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विश्व पर्यटन दिवस: धार्मिक-सांस्कृतिक धरोहर संजोए है महात्मा बुद्ध की कर्मस्थली
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धार्मिक-सांस्कृतिक धरोहर संजोए है बुद्ध की कर्मस्थली
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। विश्व को बुद्धत्व के ज्ञान से प्रकाशित करने वाले महात्मा बुद्ध की कर्मस्थली, पांडवों के अज्ञातवास की शरणस्थली, ऋषि एतरेय की तपोभूमि जैसे एतिहासिक रमणीक पर्यटन स्थल समेटे है। साईबेरियन सारस और प्रवासी पक्षियों के आकर्षित करने वाले झुंड भी बजहा ताल, मझौलीताल भी पर्यटकों की पसंद हैं। विश्व पर्यटन दिवस पर सिद्धार्थनगर वासी बता रहे हैं अपना पसंदीदा पर्यटन स्थल।
अधिवक्ता शुभांगी द्विवेदी भारत को कपिलवस्तु स्तूप बहुत भाता है। कहती हैं कि विश्व को शांति, करुणा और अहिंसा की शिक्षा देने वाले महात्मा बुद्ध की कर्मस्थली पर्यटन स्थल से ज्यादा आत्मिक शांति का केंद्र है। वह अपने मेहमानों को कपिलवस्तु ले जाना चाहेंगी।
शोहरतगढ़ निवासी अनवारुल हक बजहा ताल के प्रेमी हैं। उनके मुताबिक यह प्रकृति के अनमोल खजानों से भरा प्राचीन ताल है। अक्तूबर से फरवरी के बीच प्रवासी पक्षियों का कलरव मन मोह लेता है। वह अतिथियों को सर्दी में ही आमंत्रित करते हैं ताकि इस ताल की खूबसूरती का आनंद ले सकें।
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नौगढ़ के राधेश्याम अपने मेहमानों को पिपरहवा ले जाना पसंद करते हैं। उन्हें शाक्यराज परिवार की खंडहर हो चुकी एतिहासिक इमारतें आकर्षित करती हैं। कहते हैं कि यह जगह भारत के समृद्ध सांस्कृतिक, धार्मिक गौरव की याद दिलाती है।
पश्चिम गोला मोहल्ला निवासी सूर्यप्रकाश अपने मेहमानों को शोहरतगढ़ स्थित बैराज पुल और कपिलवस्तु बौद्ध विहार, संग्रहालय ले जाते हैं। कारण बताते हैं कि भगवान बुद्ध की कर्मस्थली होने के कारण इन स्थानों सेे ज्यादा जुड़ाव है। संग्रहालय घूमने पर क्षेत्र के सांस्कृतिक, धार्मिक जीवनशैली की जानकारी मिलती है।
मुड़िला तेतरी बाजार निवासी नियाज कपिलवस्तुवी को महात्मा बुद्ध का आंगन प्यारा लगता है। वह कहते हैं कि कपिलवस्तु में बौद्ध स्तूप और पार्क का सौंदर्य मन को शुद्ध करता है। इसके सौंदर्य को वह कुछ इस तरह बयान करते हैं। सिद्धार्थ का आंगन है ये, गौतम की जमीं है, हम सबको नाज है कि कपिलवस्तु यहीं है।
महनगा गांव निवासी विकास पासवान को भी शाक्य राजधानी कपिलवस्तु आकर्षित करती है। वह अपने मेहमान को कपिलवस्तु के विशाल स्तूप और मठों के खंडहर दिखा कर उस व्यक्तित्व की गरिमा से रूबरू कराते हैं जिसने विश्व को ज्ञान से प्रकाशित किया।
विजय नगर निवासी रंजना मिश्रा के मन को गनवरिया और पिपरहवा के राजमहल के खंडहर आकर्षित करते हैं। कहती हैं कि राजमहल दर्शाता है कि महात्मा बुद्ध ने राजपाठ त्याग कर दुनिया को त्याग, शांति और मैत्री का संदेश दिया।
तेतरी बाजार निवासी आशीष कुमार अपने मेहमानों को भारतभारी मंदिर के दर्शन कराते हैं। बताते हैं कि यह मंदिर महाभारत काल की याद दिलाता है। पांडव भाइयों में भीम ने इस शिवमंदिर की स्थापना की थी। यहां आकर आत्मिक शांति मिलती है।
