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ग्राम्य विकास विभाग के अधीन नहीं करेंगे काम
Siddharth Nagar
Updated Fri, 10 Jun 2016 11:58 PM IST
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कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित धरने में मौजूद पंचायती राज विभाग के कर्मचारी।
- फोटो : अमर उजाला
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पंचायती राज विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों को ग्राम्य विकास विभाग के अधीन किए जाने के विरोध में शुक्रवार को कर्मचारियों ने कलेक्ट्रेट पर धरना दिया। जिले भर से कलेक्ट्रेट पहुंचे पंचायती राज विभाग के कर्मचारियों ने ग्राम्य विकास विभाग के अधीन काम न करने की आवाज उठाई और पूर्व में जारी शासनादेशों को कर्मचारी विरोधी करार देते हुए रद्द करने की मांग की। इस दौरान मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सिद्धार्थनगर के जिलाधिकारी को दिया गया।
पंचायत राज सेवा परिषद के बैनर तले धरने को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष वीरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि पंचायती सेवा नियमावली में समय-समय पर हुए संशोधनों के चलते पंचायती राज विभाग के कर्मचारी ग्राम्य विकास विभाग के पूरी तरह अधीन हो गए हैं। खंड स्तर पर बीडीओ अपना सारा काम एडीओ पंचायत से कराते हैं और श्रेय खुद लेते हैं। इन्हीं संशोधनों के चलते एडीओ पंचायत का बीडीओ के रूप में पदोन्नति कोटा वर्ष 1991 में खत्म कर दिया गया। पंचायत चुनाव के परिसीमन से लेकर वार्डों के निर्धारण तक सभी कार्य एडीओ पंचायत करते हैं, मगर मानदेय बीडीओ को मिलता है।
इसी तरह ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम, जनगणना के लिए रैपिड सर्वे के एडीओ पंचायत के काम का श्रेय बीडीओ लेते हैं। सभी बीडीओ पंचायत राज व्यवस्था व विभाग को अपने नियंत्रणाधीन करके चलाना चाहते हैं। जिला मंत्री विनोद कुमार त्रिपाठी ने कहा कि पूरे प्रदेश में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है, जिसमें एक विभाग का दूसरे विभाग के कार्य व कर्मचारियों पर नियंत्रण हो।
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दो विभागों के मध्य समन्वय हो सकता है, मगर नियंत्रण नहीं। ऐेसे में पंचायती राज विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों व कार्यों पर ग्राम्य विकास विभाग के नियंत्रण करने के लिए जारी शासनादेश निरस्त किया जाना जरूरी हो गया है। धरने में गुलाब सिंह, रवि कुमार, आशुतोष मिश्रा, विमलकांत, जफर, बृजेश, कमलेश चतुर्वेदी, लालजी गौतम, इशरतुल्लाह, सभयराज यादव, अवधेश यादव, शंभू प्रसाद, अंजेलुश, प्रेम सागर, अश्विनी पाठक, ब्रह्मदेव पांडेय, राकेश सिंह, रामनरायन झा, रणजीत, संजय तिवारी आदि शामिल रहे।
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पंचायत राज सेवा परिषद के बैनर तले धरने को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष वीरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि पंचायती सेवा नियमावली में समय-समय पर हुए संशोधनों के चलते पंचायती राज विभाग के कर्मचारी ग्राम्य विकास विभाग के पूरी तरह अधीन हो गए हैं। खंड स्तर पर बीडीओ अपना सारा काम एडीओ पंचायत से कराते हैं और श्रेय खुद लेते हैं। इन्हीं संशोधनों के चलते एडीओ पंचायत का बीडीओ के रूप में पदोन्नति कोटा वर्ष 1991 में खत्म कर दिया गया। पंचायत चुनाव के परिसीमन से लेकर वार्डों के निर्धारण तक सभी कार्य एडीओ पंचायत करते हैं, मगर मानदेय बीडीओ को मिलता है।
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इसी तरह ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम, जनगणना के लिए रैपिड सर्वे के एडीओ पंचायत के काम का श्रेय बीडीओ लेते हैं। सभी बीडीओ पंचायत राज व्यवस्था व विभाग को अपने नियंत्रणाधीन करके चलाना चाहते हैं। जिला मंत्री विनोद कुमार त्रिपाठी ने कहा कि पूरे प्रदेश में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है, जिसमें एक विभाग का दूसरे विभाग के कार्य व कर्मचारियों पर नियंत्रण हो।
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दो विभागों के मध्य समन्वय हो सकता है, मगर नियंत्रण नहीं। ऐेसे में पंचायती राज विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों व कार्यों पर ग्राम्य विकास विभाग के नियंत्रण करने के लिए जारी शासनादेश निरस्त किया जाना जरूरी हो गया है। धरने में गुलाब सिंह, रवि कुमार, आशुतोष मिश्रा, विमलकांत, जफर, बृजेश, कमलेश चतुर्वेदी, लालजी गौतम, इशरतुल्लाह, सभयराज यादव, अवधेश यादव, शंभू प्रसाद, अंजेलुश, प्रेम सागर, अश्विनी पाठक, ब्रह्मदेव पांडेय, राकेश सिंह, रामनरायन झा, रणजीत, संजय तिवारी आदि शामिल रहे।