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वार्ता के बाद बैकफुट पर आए एसई
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 02 Feb 2017 11:12 PM IST
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बेनतीता रही डेढ़ घंटे चली वार्ता
- फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। उपस्थिति के बावजूद लिपिक को अनुपस्थित कर वेतन काटने से नाराज उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ के पदाधिकारियों ने गुरुवार को अधीक्षण अभियंता (एसई) आरईएस बस्ती को जम कर खरी-खोटी सुनाई। मानवीय भूल मानने व उपस्थिति पंजिका में सुधार करने के बाद ही मामला शांत हुआ।
राज्य कर्मचारी महासंघ के जोनल महामंत्री रणबीर सिंह ने बताया कि अधीक्षण अभियंता ने लिपिक रणजीत यादव के दो दिन का वेतन काटने का निर्देश दिया था, जबकि लिपिक ने उस तिथि पर काम किया था। महासंघ के संज्ञान में मामला आने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारी से वार्ता किया। वार्ता सौहार्दपूर्ण वातावरण में चल रही थी कि अभियंता के दो चहेते ठेकेदार बीच में आ गए। ठेकेदारों ने प्रतिनिधिमंडल पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। दो विभागीय बाबूओं को भी बुलाया व लिपिक को दोषी साबित करने में जुट गए। इसके बाद जबरन वार्ता को रोकने का दबाव बनाने लगे।
संगठन व प्रतिनिधिमंडल ने अभियंता को चेतावनी दिया कि मामला डीएम व एसपी के संज्ञान में दिया जाएगा। पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। इसके बाद अधीक्षण अभियंता ने वेतन कटौती करने के आदेश को वापस ले लिया। प्रतिनिधि मंडल में जिलाध्यक्ष जयगोविंद यादव, महामंत्री रणवीर सिंह, गोविंद पांडेय, महेंद्र मिश्र, श्रीराम यादव आदि मौजूद रहे।
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राज्य कर्मचारी महासंघ के जोनल महामंत्री रणबीर सिंह ने बताया कि अधीक्षण अभियंता ने लिपिक रणजीत यादव के दो दिन का वेतन काटने का निर्देश दिया था, जबकि लिपिक ने उस तिथि पर काम किया था। महासंघ के संज्ञान में मामला आने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारी से वार्ता किया। वार्ता सौहार्दपूर्ण वातावरण में चल रही थी कि अभियंता के दो चहेते ठेकेदार बीच में आ गए। ठेकेदारों ने प्रतिनिधिमंडल पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। दो विभागीय बाबूओं को भी बुलाया व लिपिक को दोषी साबित करने में जुट गए। इसके बाद जबरन वार्ता को रोकने का दबाव बनाने लगे।
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संगठन व प्रतिनिधिमंडल ने अभियंता को चेतावनी दिया कि मामला डीएम व एसपी के संज्ञान में दिया जाएगा। पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। इसके बाद अधीक्षण अभियंता ने वेतन कटौती करने के आदेश को वापस ले लिया। प्रतिनिधि मंडल में जिलाध्यक्ष जयगोविंद यादव, महामंत्री रणवीर सिंह, गोविंद पांडेय, महेंद्र मिश्र, श्रीराम यादव आदि मौजूद रहे।
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