सेमरा गांव निवासी सुशील कुमार को महात्मा बुद्ध के पिता शुद्धोधन की राजधानी आकर्षित करती है। वह अपने मेहमानों को कपिलवस्तु और कपिलवस्तु विश्वविद्यालय घुमाने ले जाते हैं।
बर्डपुर निवासी अनूप श्रीवास्तव को पल्टादेवी मंदिर के दर्शन करना पसंद है। बताते हैं कि अज्ञातवास के दौरान पांच पांडव यहां पहुंचे और प्राचीन काल से स्थापित देवी की मूर्ति की पूजा की। माना जाता है कि यहीं से पांडवों के भाग्य ने पलटा खाया, तब से मंदिर को नाम पल्टा देवी पड़ा। वह मेहमानों को यहां इसलिए लाते हैं कि भाग्य चमक जाए।
शहर की इंद्रवती देवी की आस्था जोगमाया मंदिर जोगिया से जुड़ी है। वह बताती हैं कि महाभारत काल में पांडवों ने यहां शिवलिंग स्थापित किया था। यह सिद्धस्थल है। कहती हैं कि मंदिर जाने से पर्यटन और मन की शुद्धि होने के साथ मनोकामना भी पूरी होती है। वह अपने घर आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को जोगमाया मंदिर जरूर ले जाती हैं।
शहर के हबीबुल्लाह नगर छात्र चंद्रपाल के लिए सिद्धार्थ विश्वविद्यालय ही पर्यटनस्थल, शिक्षा का मंदिर है। वह कहते हैं कि महात्मा बुद्ध की कर्मस्थली पर बनाया गया विश्वविद्यालय परिसर आधुनिक पर्यटन स्थल है। वह अपने मेहमान और दोस्तों को इसका दिलकश भवन और परिसर जरूर दिखाते हैं।
पिपरा नायक गांव निवासी मोनी त्रिपाठी राजकुमार सिद्धार्थ के बचपन की घटनाएं लुभाती हैं इसलिए वह अपने मेहमानों को कपिलवस्तु स्थित राजा शुद्धोधन के राजमहल और राजधानी जरूर घुमाने ले जाती हैं।
ग्राम भखलिया निवासी सुनील चौधरी को कपिलवस्तु उद्यान और गनवरिया पार्क पसंद है। कहती हैं कि इन उद्यान में सिद्धार्थ और बुद्धत्व प्राप्त करने के बाद महात्मा बुद्ध ने रमण किया। यही कारण है कि इस उद्यान में आध्यात्मिक शांति का अहसास होता है। वह अपने मेहमानों को अन्य पर्यटन स्थलों के साथ यहां भी जरूर लेकर आती हैं।
बेलहिया चौराहा निवासी प्रीति चौरसिया के लिए गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर पर्यटन ओर आस्था का केंद्र है। कहती हैं कि मंदिर परिसर में हमेशा सामाजिक, सांस्कृतिक आयोजन होते रहते हैं। लोग अक्सर खिचड़ी चढ़ाने आते हैं। मंदिर के दर्शन करने से ही सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं इसलिए वह अतिथियों को दर्शन कराने जरूर ले जाती हैं।
उसका बाजार पकड़ी बाजार निवासी विजय गुप्ता के लिए पाटन देवी मंदिर तुलसीपुर ऊर्जा का स्रोत है। वह कहते हैं कि देश के 51 शक्तिपीठों में एक इस मंदिर का मनोरम दृश्य मनमोह लेता है और सारे कष्ट भी दूर हो जाते हैं। अतिथियों को इसलिए मंदिर के दर्शन कराने ले जाते हैं कि उनके मन भी शुद्ध और निर्मल हो जाएं।
मिठवल ब्लॉक के गौरी गांव निवासी पीयूष कुमार पर्यटन के शौकीन हैं इसलिए वह अपने अतिथियों को कपिलवस्तु, बजहा ताल, सिंहेश्वरी मंदिर, भारतभारी मंदिर, पिपरहवा आदि पर्यटन स्थल पर ले जाते हैं। पीयूष कुमार कहते हैं कि पर्यटन स्थल घूमने से बेहतर जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है।
