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Siddharthnagar News: तीन सदस्य टीम रोकेगी खनन...रखेगी निगरानी
Sun, 23 Jun 2024 02:38 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 23 Jun 2024 02:38 AM IST
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कपिलवस्तु क्षेत्र में पर्यटन स्थल में भू-माफियाओं के खनन से मिट रहा अस्तित्व
तहसीलदार की अगुवाई में तीन सदस्यीय टीम क्षेत्र में करती रहेगी भ्रमण, लोगों को करेगी प्रेरित
एसडीएम को समय-समय पर रिपोर्ट करेगी तीन सदस्यीय
स्तूप के संरक्षण और भू-माफियाओं द्वारा खनन संबंधित खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन अलर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। कपिलवस्तु क्षेत्र में बौद्ध कालीन धरोहरों के आसपास के क्षेत्रों में नायब तहसीलदार के साथ तीन सदस्यीय टीम निगरानी रखने के साथ-साथ खनन रोकेगी। इन धरोहरों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित और संरक्षित किया जाना है, लेकिन इस क्षेत्र पर भू-माफियाओं की नजर पड़ गई है। जो चोरी छिपे खनन करके अस्तित्व को मिटाने की कोशिश कर रहे हैं। बीते दिनों खनन का मामला सामने आया था।
स्तूप वाले क्षेत्र में अब प्रशासन की नजर रहेगी। इसके लिए नायब तहसीलदार के साथ तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है, जो क्षेत्र पर नजर रखने के साथ ही ग्रामीणों को जागरूक करने का भी काम करेगी। अगर कहीं कुछ ऐसा दिखता है, जैसे कोई खनन कर रहा हो या फिर कोई पुरानी मूर्ति ईंट आदि दिखे तो तत्काल प्रशासन को सूचित करें। जिससे जांच करके उसे संरक्षित किया जा सके। साथ ही खनन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जा सके।
नेपाल बार्डर से सटे सीमावर्ती क्षेत्र कपिलवस्तु गौतम बुद्ध की क्रीड़ा स्थली है। मौजूदा समय में स्तूप सहित कई प्रमाण हैं जो इस बात की गवाही देते हैं कि गौतम बुद्ध यहां रहे हैं। इसके अलावा इतिहास के पन्नों में भी कई स्थान आदि का जिक्र है। यह क्षेत्र पर्यटन के लिए विकसित किया जा रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों के साथ ही बड़ी संख्या में हर साल विदेश से लोग गौतम बुद्ध की क्रीड़ा स्थली को करीब से देखने के लिए आते हैं। हालांकि पर्यटन के विकास के लिहाजा से देखा जाए तो अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। यहां तक की बौद्ध कालीन धरोहर को सही तरीके से संरक्षित भी नहीं किया जा रहा है। इससे उसका लगातार क्षरण हो रहा है।
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इस बात की पुष्टि जांच करने वाले इतिहासकार बता चुके हैं। मौजूदा समय में यहां खनन बड़ी समस्या है, टीलों को देखकर भू- माफिया रातो-रात मिट्टी की खुदाई करके बेच दे रहे हैं। जिससे अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। अभी कुछ दिन पहले ही स्तूप वाले क्षेत्र में खनन किया जा रहा था। इसमें एक अधिकारी पर हमला हुआ। बाद में कार्रवाई हो पाई थी। अब प्रशासन ने इसे संज्ञान में लिया है। खनन और टीलों के क्षरण रोकने के लिए तीन सदस्यी टीम गठित की गई है। इसमें तहसीलदार, कानून और कपिलवस्तु कोतवाल को शामिल किया गया है। जो क्षेत्र में नजर रखेंगे और संरक्षित क्षेत्र में कोई खनन करता है तो कार्रवाई करेंगे।
इस संबंध में एडीएम नौगढ़ डॉ. ललित कुमार मिश्र ने बताया कि तीन सदस्यीय टीम गठित किया गया है। इसमें नायब तहसीलदार समेत तीन लोग हैं।
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ग्रामीणों को करेंंगे जागरुक
