। केंद्र की संचालिका ब्रह्म कुमारी योगेश्वरी बहन ने बताया कि यह शिविर पूर्णतया निशुल्क है। यह शिविर 26 फरवरी तक चलेगा।
विज्ञापन
शहर स्थित लालबाग पार्क में आयोजित अलविदा तनाव ध्यान शिविर में वक्ता बीके पूनम ने बताया कि आज मनुष्य अधिकाधिक धनार्जन करने के दौर में खुशियां मनाना भी भूल चुका है। जबकि मात्र पैसा सच्ची खुशियों का माध्यम नहीं है। यदि हम चाहते हैं कि वास्तव में प्रसन्न रहें तो उसके लिए आवश्यक है कि हम सदा सकारात्मक सोच रखें और अपने आप से कहें मैं आनंदमय हूं। दिन में कई बार इसे दोहराएं। यही कार्य हमें उत्साह व जोश की अनुभूति करवाता है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि तनाव हमारे शरीर को रोगी बनाता है, इसलिए यह कहना बंद ही कर दें कि मैं तनावग्रस्त हूं। क्योंकि यदि आप ऐसा कहते रहे तो यही आपका संस्कार बन जाएगा। इस स्थिति में मुक्ति के लिए बताया गया कि सदा सोच को सकारात्मक रखें।
विज्ञापन
यदि आप हर हाल में खुश रहना चाहते हो तो अपने आपसे सदा कहते रहें कि समय जैसा भी है, वह गुजर जाएगा। सदा सबके लिए अच्छी भावनाएं रखें। ईर्ष्या, तनाव व नफरत ही हमारी सेहत, शांति व सुखी निंद्रा के शत्रु हैं।
हमारे मन की दो स्थितियां है, एक आंतरिक व दूसरी बाह्य। अपने आंतरिक मन को हम जैसा निर्देश देते हैं, वह उसे उसी रूप में कार्य पूर्ण करता है। केंद्र की संचालिका ब्रह्म कुमारी योगेश्वरी बहन ने बताया कि यह शिविर पूर्णतया निशुल्क है। यह शिविर 26 फरवरी तक चलेगा।