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अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। विश्व को बुद्धत्व के ज्ञान से प्रकाशित करने वाले महात्मा बुद्ध की कर्मस्थली, पांडवों के अज्ञातवास की शरणस्थली, ऋषि एतरेय की तपोभूमि जैसे एतिहासिक रमणीक पर्यटन स्थल समेटे है। साईबेरियन सारस और प्रवासी पक्षियों के आकर्षित करने वाले झुंड भी बजहा ताल, मझौलीताल भी पर्यटकों की पसंद हैं। विश्व पर्यटन दिवस पर सिद्धार्थनगर वासी बता रहे हैं अपना पसंदीदा पर्यटन स्थल।
अधिवक्ता शुभांगी द्विवेदी भारत को कपिलवस्तु स्तूप बहुत भाता है। कहती हैं कि विश्व को शांति, करुणा और अहिंसा की शिक्षा देने वाले महात्मा बुद्ध की कर्मस्थली पर्यटन स्थल से ज्यादा आत्मिक शांति का केंद्र है। वह अपने मेहमानों को कपिलवस्तु ले जाना चाहेंगी।
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शोहरतगढ़ निवासी अनवारुल हक बजहा ताल के प्रेमी हैं। उनके मुताबिक यह प्रकृति के अनमोल खजानों से भरा प्राचीन ताल है। अक्तूबर से फरवरी के बीच प्रवासी पक्षियों का कलरव मन मोह लेता है। वह अतिथियों को सर्दी में ही आमंत्रित करते हैं ताकि इस ताल की खूबसूरती का आनंद ले सकें।
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नौगढ़ के राधेश्याम अपने मेहमानों को पिपरहवा ले जाना पसंद करते हैं। उन्हें शाक्यराज परिवार की खंडहर हो चुकी एतिहासिक इमारतें आकर्षित करती हैं। कहते हैं कि यह जगह भारत के समृद्ध सांस्कृतिक, धार्मिक गौरव की याद दिलाती है।
पश्चिम गोला मोहल्ला निवासी सूर्यप्रकाश अपने मेहमानों को शोहरतगढ़ स्थित बैराज पुल और कपिलवस्तु बौद्ध विहार, संग्रहालय ले जाते हैं। कारण बताते हैं कि भगवान बुद्ध की कर्मस्थली होने के कारण इन स्थानों सेे ज्यादा जुड़ाव है। संग्रहालय घूमने पर क्षेत्र के सांस्कृतिक, धार्मिक जीवनशैली की जानकारी मिलती है।
मुड़िला तेतरी बाजार निवासी नियाज कपिलवस्तुवी को महात्मा बुद्ध का आंगन प्यारा लगता है। वह कहते हैं कि कपिलवस्तु में बौद्ध स्तूप और पार्क का सौंदर्य मन को शुद्ध करता है। इसके सौंदर्य को वह कुछ इस तरह बयान करते हैं। सिद्धार्थ का आंगन है ये, गौतम की जमीं है, हम सबको नाज है कि कपिलवस्तु यहीं है।
महनगा गांव निवासी विकास पासवान को भी शाक्य राजधानी कपिलवस्तु आकर्षित करती है। वह अपने मेहमान को कपिलवस्तु के विशाल स्तूप और मठों के खंडहर दिखा कर उस व्यक्तित्व की गरिमा से रूबरू कराते हैं जिसने विश्व को ज्ञान से प्रकाशित किया।
विजय नगर निवासी रंजना मिश्रा के मन को गनवरिया और पिपरहवा के राजमहल के खंडहर आकर्षित करते हैं। कहती हैं कि राजमहल दर्शाता है कि महात्मा बुद्ध ने राजपाठ त्याग कर दुनिया को त्याग, शांति और मैत्री का संदेश दिया।
तेतरी बाजार निवासी आशीष कुमार अपने मेहमानों को भारतभारी मंदिर के दर्शन कराते हैं। बताते हैं कि यह मंदिर महाभारत काल की याद दिलाता है। पांडव भाइयों में भीम ने इस शिवमंदिर की स्थापना की थी। यहां आकर आत्मिक शांति मिलती है।