तीन सदस्यीय टीम क्षेत्र के ग्रामीणों से मिलेगी। उन्हें बौद्ध कालीन धरोहर के संरक्षण और क्षरण रोकने के लिए प्रेरित करेगी। संकल्प दिलाएगी। इसके साथ ही खनन और अन्य उससे जुड़ी गतिविधियों की जानकारी मिलने पर टीम को सूचना देंगे।
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तहसीलदार की अगुवाई में तीन सदस्यीय टीम क्षेत्र में करती रहेगी भ्रमण, लोगों को करेगी प्रेरित
एसडीएम को समय-समय पर रिपोर्ट करेगी तीन सदस्यीय
स्तूप के संरक्षण और भू-माफियाओं द्वारा खनन संबंधित खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन अलर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। कपिलवस्तु क्षेत्र में बौद्ध कालीन धरोहरों के आसपास के क्षेत्रों में नायब तहसीलदार के साथ तीन सदस्यीय टीम निगरानी रखने के साथ-साथ खनन रोकेगी। इन धरोहरों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित और संरक्षित किया जाना है, लेकिन इस क्षेत्र पर भू-माफियाओं की नजर पड़ गई है। जो चोरी छिपे खनन करके अस्तित्व को मिटाने की कोशिश कर रहे हैं। बीते दिनों खनन का मामला सामने आया था।
स्तूप वाले क्षेत्र में अब प्रशासन की नजर रहेगी। इसके लिए नायब तहसीलदार के साथ तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है, जो क्षेत्र पर नजर रखने के साथ ही ग्रामीणों को जागरूक करने का भी काम करेगी। अगर कहीं कुछ ऐसा दिखता है, जैसे कोई खनन कर रहा हो या फिर कोई पुरानी मूर्ति ईंट आदि दिखे तो तत्काल प्रशासन को सूचित करें। जिससे जांच करके उसे संरक्षित किया जा सके। साथ ही खनन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जा सके।
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नेपाल बार्डर से सटे सीमावर्ती क्षेत्र कपिलवस्तु गौतम बुद्ध की क्रीड़ा स्थली है। मौजूदा समय में स्तूप सहित कई प्रमाण हैं जो इस बात की गवाही देते हैं कि गौतम बुद्ध यहां रहे हैं। इसके अलावा इतिहास के पन्नों में भी कई स्थान आदि का जिक्र है। यह क्षेत्र पर्यटन के लिए विकसित किया जा रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों के साथ ही बड़ी संख्या में हर साल विदेश से लोग गौतम बुद्ध की क्रीड़ा स्थली को करीब से देखने के लिए आते हैं। हालांकि पर्यटन के विकास के लिहाजा से देखा जाए तो अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। यहां तक की बौद्ध कालीन धरोहर को सही तरीके से संरक्षित भी नहीं किया जा रहा है। इससे उसका लगातार क्षरण हो रहा है।
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इस बात की पुष्टि जांच करने वाले इतिहासकार बता चुके हैं। मौजूदा समय में यहां खनन बड़ी समस्या है, टीलों को देखकर भू- माफिया रातो-रात मिट्टी की खुदाई करके बेच दे रहे हैं। जिससे अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। अभी कुछ दिन पहले ही स्तूप वाले क्षेत्र में खनन किया जा रहा था। इसमें एक अधिकारी पर हमला हुआ। बाद में कार्रवाई हो पाई थी। अब प्रशासन ने इसे संज्ञान में लिया है। खनन और टीलों के क्षरण रोकने के लिए तीन सदस्यी टीम गठित की गई है। इसमें तहसीलदार, कानून और कपिलवस्तु कोतवाल को शामिल किया गया है। जो क्षेत्र में नजर रखेंगे और संरक्षित क्षेत्र में कोई खनन करता है तो कार्रवाई करेंगे।
इस संबंध में एडीएम नौगढ़ डॉ. ललित कुमार मिश्र ने बताया कि तीन सदस्यीय टीम गठित किया गया है। इसमें नायब तहसीलदार समेत तीन लोग हैं।
ग्रामीणों को करेंंगे जागरुक
तीन सदस्यीय टीम क्षेत्र के ग्रामीणों से मिलेगी। उन्हें बौद्ध कालीन धरोहर के संरक्षण और क्षरण रोकने के लिए प्रेरित करेगी। संकल्प दिलाएगी। इसके साथ ही खनन और अन्य उससे जुड़ी गतिविधियों की जानकारी मिलने पर टीम को सूचना देंगे।