सेमरा गांव निवासी सुशील कुमार को महात्मा बुद्ध के पिता शुद्धोधन की राजधानी आकर्षित करती है। वह अपने मेहमानों को कपिलवस्तु और कपिलवस्तु विश्वविद्यालय घुमाने ले जाते हैं।
बर्डपुर निवासी अनूप श्रीवास्तव को पल्टादेवी मंदिर के दर्शन करना पसंद है। बताते हैं कि अज्ञातवास के दौरान पांच पांडव यहां पहुंचे और प्राचीन काल से स्थापित देवी की मूर्ति की पूजा की। माना जाता है कि यहीं से पांडवों के भाग्य ने पलटा खाया, तब से मंदिर को नाम पल्टा देवी पड़ा। वह मेहमानों को यहां इसलिए लाते हैं कि भाग्य चमक जाए।
शहर की इंद्रवती देवी की आस्था जोगमाया मंदिर जोगिया से जुड़ी है। वह बताती हैं कि महाभारत काल में पांडवों ने यहां शिवलिंग स्थापित किया था। यह सिद्धस्थल है। कहती हैं कि मंदिर जाने से पर्यटन और मन की शुद्धि होने के साथ मनोकामना भी पूरी होती है। वह अपने घर आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को जोगमाया मंदिर जरूर ले जाती हैं।
शहर के हबीबुल्लाह नगर छात्र चंद्रपाल के लिए सिद्धार्थ विश्वविद्यालय ही पर्यटनस्थल, शिक्षा का मंदिर है। वह कहते हैं कि महात्मा बुद्ध की कर्मस्थली पर बनाया गया विश्वविद्यालय परिसर आधुनिक पर्यटन स्थल है। वह अपने मेहमान और दोस्तों को इसका दिलकश भवन और परिसर जरूर दिखाते हैं।
पिपरा नायक गांव निवासी मोनी त्रिपाठी राजकुमार सिद्धार्थ के बचपन की घटनाएं लुभाती हैं इसलिए वह अपने मेहमानों को कपिलवस्तु स्थित राजा शुद्धोधन के राजमहल और राजधानी जरूर घुमाने ले जाती हैं।
ग्राम भखलिया निवासी सुनील चौधरी को कपिलवस्तु उद्यान और गनवरिया पार्क पसंद है। कहती हैं कि इन उद्यान में सिद्धार्थ और बुद्धत्व प्राप्त करने के बाद महात्मा बुद्ध ने रमण किया। यही कारण है कि इस उद्यान में आध्यात्मिक शांति का अहसास होता है। वह अपने मेहमानों को अन्य पर्यटन स्थलों के साथ यहां भी जरूर लेकर आती हैं।
बेलहिया चौराहा निवासी प्रीति चौरसिया के लिए गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर पर्यटन ओर आस्था का केंद्र है। कहती हैं कि मंदिर परिसर में हमेशा सामाजिक, सांस्कृतिक आयोजन होते रहते हैं। लोग अक्सर खिचड़ी चढ़ाने आते हैं। मंदिर के दर्शन करने से ही सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं इसलिए वह अतिथियों को दर्शन कराने जरूर ले जाती हैं।
उसका बाजार पकड़ी बाजार निवासी विजय गुप्ता के लिए पाटन देवी मंदिर तुलसीपुर ऊर्जा का स्रोत है। वह कहते हैं कि देश के 51 शक्तिपीठों में एक इस मंदिर का मनोरम दृश्य मनमोह लेता है और सारे कष्ट भी दूर हो जाते हैं। अतिथियों को इसलिए मंदिर के दर्शन कराने ले जाते हैं कि उनके मन भी शुद्ध और निर्मल हो जाएं।
मिठवल ब्लॉक के गौरी गांव निवासी पीयूष कुमार पर्यटन के शौकीन हैं इसलिए वह अपने अतिथियों को कपिलवस्तु, बजहा ताल, सिंहेश्वरी मंदिर, भारतभारी मंदिर, पिपरहवा आदि पर्यटन स्थल पर ले जाते हैं। पीयूष कुमार कहते हैं कि पर्यटन स्थल घूमने से बेहतर जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है।